फतेहाबाद [प्रदीप जांगड़ा]। पत्नी व चार साल के बेटे की हत्या की खबर अभी भी सोशल मीडिया में घूम रही है। वायरल तस्वीरों को देखकर रूह कांप जाती है। हरिपुरा की यह घटना जितनी डरावनी है, उतनी चिंता का विषय भी है। यह दांपत्य जीवन की उस हकीकत को बयां करती है जिसमें खुशियां कम और तनाव ज्यादा है। अदालतों में विचाराधीन केस और पुलिस थानों में आने वाली शिकायतें बताती हैं कि सामाजिक हालात ठीकठाक नहीं हैं। कोई अपनी पत्नी से दुखी है तो कोई बेटों से। और कोई अपने पति से।

दपंती की उम्मीदें पूरी नहीं होती तो कलह जन्म ले लेता है। फिर एक-दूसरे से छुटकारा पाने और सबक सिखाने का सिलसिला शुरू होता है। यही संघर्ष जान तक ले लेता है। बीते जुलाई महीने में ही ऐसी तीन बड़ी वारदातें हो चुकी, जिनमें जीवनसंगी ही जान के दुश्मन साबित हुए।

फौजी ने ससुराल में की सास व चचेरी सास की हत्या

अप्रैल 2018 ही यह वारदात भी भयानक थी। हिसार के सेक्टर-16/17 निवासी फौजी देवेंद्र सिंह ने गांव गोरखुपर में आकर अपनी सास व चचेरी सास पर गोली चलाई थी। उसकी गोरखपुर निवासी मेवा सिंह की बेटी सुनीता से शादी हुई थी। किसी बात को लेकर पति-पत्नी के बीच अनबन हो गई जिसके चलते सुनीता मायके आ गई। देवेंद्र गोरखपुर गांव में अपनी ससुराल पहुंचा। यहां झगड़ा हुआ और फौजी ने अपनी सास मनपति व उसकी देवरानी केला देवी को गोली मारी। वह पत्नी को भी मारना चाहता था, लेकिन वह छिप गई थी, जिसके चलते उसकी जान बच गई।

एक महीने में तीन वारदात

  • 3 जुलाई 2018 : कन्हड़ी गांव में सोमवार की रात को एक पति ने अपने बेटों के सामने पत्नी की तेजधार हथियार से हत्या कर दी। मृतका के परिजनों ने आरोप लगाया है कि आरोपित नशे का आदी था और पत्नी से मारपीट करता था। वारदात के बाद से फरार हो गया।

  • 16 जुलाई 2018 : गांव हासंगा में एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी की हत्या कर दी। मामले के अनुसार पति अपनी पत्नी से शराब के लिए रुपये मांगता था। उसने मना किया तो रात को उस पर कस्सी से वार कर हत्या कर दी।

  • 28 जुलाई 2018: गांव हरिपुरा के श्रवण ने पत्नी व बेटे की हत्या कर दी। कथित तौर पर उसे अपनी पत्नी के चरित्र पर शक था कि किसी से अफेयर चल रहा है। रात को योजना बनाई और सुबह पांच बजे बेटे व पत्नी की ग्रेंडर से गला काट कर हत्या कर दी।

कलह की प्रमुख वजहें

  • पति नशे का आदी होना।
  • घर में आर्थिक तंगी।
  • पति या पत्नी के अवैध संबंध।
  • रिश्तेदारों का नाजायज हस्तक्षेप।
  • एक दूसरे को दबाकर रखने का प्रयास।

अदालतें घर बसाने के पक्ष में: एडवोकेट

एडवोकेट सुमनलता सिवाच कहती हैं कि पति पत्नी के मामलों में अदालतें काफी संवेदनशील हैं। कई बार लोगों को लगता है कि तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन अदालतों की कोशिश घर बसाने की रहती है। इसके लिए मेडिएशन सेंटरों की व्यवस्था है। वहां राजीनामे के प्रयास होते हैं। आपस में बातचीत के जरिये विवाद सुलझाने का पूरा मौका दिया जाता है। इसलिए कई बार प्रक्रिया लंबी भी हो जाती है।

मन में बोझ हो तो मित्रों से चर्चा करें

मनोचिकित्सक डॉ. गिरीश का कहना है कि क्रोध व तनाव की एक समय सीमा होती है। कुछ समय बाद उसका स्तर कम हो जाता है। फिर हम क्रोध में जो कर बैठते हैं, उस पर पश्चाताप होता है। इस समस्या से छुटकारा संभव है। एक दूसरे के प्रति सकारात्मक भाव होना चाहिए। रिश्ते तभी बिगड़ते हैं, जब हम सामने वाले में सिर्फ कमियां खोजते हैं। ध्यान विधि से तनाव व क्रोध को खत्म किया जा सकता है। मन में किसी बात का बोझ है तो मित्रों से चर्चा करें। इससे मन हल्का हो जाता है।

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Posted By: Kamlesh Bhatt

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