जागरण संवाददाता, गुरुग्राम: आरटीआइ कार्यकर्ता हरींद्र ढींगरा द्वारा लोकनिर्माण मंत्री राव नरवीर सिंह की तथाकथित शिक्षा प्रमाणपत्र की जांच को लेकर दायर की गई आपराधिक याचिका पर ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट नवीन कुमार की अदालत में मंगलवार को सुनवाई हुई। इस मामले में पिछली तारीख पर ही बहस पूरी हो चुकी थी और अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। अदालत ने याचिका को तकनीकी आधार का हवाला देते हुए खारिज कर दिया है, जिससे कैबिनेट मंत्री को बड़ी राहत मिली है।

45 पृष्ठ के फैसले में अदालत ने तकनीकी कारणों का जिक्र किया है। दूसरी ओर आरटीआइ कार्यकर्ता का कहना है कि वह निचली अदालत के फैसले को पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में चुनौती देंगे, जिसके लिए उन्होंने अदालत के फैसले की प्रामाणिक प्रति लेने के लिए आवेदन भी कर दिया है। इस मामले को वह उच्च न्यायालय में पूरी तैयारियों के साथ रखेंगे। यह है मामला

हरींद्र ढींगरा ने लोक निर्माण मंत्री पर आरोप लगाए थे। याचिका में उन्होंने बताया था राव नरबीर सिंह ने वर्ष 2005, 2009 और 2014 में चुनाव लड़ा और शपथ पत्र दाखिल किए। उन्होंने वर्ष 2005 में शपथपत्र दाखिल किया था कि 10वीं की पढ़ाई 1976 में उन्होंने माध्यमिक शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश से उत्तीर्ण की है। वर्ष 2009 के चुनाव में शपथ पत्र दाखिल किया कि उन्होंने 10वीं की परीक्षा बिरला विद्या मंदिर नैनीताल से उत्तीर्ण की है तथा साथ ही वर्ष 1986 में हिदी साहित्य में स्नातक करने का उल्लेख भी शपथ पत्र में किया था। शैक्षणिक प्रमाण पत्रों में विरोधाभास व भ्रामक जानकारी देने की शिकायत उन्होंने केंद्रीय चुनाव आयोग से भी की थी।

आयोग ने उन्हें निर्देश दिए थे कि इस सब की शिकायत अदालत में याचिका के रूप में की जाए, जिस पर ढींगरा ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था। उधर याचिकाकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों को राव नरवीर पहले से ही निराधार बता चुके हैं। उन्होंने कहा था कि हरींद्र उनकी छवि को खराब करने में लगे उनके राजनीतिक विरोधियों के मोहरा बने हुए हैं। उन्होंने मान-हानि का दावा करने की बात भी कही थी।

Posted By: Jagran

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