जागरण संवाददाता, गुरुग्राम : साइबर सिटी में अवैध कालोनियों का सर्वे किया जाएगा। इसके लिए नगर एवं योजनाकार विभाग तैयारी कर रहा है। प्रदेश सरकार द्वारा राज्य के 1200 कालोनियों को नियमित किया जाना है। कुछ माह पहले नगर एवं योजनाकार विभाग की ओर से ऐसी अवैध कालोनियों के आवेदन वहां के बाशिदों से मांगे गए थे। विभाग की वेबसाइट पर 75 कालोनियों के आवेदन मिले थे, लेकिन इन कालोनियों में पहले आबादी और उपलब्ध सुविधाओं का सर्वे किया जाना है। नगर एवं योजनाकार विभाग के डीटीपी एन्फोर्समेंट आरएस बाठ ने बताया कि जिन कालोनियों के आनलाइन आवेदन मिले हैं, उनकी मौजूदा स्थिति के बारे में पता लगाया जाएगा। निगम की भी 12 कालोनियों को वैध होने का इंतजार

नगर निगम की ओर से 2019 में शहरी स्थानीय निकाय निदेशालय को 13 अवैध कालोनियों को नियमित या वैध करने का प्रस्ताव भेजा गया था। इन कालोनियों को मुख्यालय से मंजूरी मिलने का इंतजार है। इन अवैध कालोनियों में अशोक विहार फेज-2 एक्सटेंशन, सरस्वती एंकलेव एक्सटेंशन, पावला खुसरूपुर के आसपास का क्षेत्र, सैनीखेड़ा, वजीराबाद क्षेत्र, सिकंदरपुर घोसी, गुरुग्राम गांव, नाथूपुर गांव, बादशाहपुर गांव, प्रकाशपुरी जोन, गंगा विहार और साहिबकुंज शामिल हैं। विकास शुल्क जमा कराने के बाद मिलती हैं सुविधाएं

निगम क्षेत्र में सरकार द्वारा कालोनियों के नियमित करने के बाद वहां के बाशिदों को सड़क, सीवर और पेयजल व स्ट्रीट लाइट जैसी सुविधाएं विकास शुल्क जमा करवाने के बाद मिलती हैं। विकास शुल्क की दर 1992 से 2004 तक 120 रुपये प्रति वर्ग के हिसाब से तय थी। 2013 में 44 अवैध कालोनियों को नियमित किया गया था, जिनके लिए 150 रुपये प्रति वर्ग गर्ज की दर से विकास शुल्क निर्धारित किया गया। 2013 के बाद अब विकास शुल्क कलेक्टर रेट का पांच फीसद लिया जा रहा है। बता दें कि नगर निगम में नियमित की गई कालोनियों के लाखों रुपये का विकास शुल्क बकाया है।

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