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हरियाणा में 5000 गर्भवती महिलाओं की जांच, 1500 में खून की कमी, एक क्लिक में खुलेगी सेहत की कुंडली

Published: Wed, 14 Oct 2026 03:32 PM (IST)

फतेहाबाद में 5000 गर्भवती महिलाओं की जांच में से 1500 में रक्त की कमी पाई गई है।

पांच हजार महिलाओं की खून की जांच हुई (प्रतीकात्मक फोटो)

पांच हजार महिलाओं की खून की जांच हुई (प्रतीकात्मक फोटो)

HighLights

  1. फतेहाबाद में 1500 गर्भवती महिलाओं में रक्त की कमी पाई गई।

  2. स्वास्थ्य विभाग अब जांच और उपचार का रिकॉर्ड ऑनलाइन करेगा।

  3. गर्भवती महिलाओं की डिजिटल निगरानी से बेहतर स्वास्थ्य प्रबंधन होगा।

विनोद कुमार, फतेहाबाद। जिले में पांच हजार गर्भवती महिलाओं की जांच में 1500 में रक्त की कमी मिली है। यानी जांच कराने वाली हर तीन में से लगभग एक महिला में खून की कमी पाई गई।

स्वास्थ्य विभाग अब जांच, उपचार और निगरानी से जुड़ा रिकॉर्ड ऑनलाइन करने की तैयारी कर रहा है। इससे अधिकारियों को एक क्लिक पर महिला की जांच की स्थिति और आगे की जरूरतों की जानकारी मिल सकेगी।

चंडीगढ़ की टीम ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सरकारी अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं की जांच का पूरा विवरण डिजिटल प्लेटफार्म पर दर्ज किया जाए। इसमें जांच की संख्या, रिपोर्ट में मिली कमी और दोबारा जांच की जरूरत जैसी जानकारी शामिल होगी। अस्पतालों में प्रतिदिन हुई रक्त जांच और रक्त की उपलब्धता का डाटा भी ऑनलाइन रखा जाएगा।

27 शिविरों में पांच हजार महिलाओं की जांच

जिले के सरकारी अस्पतालों में जनवरी से सितंबर तक 27 स्वास्थ्य जांच शिविर लगाए गए। इनमें करीब पांच हजार गर्भवती महिलाओं की जांच हुई और लगभग 1500 में रक्त की कमी सामने आई।

गर्भावस्था में खून की कमी प्रसव के दौरान मां और बच्चे के लिए जोखिम बढ़ा सकती है। इसलिए जांच के बाद नियमित निगरानी और जरूरी उपचार भी अहम है।

फिलहाल रक्त की कमी वाली महिलाओं की निगरानी आशा वर्करों और संबंधित नर्सों के माध्यम से की जा रही है। ऑनलाइन रिकॉर्ड से यह जानना आसान होगा कि किस महिला की जांच हुई, रिपोर्ट में क्या कमी मिली और उसका फालोअप किस स्तर पर है। शिविरों में जांच कराने वाली महिलाओं का डाटा भी दर्ज किया जाएगा। इससे अधिकारियों को यह देखने में मदद मिलेगी कि किन महिलाओं को आगे जांच या देखभाल की जरूरत है।

अस्पतालों के रक्त संबंधी आंकड़े भी होंगे दर्ज

डिजिटल निगरानी गर्भवती महिलाओं की जांच तक सीमित नहीं रहेगी। अस्पतालों में प्रतिदिन कितने मरीजों के रक्त की जांच हुई और रक्त कितना उपलब्ध है, इसकी जानकारी भी ऑनलाइन दर्ज करनी होगी। इससे जांच और उपलब्ध संसाधनों का विवरण एक जगह मिलेगा तथा बार-बार रिपोर्ट मंगाने की जरूरत घटेगी।

अधिकारियों को यह भी पता चल सकेगा कि रिकॉर्ड नियमित रूप से अपडेट हो रहा है या नहीं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जिले में घर पर होने वाली डिलीवरी अब शून्य हो गई है। अस्पताल में प्रसव से चिकित्सकीय सहायता मिल सकती है, लेकिन गर्भावस्था के दौरान जोखिम की पहचान और समय पर उपचार भी जरूरी है।

गर्भावस्था में रक्त की कमी के कारण

शरीर में आयरन की कमी, संतुलित आहार न मिलना और गर्भावस्था में रक्त की जरूरत बढ़ना एनीमिया के प्रमुख कारण हैं। फोलिक एसिड, विटामिन बी-12 की कमी, बार-बार गर्भधारण, नियमित हीमोग्लोबिन जांच न होना, कृमि संक्रमण, लंबे समय तक रक्तस्राव और कुछ बीमारियां भी इसकी वजह बन सकती हैं।

बचाव के लिए चिकित्सकीय सलाह से आयरन और फोलिक एसिड की गोलियां लेना, संतुलित आहार और नियमित जांच जरूरी है। रक्त की कमी मिलने पर समय से उपचार कराना चाहिए।

अब पूरा डाटा ऑनलाइन होगा। गर्भवती महिलाओं पर सबसे अधिक ध्यान दिया जाएगा। घर पर डिलीवरी नहीं हो रही है। शिविर में कितनी महिलाएं आईं, इसका पूरा डाटा रखा जाएगा। वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से उच्चाधिकारियों के निर्देश भी मिले हैं। -डॉ. बुधराम, सिविल सर्जन।