फतेहाबाद, [मणिकांत मयंक]। हरियाणा में अब खेती स्‍मार्ट हो रही है। किसान कृ‍षि में इंटरनेट व सोशल मीडिया का बेहतर इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके जरिये वे उन्‍नत कृषि नहीं कर रहे हैं, बल्कि अपनी उपज के लिए बाजार भी तलाश रहे हैं। किसानों को यह राह दिखाई है फतेहाबाद जिले के एक युवा किसान ने। इस तरीके से बेहतर उपज मिलने के संग फसल बेचने के लिए बिचौलियों के झंझट से भी किसानों को मुक्ति मिली है। 

यह प्रगतिश्‍ाील किसान है जिले के जाखल खंड के चुहुड़पुर ग्राम के हरविंदर सिंह लाली से। हरविंदर ने जब परंपरागत खेती में हाथ आजमाया तो उन्हें सफलता हाथ नहीं लगी। इसके बाद उन्‍होंने सूचना क्रांति का इस्‍तेमाल कर स्‍मार्ट खेती को अपनाया।

उन्‍होंने सफलता के लिए खेती के आधुनिक तौर-तरीकों की तलाश में इंटरनेट का सहारा लिया। उन्‍होंने सोशल मी‍डिया के जरिये बुवाई से लेकर खाद तैयार करने तक की तमाम उपयोगी जानकारियों का अध्ययन किया। हरविंदर का कहना है कि यूट्यूब पर इन तौर-तरीकों के क्रियान्वयन से संबंधित वीडियो देखे और स्‍मार्ट खेती के तरीके सीखा। सफल किसानों के तजुर्बे से संबंधित वीडियो भी यूट्यूब पर देखे ताकि कोई गलती न हो।

हरविंदर का कहना है कि उन्हें समझ में आ गया कि यह दौर जैविक कृषि का है। वह इसमें दिलोजान से जुट गए। महज डेढ़ एकड़ से शुरू की गई खेती में गुणात्मक इजाफा हुआ। रकबा बढ़ा तो उपज ने भी छलांग लगाई। उन्‍हाेंने कीटनाशक तक बनाना सीखा

जैविक कीटनाशक

वह बताते हैं कि जैविक कीटनाशक खुद तैयार करते हैं। प्लास्टिक के ड्रम में 20 लीटर लस्सी या छाछ तथा दो किलोग्राम नीम के पत्ते तांबे के बर्तन में रख देते हैं। उसमें आधा किलो लहसुन डाल देते हैं। कुछ दिनों बाद जैविक कीटनाशक तैयार हो जाता है।

हरविंदर ने बताया कि इस कीटनाशक फसल में फंगस, कीट, सूंडी आदि की बीमारी नहीं लगती। सहायक कृषि अभियंता जसविंदर चौहान कहते हैं, हरविंदर यूट्यूब के साथ-साथ फेसबुक आदि सोशल मीडिया का बेहतर उपयोग कर रहा है। प्रगतिशील किसानों को भी इससे सीख लेनी चाहिए।

दोगुनी हुई पैदावार

अब प्रति एकड़ पैदावार लगभग दोगुना हो गई। धान और गेंहू की जैविक पद्धति से प्राप्त उपज के लिए उन्होंने बाजार भी वाट्सएप-फेसबुक के जरिये हासिल किया। वो भी एडवांस में। वाट्सएप, फेसबुक आदि पर अपनी आने वाली जैविक फसल की जानकारी शेयर की और चंद मिनटों में ही फसल बुक हो गई। हरविंदर ने बताया‍ कि 50 क्विंटल गेहूं की बिक्री की बुकिंग महज 20 मिनट में हो गई।

जीवामृत से जीवंत हो रही जमीन

हरविंदर कहते हैं, जीवामृत बनाने के लिए हम 20 लीटर गोमूत्र में 20 किलोग्राम गाय का गोबर मिलाते हैं। फिर इसमें एक किलो बेसन, एक किलो गुड़ मिलाते हैं। इसके साथ पीपल या बरगद के नीचे की एक किलो मिट्टी का मिश्रण बनाते हैं। इसके बाद महज 20 से 25 दिनों में जीवामृत तैयार हो जाता है। इस जीवामृत से जमीन जीवंत हो जाती है। यूरिया आदि की पूर्ति इसी से हो जाती है।

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