जागरण संवाददाता, गुरुग्राम : गुड़गांव इंडस्ट्रियल एसोसिएशन (जीआइए) द्वारा एयर क्वालिटी मैनेजमेंट कमीशन के चेयरमैन को पत्र लिख उद्योगों को राहत देने की मांग की है। जीआइए अध्यक्ष जेएन मंगला ने बताया कि वायु प्रदूषण को लेकर कमीशन ने जो प्रतिबंध लगाए हैं उससे उद्योग जगत के लिए बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। जहां तक वायु प्रदूषण की बात है कि औद्योगिक इकाइयां केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से निर्धारित मानकों का पूरी तरह से पालन करती हैं। इसे देखते हुए उद्योगों को राहत दिया जाना चाहिए।

जीआइए के द्वारा चेयरमैन को लिखे गए पत्र में सतत प्रक्रिया से संबंधित औद्योगिक इकाइयों को प्रतिबंध से मुक्त करने की मांग की गई है। औद्योगिक इकाइयों मे कम प्रदूषणकारी ईंधन का उपयोग किया जा रहा है। उद्योगों को सप्ताह में पांच दिन काम करने की अनुमति दी गई है जो औद्योगिक प्रकृति के अनुरूप नहीं है।

औद्योगिक इकाइयों में प्रतिबंधों के कारण काफी आर्थिक नुकसान हो रहा है। कामकाज बंद होने के बाद भी मासिक न्यूनतम बिजली शुल्क, वेतन, ईएसआइसी और पीएफ में योगदान, किराए, लाइसेंस शुल्क और विभिन्न सरकारी विभागों से संबंधित शुल्क अदा करना पड़ रहा है।

जेएन मंगला ने बताया कि सेक्टर-38 पावर हाउस में 21 दिसंबर को चले मरम्मत कार्य के कारण सुबह 10 बजे से दोपहर एक बजे तक बिजली गुल रही। स्मार्ट ग्रिड परियोजना के तहत नियमित बिजली लाइनों को अंडरग्राउंड करने के काम के कारण सेक्टर-35 खटोला गांव के फीडर बंद से बिजली आपूर्ति बाधित हो जाती है। सोहना रोड, राष्ट्रीय राजमार्ग पर एलिवेटेड सड़कों के निर्माण की वजह से भूमिगत पावर लाइनें क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। इससे भी बिजली संकट पैदा हो जाता है। ऐसी हालत में जेनरेटर का संचालन भी नहीं किया सकता। इससे उद्यमियों को भारी नुकसान हो रहा है। पत्र में इस बात की मांग की गई है कि जेनरेटर चलाने की वजह से जिन औद्योगिक इकाइयों में इनके सीलिग का काम हुआ है उसे डी-सील किया जाए।

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