जागरण संवाददाता, फतेहाबाद :

इस समय में वातावरण में नमी आई हुई है। ऐसे में सरसों की फसल में सफेद रतुआ रोग दस्तक दे सकता है। जिससे पूरी फसल प्रभावित हो सकती है। हालांकि अभी तक जिले में ऐसी कोई बात नहीं है। अगर बरसात हो गई तो यह रोग भी नहीं आएगा। इसके लिए किसानों को अपनी सरसों की फसलों की निगरानी करनी पड़ेगी।

सफेद रतुआ के अलावा इस मौसम में सरसों की फसल में चेपा तथा पेटेंड बग कीट की निरंतर निगरानी करनी चाहिए। सब्जी की खेती करने वाले ऐसे किसान जिन्होंने टमाटर, फूलगोभी, बंदगोभी की पौधशाला लगाई है, यदि वह तैयार है तो अब रोपाई में विलंब न करें। ध्यान रहे कि यह रोपाई उथली क्यारियों में ही करें। गोभी वर्गीय सब्जियों में पत्ती खाने वाले कीटों की निरंतर निगरानी करें। यदि कीटों का प्रकोप अधिक नजर आए तो बीटी दवा की एक ग्राम मात्रा को एक लीटर पानी घोल का फसल पर मौसम साफ रहने की दशा में ही छिड़काव करें।

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सब्जियों की फसल में करें निराई गुड़ाई :

यह समय सब्जियों की निराई-गुड़ाई का है। खरपतवारों को नष्ट कर उर्वरकों का बुरकाव करना चाहिए। इस मौसम में मिलीबग कीट के बच्चे जमीन से निकलकर आम के तनों में चढ़ते हैं। इन्हें रोकने के लिए जमीन से आधा मीटर की ऊंचाई पर आम के तने के चारों ओर 25 से 30 सेंटीमीटर चौड़ी अल्काथीन की पट्टी लपेट दें। तने के आसपास की मिट्टी की खुदाई करें। ऐसा करने से उनके अंडे नष्ट हो जाएंगे।

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ये करें छिड़काव

अगर सरसों की फसल में सफेद रतुआ का प्रकोप नजर आए तो डाईथेन एम- 45 दवा का छिड़काव करें। दो ग्राम दवा को एक लीटर पानी में मिलाकर घोल बनाएं और छिड़काव करें। वैज्ञानिकों का कहना है कि दवा का छिड़काव तभी करें जब मौसम साफ हो।

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किसान फसलों की लगातार निगरानी करें। जरूरत के अनुसार ही कीटनाशकों का प्रयोग करें। ऐसे मौसम में सरसों में तेला की अधिक शिकायत होने की संभावना है। किसान कृषि विशेषज्ञों से परार्मश लेते हुए दवा का छिड़काव करें।

- डा. रोबिन रोबर्ट, सहायक कृषि अधिकारी खाराखेड़ी।।

Posted By: Jagran

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