जागरण संवाददाता, गुरुग्राम : नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (एनएसजी) के नाम पर 131 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी मामले में शनिवार शाम तक मुख्य आरोपित प्रवीण यादव के डिमैट एकाउंट सहित 45 एकाउंट फ्रीज कराए जा चुके हैं। शेयर बाजार में पैसे लगाने के लिए उसने डिमैट एकाउंट खोला था। सभी खातों में एनएसजी के खाते से पैसे ट्रांसफर किए गए थे। किस खाते में कितने रुपये ट्रांसफर किए गए थे, इस बारे में जानकारी हासिल की जा रही है। इधर, एसआइटी ने एनएसजी में असिस्टेंट कमांडेंट रहे नवीन कुमार के आवास की छानबीन की। उसमें से लाखों रुपये के सोने और चांदी के आभूषण के साथ ही एक दर्जन से अधिक घड़ियां, तीन लैपटाप और पासपोर्ट बरामद किए गए। बताया जाता है कि कुछ कागजात भी टीम को हाथ लगे हैं। इससे मामले में कुछ और जानकारी सामने आ सकती है। नवीन कुमार मुख्य आरोपित प्रवीण यादव का जीजा है।

इसी महीने आठ जनवरी को एनएसजी के मानेसर कैंपस में सिविल वर्क के लिए टेंडर दिलाने के नाम पर चार कंस्ट्रक्शन कंपनियों के मालिकों से 131 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। मामले में मुख्य आरोपित प्रवीण यादव, उसकी पत्नी ममता यादव, बहन रितुराज यादव और बिचौलिये की भूमिका निभाने वाले दिनेश कुमार की गिरफ्तारी हो चुकी है। चारों से लगातार पूछताछ की जा रही है। पूछताछ के मुताबिक मुख्य आरोपित प्रवीण यादव ने प्रापर्टी में भी काफी पैसे लगाए थे। कहां-कहां प्रापर्टी है, उसके बारे में जानकारी हासिल की जा रही है।

...... तीन-चार साल से शेयर बाजार में पैसे लगा रहा था

एनएसजी में डिप्टी कमांडेंट रहे प्रवीण यादव पिछले तीन-चार साल से शेयर बाजार में जमकर पैसे लगा रहा था। इससे पहले कभी-कभार काम करता था। इस वजह से बीएसएफ से एनएसजी में डेपुटेशन पर आने में उसे परेशानी नहीं हुई। एनएसजी में उसी को लिया जाता है जिसका रिकार्ड पूरी तरह साफ हो। शेयर बाजार से उसने शुरुआत में करोड़ों रुपये कमाए थे। इससे उसका आकर्षण बढ़ता चला गया। इस बीच एक बार बहुत तगड़ा झटका लगा। इस झटके से उबरने के लिए उसने टेंडर दिलाने के नाम पर धोखाधड़ी करने की साजिश रची। वह निर्माण कंपनियों के मालिकों को एनएसजी कैंपस में भी बुलाता था। वहां अपना रुतबा दिखाता था। इससे सभी प्रभावित हो जाते थे। इसका लाभ उसने उठाया। इसमें उसकी मदद उसकी पत्नी, बहन और बहनोई ने की। दिनेश कुमार सहित कई बिचौलिये भी उसने तैयार कर लिए थे। उन्हें कमीशन देता था। दिनेश कुमार को तीन करोड़ रुपये कमीशन के रूप में मिले थे।

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मां के नाम पर लिया था जीरकपुर में फ्लैट

प्रवीण यादव ने चंडीगढ़ के नजदीक जीरकपुर में अपनी मां के नाम पर फ्लैट किराये पर लिया था ताकि किसी को पता नहीं चले। इसी फ्लैट से 13 करोड़ 81 लाख रुपये की बरामदगी की थी। छापेमारी एसआइटी में शामिल क्राइम ब्रांच की मानेसर टीम के प्रभारी इंस्पेक्टर संदीप कुमार के नेतृत्व में की गई थी। जिम्मेदारी मिलने के 72 घंटे के भीतर मुख्य आरोपित को दबोच लिया गया था। इस वजह से मामले का पूरा चिट्ठा जल्द सामने आ गया। बताया जाता है कि उसने विदेश भागने की तैयारी कर ली थी लेकिन लुकआउट नोटिस आड़े आ गया।

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एक और एफआइआर दर्ज हो सकती है

एक और कंस्ट्रक्शन कंपनी के संचालक से टेंडर दिलाने के नाम पर धोखाधड़ी की शिकायत सामने आ रही है। उसने मामला दर्ज कराने की तैयारी शुरू कर दी है। सोमवार या मंगलवार तक आरोपितों के खिलाफ एक और मामला दर्ज हो सकता है।

...... असिस्टेंट कमांडेंट नवीन कुमार की गिरफ्तारी को लेकर कई स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। एसआइटी के नीचे कई अन्य टीमें काम कर रही हैं। सभी ने पूरी ताकत झोंक रख रखी है। सबसे पहली प्राथमिकता मुख्य आरोपित की गिरफ्तारी की थी। उसमें सफलता मिल चुकी है। अन्य आरोपित भी जल्द ही गिरफ्त में होंगे।

--- प्रीतपाल, सहायक पुलिस आयुक्त (क्राइम), गुरुग्राम।

Edited By: Jagran