जागरण संवाददाता, फतेहाबाद : प्रदेश सरकार ने विधानसभा चुनावों से पहले घोषणा की थी कि जो व्यक्ति नगर परिषद या पालिका की दुकानों में लगातार 20 वर्ष से दुकान कर रहा है उन दुकानदारों के नाम दुकान करवा दी जाएगी। इसके बाद फतेहाबाद नगर परिषद के अधीन आने वाली 60 दुकानदारों में करीब 30 दुकानदारों ने सरकार द्वारा शुरू की गई योजना के तहत आवेदन करते हुए नगरपरिषद के कार्यालय में फार्म जमा करवा दिए। जिन दुकानदारों ने आवेदन किए थे वे गत सप्ताह आगामी कार्रवाई के बारे में पता करने नगर परिषद कार्यालय के गए। तो फार्म लेने वाले अधिकारियों ने तो टूक शब्दों में उन्हें कहा कि सभी दुकानदारों ने गलत जगह फार्म जमा करवा दिए। रजिस्ट्री के लिए आवेदन उपायुक्त कार्यालय में जमा करवाने थे।

इससे अब लोगों में रोष है। दुकानदार प्रवीण, राजकुमार व पवन का कहना है कि अधिकारियों की नाकामी की वजह से उनके नाम दुकानें नहीं हो रही। अधिकारी सरकार की योजना का जानबूझकर फायदा आमजन तक नहीं पहुंचे देना चाहते। पहले खुद फार्म रख लिए अब हमारी ही गलती निकाल रहे है। इससे चलते दुकानें उनके नाम नहीं हो रही।

दरअसल, फतेहाबाद नगरपरिषद की शहर में 60 से अधिक दुकानें है। इनमें से अधिकांश दुकानें हंस मार्केट, पालिका बाजार व कपड़ा मार्केट में है। विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने घोषणा की थी कि जो व्यक्ति नगर निकाय की दुकानों में 20 वर्ष से लगातार दुकान कर रहा है। उन लोगों के नाम पर दुकानों की रजिस्ट्री की जाएगी। इसके बाद शहर के 30 लोगों ने आवेदन किया। उन्हें लगा कि अब जो उनके नाम पर दुकानों की मलकियत के नाम पर पट्टा किया हुआ है। सरकार की घोषणा के अनुसार रजिस्ट्री हो जाएगी। इससे उन्हें फायदा मिलेगा। दुकान संचालित करने में ऋण लेने में भी आसानी होगी। लेकिन नगर परिषद के अधिकारियों की लापरवाही की वजह से रजिस्ट्री होने में देरी हो गई।

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मोचियों को आवंटित हुई थीं दुकानें :

शहर का पालिका बाजार अब मोबाइल मार्केट के नाम पर प्रसिद्ध है। शहर के पुराने जानकार बताते हैं कि 40 साल पहले पालिका बाजार की दुकान सरकार ने मोचियों को आवंटित की थी। परंतु अधिकांश मोची थोड़े समय बाद ही दुकान बेचकर चले गए। इसके बाद अब ये दुकानें मोबाइल मार्केट के नाम से फेमस हो गई। इसी तरह कपड़ा मार्केट में अब कपड़े की दुकान कम है। वहां पर कंप्यूटर व अन्य इलेट्रोनिक सामान की दुकानें अधिक हैं।

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सरकारी की घोषणा के अनुसार जो व्यक्ति नगर परिषद की दुकानों में 20 सालों से अपनी दुकानदारी कर रहा है। लगातार किराया भर रहा है। उस व्यक्ति के नाम दुकानें की जाएगी। अब ये दुकानें पट्टे पर दी हुई है। हालांकि कई दुकानदारों ने गलत तरीके से फार्म नगर परिषद कार्यालय में जमा करवा दिए थे। जबकि उन्हें उपायुक्त कार्यालय में फार्म जमा करवाने थे। अब मैंने दुकानदारों से आग्रह किया है कि वे उपायुक्त कार्यालय में आवेदन जमा करवाएं, ताकि उन्हें सरकार की योजना का लाभ मिल सके।

- जितेंद्र कुमार, ईओ, नगर परिषद।

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