बिरंचि सिंह, डीएलएफ

डीएलएफ क्षेत्र के छह किलोमीटर के दायरे में रैपिड मेट्रो के लिए युद्धस्तर पर निर्माण कार्य शुरू कर चुका है, वहीं दूसरी ओर चीन में जर्मनी की कंपनी सीमेंस ने रैपिड मेट्रों की ट्रेन और उसकी बोगियों को तैयार करने का काम शुरू कर चुकी है।

वर्ष 2013 के पहले चरण में पहले माह में गुड़गांव के डीएलएफ क्षेत्र में रैपिड मेट्रो जर्मन तकनीकी से निर्मित पांच ट्रेन उतारेगी। प्रत्येक ट्रेन में महज तीन बोगियां होंगी। और इस ट्रेन से प्रतिदिन एक लाख लोगों को ढोने की क्षमता होगी। प्रति साढ़े तीन मिनट के अंतराल पर एक ट्रेन होगी। बाद में 90 सेकेंड के अंतराल पर रैपिड मेट्रो की ट्रेन उपलब्ध होगी। इसकी स्पीड 32 किलोमीटर प्रति घंटा होगी।

रैपिड मेट्रो के लिए वर्तमान में छह जगहों पर स्टेशन बनाने की योजना है, इसके लिए स्टेशन बनाने और रेलवे ट्रैक के लिए पिलर डालने का काम शत-प्रतिशत पूरा हो चुका है। अब ट्रैक का निर्माण कार्य भी शुरू हो चुका है। रैपिड मेट्रो के स्टेशनों में दिल्ली मेट्रो रेल कारपोरेशन की तरह सिकंदरपुर का स्टेशन मुख्य होगा, जहां रैपिड मेट्रो के स्टेशन का अलग से निर्माण होगा। दोनों स्टेशनों में आवागमन के लिए कारीडोर से जोड़ा जाएगा। दूसरा स्टेशन डीएलएफ फेज दो में होगा, जो रिहायशी क्षेत्र है। इसी तरह से बेलवेड्रे पार्क में तीसरा स्टेशन होगा। यहां पर आवासीय क्षेत्र के अलावा व्यवसायिक गतिविधियों वाले भवनों और इमारतों की संख्या ज्यादा है। चौथा स्टेशन गेटवे टावर, पांचवा स्टेशन माल आफ इंडिया और छठा स्टेशन डीएलएफ फेज तीन में होगा। इन जगहों से रिहायशी क्षेत्र में रहने वाले और कामकाजी लोगों का आवाजाही ज्यादा है। डीएलएफ ने छह वर्ष पूर्व 3.1 किलोमीटर तक मेट्रो चलाने की योजना बनाई थी। लेकिन रैपिड मेट्रो ने योजना 6.1 किलोमीटर तक की दूरी बढ़ा दिया है, ताकि डीएलएफ क्षेत्र का अधिकांश हिस्सा कवर हो जाए।

इको फ्रेंडली होंगे रैपिड मेट्रो के स्टेशन

रैपिड मेट्रो के स्टेशन पर्यावरण के अनुकूल होंगे। स्टेशन पर बाहरी शोर कम सुनाई देगा। स्टेशन का डिजाइन कुछ इस तरह से तैयार किया गया है कि प्राकृतिक रूप से सूर्य की रोशनी स्टेशन पर पड़ती रहे। प्रत्येक स्टेशन पर वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को मजबूत किया गया है, ताकि बारिश का पानी सीधे जमीनी जल में बिना प्रदूषण के पहुंचे।

सुरक्षा के बेहतरीन उपाय होंगे

रैपिड मेट्रो के स्टेशनों पर सीसीटीवी कैमरे लगे होंगे, सुरक्षा कर्मियों को भी तैनात किया जाएगा। प्लेटफार्म पर विशेष तौर पर निर्मित दरवाजे भी होंगे। प्लेटफार्म और रेलवे ट्रैक के बीच कुछ इस तरह का निर्माण कार्य हो रहा है, जिससे यात्रियों का ट्रैक पर गिरने का खतरा न हो।

14 किलोमीटर तक रैपिड मेट्रो का विस्तार संभव

रैपिड मेट्रो के 6.1 किलोमीटर के निर्माण पर 1100 करोड़ खर्च होने का अनुमान है। डीएलएफ क्षेत्र में रैपिड मेट्रो के निर्माण के साथ इसके विस्तार की संभावनाएं जताई गई। इस बाबत एक विस्तृत रिपोर्ट भी प्रदेश सरकार के पास पहुंच चुकी है। प्रदेश सरकार ने अगर हरी झंडी दी तो सिकंदरपुर से सेक्टर 56 तक और जयपुर हाइवे तक चौदह किलोमीटर तक रैपिड मेट्रो का विस्तार हो सकता है। प्रदेश सरकार द्वारा टेंडर जारी होने के साथ ही यह विस्तार की प्रक्रिया भी शुरू हो जाएगी।

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