विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

फतेहाबाद में परमल धान खरीद पर संकट, राइस मिलर्स के पंजीकरण में देरी से बढ़ी किसानों की चिंता

Published: Sat, 19 Sep 2026 04:18 PM (IST)

फतेहाबाद में बासमती धान के ऊंचे भाव से किसान खुश हैं, लेकिन परमल धान की सरकारी खरीद को लेकर चिंता बनी हुई है।

फतेहाबाद में परमल धान खरीद पर संकट (जागरण फोटो)

फतेहाबाद में परमल धान खरीद पर संकट (जागरण फोटो)

HighLights

  1. बासमती धान के भाव में जोरदार तेजी, किसान खुश।

  2. परमल धान की सरकारी खरीद पर संकट के बादल।

  3. राइस मिलर्स के कम पंजीकरण से खरीद में बाधा।

जागरण संवाददाता, फतेहाबाद। बासमती धान के भाव में इस बार आई जोरदार तेजी ने किसानों के चेहरे खिला दिए हैं, लेकिन परमल धान की सरकारी खरीद को लेकर तस्वीर फिलहाल साफ नहीं है।

जिले में इस बार करीब चार लाख एकड़ में धान की खेती हुई है, जिसमें करीब तीन लाख एकड़ क्षेत्र परमल धान के अधीन है। ऐसे में परमल की खरीद व्यवस्था में थोड़ी सी भी अड़चन हजारों किसानों की परेशानी बढ़ा सकती है। सरकार की ओर से 25 सितंबर से परमल धान की खरीद शुरू करने की बात कही गई है, लेकिन राइस मिलर्स के पंजीकरण को लेकर स्थिति चिंता बढ़ाने वाली बनी हुई है।

पिछले तीन-चार वर्षों से बासमती धान के भाव अपेक्षाकृत कमजोर रहने के कारण इस बार किसानों ने बासमती का रकबा कम किया था। अब सीजन की शुरुआत से पहले ही बासमती के भाव में तेजी ने किसानों को चौंका दिया है।

पिछले वर्ष बासमती 1509 किस्म करीब 2700 से 2800 रुपये प्रति क्विंटल तक बिकी थी, जबकि इस बार शुरुआत में ही इसका भाव 4000 से 4200 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है। वहीं बासमती 1121 सहित अन्य किस्मों के भाव भी करीब छह हजार रुपये प्रति क्विंटल तक बताए जा रहे हैं।

परमल का एमएसपी 2461 रुपये, पिछले साल से 72 रुपये अधिक

परमल धान का इस बार न्यूनतम समर्थन मूल्य 2461 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 72 रुपये अधिक है।

एमएसपी बढ़ने से किसानों को कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन उनकी असली चिंता सरकारी खरीद की व्यवस्था को लेकर है। करीब तीन लाख एकड़ में परमल की फसल होने के कारण मंडियों में बड़े पैमाने पर धान पहुंचने की संभावना है।

यदि खरीद एजेंसियों और राइस मिलर्स के बीच तालमेल नहीं बना तो इसका असर मंडियों में धान की खरीद और उठान पर पड़ सकता है।

राइस मिलर्स और एफसीआई के बीच तनातनी से अटकी प्रक्रिया

पमल की खरीद को लेकर सबसे बड़ी परेशानी राइस मिलर्स और एफसीआई के बीच चल रही तनातनी को बताया जा रहा है। राइस मिलर्स का कहना है कि पिछले खरीफ सीजन में एफसीआई की ओर से उनके द्वारा तैयार किए गए चावल का समय पर उठान नहीं किया गया। अब चावल का उठान शुरू हुआ है, लेकिन आगामी खरीफ सीजन के लिए राइस मिलर्स पंजीकरण कराने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं।

अब तक 261 में से 20 ने करवाया पंजीकरण 

जिले में करीब 261 राइस मिलर्स हैं, लेकिन अभी तक केवल 20 ने ही पंजीकरण करवाया है। राइस मिलर्स एसोसिएशन के विरोध के चलते बड़ी संख्या में मिलर्स ने अभी तक पंजीकरण के लिए आवेदन तक नहीं किया है।

ऐसे में 25 सितंबर से परमल की सरकारी खरीद शुरू होने की स्थिति में पर्याप्त संख्या में मिलर्स का पंजीकरण नहीं हुआ तो धान के उठान और मिलिंग व्यवस्था को लेकर परेशानी खड़ी हो सकती है।

ऑनलाइन पंजीकरण के बाद मौके पर होगा सत्यापन

इस बार सरकार ने राइस मिलर्स के पंजीकरण और सत्यापन की प्रक्रिया आनलाइन की है। राइस मिलर्स को पहले आनलाइन पंजीकरण करवाना होगा। इसके बाद हैफेड, हरियाणा भंडारण निगम और खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के इंस्पेक्टर मौके पर जाकर राइस मिल का आनलाइन सत्यापन करेंगे। खरीद शुरू होने से पहले पंजीकरण और सत्यापन की प्रक्रिया पूरी करना विभाग के लिए भी चुनौती होगी।