जागरण संवाददाता, गुरुग्राम: नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (एनएसजी) के मानेसर ट्रेनिंग सेटर में सिविल वर्क टेंडर दिलाने के नाम पर ठगी का मास्टर माइंड प्रवीण यादव आलीशान जिदगी जीने का झांसा देकर भी ठगी करता था। उसकी शान-ओ-शौकत को देख कंस्ट्रक्शन कंपनियों के मालिक प्रभावित हो जाते थे। यही नहीं पैसे लेने के बाद सभी को एक-दो बार निश्चित रूप से लौटा देता था। इससे किसी ने उसके बारे में अधिक कुछ जानने के बारे में सोचा ही नहीं। एनएसजी से बीएसएफ में वापस लौटने के बाद भी कंपनियों के मालिक उसके संपर्क में थे। वह मई 2021 तक एनएसजी में डेपुटेशन पर डिप्टी कमांडेंट के पद पर कार्यरत था।

मुख्य आरोपित प्रवीण यादव पर अपनी पत्नी ममता, बहन रितुराज, बहनोई नवीन कुमार, पिता कमल सिंह और बिचौलिये की भूमिका निभाने वाले दिनेश कुमार के साथ मिलीभगत करके पांच कंपनियों के मालिकों से 133 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी का आरोप है। छानबीन के मुताबिक वह हमेशा ही लग्जरी कार से ही चलता था। उसके पास कितनी लग्जरी गाड़ियां हैं, इस बारे में पूरी जानकारी अभी सामने नहीं आई है। फिलहाल उसके कब्जे से 13 करोड़ 81 लाख 26 हजार रुपये के अलावा हैरियर, रेंजरोवर, जीप कंपास, बीएमडब्ल्यू, सफारी, वोल्वो, मर्सडीज की कारें बरामदग की जा चुकी है। वह हमेशा ही अपने आपको को बहुत बड़ा आदमी दर्शाने का प्रयास करता था। इस वजह से करोड़ों रुपये उसके खाते में जमा कराने से पहले किसी कंपनी के मालिक ने नहीं सोचा।

खातों को खंगाला जा रहा है

प्रवीण यादव के लगभग 45 खाते फ्रीज कराए जा चुके हैं। किस खाते में कितने रुपये और कब ट्रांसफर किए गए, इस बारे में जानकारी हासिल की जा रही है। यही नहीं मामले के लिए गठित एसआइटी के नीचे काम कर रही क्राइम ब्रांच की मानेसर टीम के प्रभारी इंस्पेक्टर संदीप कुमार के नेतृत्व में फरार चल रहे आरोपित नवीन कुमार और कमल सिंह की गिरफ्तारी को लगातार छापेमारी चल रही है।

नवीन कुमार एनएसजी में असिस्टेंट कमांडेंट था। वह आइटीबीपी से डेपुटेशन पर आया था। मामला सामने आने के बाद उसे वापस कर दिया गया। सहायक पुलिस आयुक्त (क्राइम) प्रीतपाल का कहना है कि मामले में काफी जानकारी सामने आ चुकी है। फरार चल रहे आरोपितों से भी कुछ अन्य जानकारी सामने आ सकती है।

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