राजेश भादू, फतेहाबाद। पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव लोकतंत्र की मजबूती के लिए शुरू किए गए थे। लेकिन अब इसके मायने बदलने लग गए है। अब गांव के सरपंच का चुनाव लड़ने का मतलब है कि 15 से 20 लाख रुपये का खर्च सामान्य की बात हो गई हैं। ये रुपये उस गांव में भी खर्च करने पड़ते है, जिस गांव में मूलभूत सुविधाओं के नाम पर कुछ भी नहीं है, लेकिन चुनाव लड़ना है तो उम्मीदवारों को रुपये खर्च करने ही पड़ते है। इस बार पंचायती राज चुनावों में भी ऐसा ही हो रहा है। बड़े गांवों में तो हालत इससे भी खराब है। जिन गांवों में सरपंच के पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। उन गांवों में भी रुपये वाले लोगों के साथ ग्रामीण लगे हुए है।

नियमानुसार सरपंच प्रत्याशी पंचायत समिति के उम्मीदवार से भी रुपये कम कर सकता है। पंचायत समिति का प्रत्याशी जहां 3 लाख 60 हजार रुपये खर्च कर सकते हैं, वहीं सरपंच पद पर चुनाव लड़ने वाले के लिए 2 लाख रुपये ही तय किए गए है। जिले के प्रभावशाली गांवों में सरपंच के पद पर चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों ने इससे अधिक रुपये तो गांवों में पोस्टर लगाकर खर्च कर दिए। पिछले 15 से 20 दिनों से गांव में सभी को भोजन के साथ मिठाइयां भी खूब चलाई जा रही है। हद तो यह है कि निगरानी के लिए पूरी अधिकारियों की टीम लगी हुई है। लेकिन जिले में किसी भी अधिकारियों को नियम तोड़ते कहीं भी प्रत्याशी नजर नहीं आए। हद तो यह है कि पंचायती चुनावों में अभी तक 20 लाख अतिरिक्त खराब की बोतलें बिकी है। इसके लिए शराब के ठेकेदारों ने कोटा भी बढ़वाया है।

चाय से लेकर समौसे तक रेट निर्धारित

पंचायती राज संस्थाओं में भी चुनाव लड़ने के लिए अधिकतम सीमा तय है। उम्मीदवार किस पद के लिए कितने रुपये खर्च कर सकता है। वहीं रुपये खर्च करने का हिसाब-किताब भी रखना होता है। चाय से लेकर समौसे तक का रेट निर्धारित है। उसके अनुसार खर्च जोड़ना होता है। अब सर्दी के मौसम में गांवों में गर्म दूध के साथ जलेबी व लड्डू खूब चल रहे है। जिनका किसी को नोटिस जारी तक नहीं किया गया। नियमानुसार अधिक रुपये खर्च करने वाले उम्मीदवार का नामांकन रद करना चाहिए, लेकिन अधिकारियों ने किसी को नोटिस तक जारी नहीं किया गया।

एक महीने के अंदर सौंपना होता है ब्यौरा

उम्मीदवार ने कितने रुपये खर्च किए है। इसकी जानकारी चुनाव लड़ने वाले सभी प्रत्याशियों को चुनाव संपन्न होने के उपरांत एक महीने तक जानकारी देनी होती है। जिसमें उम्मीदवार अपने मनमुताबिक जानकारी देते है। इसकी वजह है कि प्रशासन के पास अलग से रिकार्ड नहीं होता। ऐसे में कार्रवाई से बच जाते है।

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चुनाव खर्च की सीमा

- पंच : 50 हजार

- सरपंच :2 लाख

- पंचायत समिति सदस्य : 3.60 लाख

- जिला परिषद सदस्य : 6 लाख

-----पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव चल रहे है। उम्मीदवार चुनाव संपन्न होने के 1 महीने तक चुनाव खर्च की रिपोर्ट जमा करवा सकता है। उसके बाद किसी उम्मीदवार की रिपोर्ट में ज्यादा रुपये खर्च हुए मिलते है तो राज्य चुनाव आयोग जांच करते हुए कार्रवाई करता है।

- नरेंद्र सिंह कौशिक, एक्सपेंडिचर अधिकारी, फतेहाबाद।

Edited By: Manoj Kumar

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