प्रियंका दुबे मेहता, गुरुग्राम

अपनी बीमारियों को दूर करने के लिए लोग योग करते हैं। इसके साथ ही अब एक नया चलन दिख रहा है। इसमें लोग आगे की पीढि़यों को रोगमुक्त व स्वस्थ बनाए रखने के लिए भी योग का सहारा ले रहे हैं। यहां तक कि अनुवांशिक रोगों से मुक्ति के लिए भी अब लोग विशेष प्रकार के योग को अपना रहे हैं। इसमें एक्टिव योगा के साथ एक्टिव मेडिटेशन भी शामिल है। इसके लिए लोग बाकायदा कक्षाओं व ऑनलाइन ट्रेनिग प्रोग्राम्स से जुड़ रहे हैं। मानसिक सक्रियता बढ़ाता है एक्टिव योग

योग एक्सपर्ट शालिनी का कहना है कि योग कोशिकाओं की न्यूक्लियर संरचना तक को बदलने की क्षमता रखता है। विभिन्न शोध से पता चलता है कि मष्तिष्क के दाता व ग्राही न्यूरॉन भी अधिक सक्रिय हो जाते हैं। मॉलीक्यूलर सिग्नेचर बदलने लगता है। योग एक्सपर्ट रुचिका राय का कहना है कि न्यूक्लियर व सेल्यूलर प्रभाव के कारण शरीर के विकारों को दूर करने से लेकर व्यक्ति विशेष के व्यक्तित्व व दक्षता में भी बदलाव लाया जा सकता है। उनके मुताबिक, लगातार योग करने से कोशिकाओं तक पर प्रभाव पड़ता है। मानसिक सक्रियता भी बढ़ती है। ऐसे में लोग अब इस तरह के इंटेंस योग के प्रति विशेष रुचि दिखा रहे हैं। शहरों में यह ट्रेंड तेजी से फैल रहा है। तनाव दूर करने में लाभदायक

विशेषज्ञों के मुताबिक, डिप्रेशन के 40-50 प्रतिशत मामले जेनेटिक होते हैं। साथ ही बायपोलर डिसऑर्डर, एल्जाइमर्स और डिमेंशिया जैसे मानसिक रोगों तथा आत्महत्या की प्रवृत्ति के पीछे भी आनुवांशिक कारक देखने को मिलते हैं। रुचिका के मुताबिक, शरीर में केमिकल ट्रांसमीटर होता है। सेरोटोनियर और डोपामीन नामक हार्मोन मिलकर दिमाग को संतुलित रखते हैं। लगातार किसी दबाव में रहते हैं, तो हार्मोंस असंतुलित हो जाते हैं। इसी संतुलन को वापस पाने के लिए लोग अब योग की तरफ रुख कर रहे हैं। इन योगासनों के प्रति बढ़ा रुझान

अनुवांशिक बीमारियों को दूर करने के लिए योगासनों पर बहुत प्रयोग हो रहे हैं। योग एक्सपर्ट सुजाता का कहना है कि डाइबिटीज जैसी अनुवांशिक बीमारियों को दूर करने के लिए सेतुबंधासन, बालासन, वज्रासन, सर्वांगासन, हलासन, धर्नुआसन, चक्रासन, कपालभांति, प्राणायाम की सलाह दी जा रही है। हृदय रोग में ताड़ासन, चक्रासन, वज्रासन, पद्मासन, भुजंगासन, नाड़ीशोधन, मृत्यु संजीवनी मुद्रा, हृदय स्तंभन की क्रिया व अपान मुद्रा को तरजीह दी जा रही है। योग का व्यक्तित्व व दक्षता पर जो असर होता है, असल में वह शरीर की न्यूनतम इकाई तक काम करता है। नियमित एक से दो घंटे का योग व प्राणायाम शरीर की कोशिकाओं, जींस व न्यूरोंस पर भी असर डालता है। लोग इस चीज को समझने लगे हैं और कसरत से ज्यादा लोग एक्टिव योगा व मेडिटेशन की तरफ रुख कर रहे हैं।

- रुचिका राय, फिटनेस एक्सपर्ट योगा में व्यक्ति के दिल-ओ-दिमाग में परिवर्तन लाने की शक्ति होती है। ऐसे में लगातार व नियमित योग अभ्यास से शरीर, दिमाग व यहां तक व्यक्तित्व में भी बदलाव लाया जा सकता है। सोशल मीडिया और स्वास्थ्य जागरूकता के दौर में लोग अब योग और नियमित दिनचर्या को प्राथमिकता दे रहे हैं।

- सुजाता, योगा एंड फिटनेस एक्सपर्ट

Posted By: Jagran

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