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फतेहाबाद: बंदरों के खौफ से स्कूलों में पढ़ाई छोड़ पहरेदारी कर रहे शिक्षक, कमरों में बंद कर बच्चों को खिला रहे खाना

Published: Tue, 27 Oct 2026 04:25 PM (IST)

फतेहाबाद के सरकारी स्कूलों में बंदरों का आतंक इतना बढ़ गया है कि शिक्षकों को बच्चों और मिड-डे मील की रखवाली करनी पड़ रही है।

फतेहाबाद के स्कूलों में बंदरों का खौफ, शिक्षक पढ़ाई छोड़ बच्चों की सुरक्षा में जुटे, मिड-डे मील भी खतरे में।

फतेहाबाद के स्कूलों में बंदरों का खौफ, शिक्षक पढ़ाई छोड़ बच्चों की सुरक्षा में जुटे, मिड-डे मील भी खतरे में।

HighLights

  1. सरकारी स्कूलों में बंदरों के आतंक से शिक्षक परेशान।

  2. बच्चों को कमरों में बंद कर खिलाया जा रहा खाना।

  3. बंदरों के हमले से कई शिक्षक हुए घायल, समाधान नहीं।

जागरण संवाददाता, फतेहाबाद। सरकारी प्राथमिक स्कूलों में बंदरों का आतंक इस कदर बढ़ गया है कि शिक्षकों को पढ़ाने के साथ बच्चों और मिड-डे मील की रखवाली करनी पड़ रही है। सुंदर नगर स्थित राजकीय प्राथमिक स्कूल ठाकर बस्ती में रोजाना आठ से दस बंदरों का झुंड पहुंचता है।

भोजन बनाते समय शिक्षिकाओं को निगरानी करनी पड़ती है, जबकि बच्चों को कमरों की कुंडी लगाकर खाना खिलाया जाता है। पिछले दो दिनों में बंदरों के हमले से तीन शिक्षक घायल हो चुके हैं। जगजीवनपुरा के राजकीय प्राथमिक विद्यालय और पास के पब्लिक पार्क में भी करीब दो महीने से बंदरों ने परेशानी बढ़ा रखी है।

ठाकर बस्ती में सुबह साढ़े सात बजे से परेशानी

शिक्षिका सुनीता के अनुसार सुबह करीब साढ़े सात बजे से बंदर स्कूल पहुंचने लगते हैं। बाल वाटिका से पांचवीं कक्षा तक के बच्चों की सुरक्षा के लिए स्टाफ सतर्क रहता है। सबसे ज्यादा परेशानी मिड-डे मील बनाते और परोसते समय होती है।

बंदर रसोई में घुसकर भोजन और राशन को नुकसान न पहुंचाएं, इसके लिए शिक्षिकाएं भीतर रहकर निगरानी करती हैं। बच्चों को हमलों से बचाने के लिए कमरे बंद करके खाना खिलाया जाता है। पढ़ाई के दौरान भी शिक्षकों का ध्यान बंदरों पर रहता है। स्टाफ का कहना है कि तीन शिक्षकों पर हमलों के बाद डर और बढ़ गया है। छोटे बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए जल्द समाधान जरूरी है।

जगजीवनपुरा में लाठी लेकर बंदर भगाते हैं शिक्षक

जगजीवनपुरा स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक सुनीता रानी, मुकेश, अंजली, ममता और राजेश कुमार ने बताया कि स्कूल खुलने से पहले ही बंदरों का झुंड पहुंच जाता है। बच्चों की सुरक्षा के लिए उन्हें लाठी लेकर बंदरों को भगाना पड़ता है, लेकिन बंदर उलटे उनकी ओर दौड़ते हैं।

मिड-डे मील बनाते और परोसते समय भी परेशानी बनी रहती है। कई बार बंदर भोजन बनाने वाले कर्मचारियों पर झपट पड़ते हैं। स्कूल के साथ लगते पार्क में भी लोग परेशान हैं। पार्षद मोहनलाल नारंग के अनुसार पिछले दिनों पार्क में सुबह व्यायाम कर रही जगजीवनपुरा निवासी कंचन शर्मा को बंदरों ने काट लिया था। पिछले शनिवार स्कूल की छात्रा प्रतिमा को भी बंदर ने काट लिया।

पार्षद सुबह स्कूल पहुंचकर करते हैं निगरानी

पार्षद मोहनलाल नारंग ने बताया कि बच्चों की सुरक्षा के लिए वह खुद सुबह स्कूल पहुंचकर बंदरों पर नजर रखते हैं। शिक्षकों को पढ़ाई से ज्यादा मिड-डे मील के राशन की रखवाली करनी पड़ रही है। वह डीएमसी से मिलकर बंदरों को पकड़वाने की मांग करेंगे। नगर परिषद के अधिकारियों को कई बार समस्या बताई जा चुकी है।

15 अक्टूबर की वार्ड कमेटी बैठक में भी शिक्षकों और वार्डवासियों ने मुद्दा उठाया था, लेकिन समाधान नहीं हुआ। पार्षद मनोज भयाना, एसडीओ राज कुमार मेहता, संदीप और तरुण बजाज सहित स्थानीय लोगों ने नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई है।

ठेका समाप्त, नई एजेंसी नियुक्त होने का इंतजार

स्कूल स्टाफ ने नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी के नाम पत्र लिखकर बंदरों से निजात दिलाने की गुहार लगाई है। पार्षद मोहनलाल नारंग के मुताबिक बार-बार शिकायत पर दो दिन में बंदर पकड़ने वालों के आने का आश्वासन मिलता रहा, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।

नगर परिषद के कर्मचारी से संपर्क करने पर उन्हें पता चला कि बंदर पकड़ने का पुराना ठेका समाप्त हो गया है। नगर परिषद के एसआई महेश ने बताया कि नई एजेंसी नियुक्त करने की प्रक्रिया चल रही है। फिलहाल बंदरों को पकड़ने के लिए कोई एजेंसी उपलब्ध नहीं है।