अनिल भारद्वाज, गुरुग्राम :

किसी भी अस्पताल का इमरजेंसी वार्ड उस अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता तय करता है। अब जब कोरोना संक्रमण जैसी आपदा है और पूरी दुनिया सहमी है, तो चिकित्सक अपनी ड्यूटी पर उन मरीजों के साथ डटे हैं, जो कोरोना वायरस से ग्रस्त हैं या फिर संदिग्ध हैं। जहां तक गुरुग्राम का सवाल है, तो ये एक ऐसा शहर है, जिसके निवासी दुनिया के अलग-अलग देशों में रहते हैं और इन दिनों वापस लौट रहे हैं। इससे शहर में कोरोना संक्रमण का खतरा बढ़ रहा है। लोगों को इलाज देने और बचाने के लिए जिला स्वास्थ्य विभाग ने कमर कस रखी है।

सेक्टर 10 जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड के इंचार्ज डॉ.योगेंद्र सिंह ने अपनी सेवा भाव से मरीजों से लेकर अधिकारियों तक को प्रभावित किया है। 24 घंटे में 16-17 घंटे अस्पताल में मरीजों के लिए काम करते रहने और व्यवस्था पर नजर रखने को वह अपनी जिम्मेदारी समझते हैं। उनका कहना है कि डॉक्टर के लिए यही समय है, जिसमें ज्यादा काम करने की जरूरत है। कुछ दिन बाद यह खतरा टल जाएगा। उन्होंने कहा जब डिग्री हाथ में ली थी, तो संकल्प लिया था कि अपनी जिदगी दांव पर भी लगी, तो भी दूसरे की जिदगी बचाने के लिए पीेछे नहीं हटेंगे। आज डॉक्टरों को अपना बचाव के साथ मरीज का इलाज देना प्राथमिकता है। डॉ.योगेंद्र कहते हैं कि रात के समय ऐसे लोग पहुंच रहे हैं, जो नार्मल बुखार में भी डरे होते हैं। रात को इमरजेंसी में ऐसे कई मरीज पहुंचते हैं। इनमें कोरोना के लक्षण है, तो उन्हें अगले दिन में प्राथमिकता से बुलाया जाता है। अगर मरीज नहीं आता है, तो उसे फोन किया जाता है। तब तक वे चैन नहीं लेते, जब तक उसके सैंपल नहीं ले लिए जाते। उन्होंने बताया कि उन्होंने खास हिदायत दे रखी है कि संदिग्ध मरीज की अनदेखी नहीं करनी है। हमारी कोशिश रहती है कि उसे तत्काल भर्ती कर लिया जाए। अगर वह नहीं मानता, तो उसे अगले दिन हर हाल में बुलाया जाता है, ताकि उसके सैंपल लिया जा सके।

Posted By: Jagran

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