संवाद सूत्र, जाखल : हरे पेड़ों को काटने का मामला सामने आया है। पेड़ किसी व्यक्ति ने नहीं, बल्कि सरकारी स्कूल प्रबंधक ने बिना वन विभाग की अनुमति के ही कटवा दिए हैं। शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारियों ने जांच कर कार्रवाई करने की बात कही है ।

जानकारी के अनुसार राजकीय कन्या प्राथमिक विद्यालय के प्रांगण में कई वर्षो पुराने हरे पेड़ों को मंगलवार को स्कूल प्रबंधन ने बिना वन एवं उच्च शिक्षा अधिकारियों के संज्ञान लाए कटवा डाले। इससे क्षेत्र के वन्य प्रेमियों में रोष है। उन्होंने मांग कि है स्कूल से संबंधित इंचार्ज पर कार्रवाई करते हुए उसे बर्खास्त किया जाए। क्या है पेड़ काटने के लिए नियम और कानून :

बिना वन विभाग की अनुमति के पेड़ का ऊपरी हिस्सा काटने पर 10 हजार रुपये का जुर्माना है और जड़ से पेड़ काटने पर 30 हजार रुपये का जुर्माना है। अधिवक्ता जेके सैनी के अनुसार भारतीय वन कानून 1927 के मुताबिक किसी भी सरकारी जमीन या क्षेत्र से पेड़ काटना मना है किसी व्यक्ति द्वारा ऐसा करने पर उसके खिलाफ जुर्माने और जेल दोनों का प्रावधान है। क्या कहते है अधिकारी :

मेरे संज्ञान में हरे पेड़ काटने का मामला आया है। स्कूल मुख्याध्यापिका कृष्णा रानी को कटे पेड़ को स्कूल प्रांगण में जस के तस पड़े रहने देने के मैंने मौखिक आदेश दिए गए है ताकि मौके पर जाकर जांच की जा सके। हरे पेड़ कटवाना गलत है अगर स्कूल प्रबंधन दोषी पाया गया तो इनके खिलाफ विभागीय कार्यवाही जरूर की जाएगी।

- देवेंद्र सिंह, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी।

Posted By: Jagran

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