जागरण संवाददाता, फतेहाबाद :

चुनावों से पहले जिला चुनाव अधिकारी ने घोषणा की थी कि इस बार दिव्यांगों को मतदान के लिए बूथ तक ले जाने की स्पेशल सुविधा देने का प्रावधान किया जाएगा। शहर में तो कुछ सुविधा दिखी। लेकिन गांव में दिव्यांगों का हाथ बटाने के लिए कोई नजर तक नहीं आया। ऐसे में प्रशासन ने जो अभियान चलाया था वो फेल नजर आया। पहले उन्होंने घर-घर जाकर दिव्यांगाों का डाटा इकट्ठा किया था। जिले में करीब 1279 दिव्यांग मिले जिसका वोट बना हुआ। प्रशासन ने दावा किया था कि इन दिव्यांगों को मतदान केंद्र तक लाने के लिए स्पेशल वाहन लगाया जाएगा। शहर में वाहन नजर आया लेकिन गांव में कुछ नहीं था। दिव्यांग सड़कों पर बैठकर आते हुए दिखाई दिया। इन दिव्यांगों को पुलिस कर्मचारी व पोलिग पार्टियों के सदस्य देखते रहे लेकिन सहायता किसी ने नहीं की।

गांव बीघड़ से दिव्यांग हरीश ने बताया कि मतदान करने उसे घर से खुद जाना पड़ा। उसके पास तो ट्राई साइकिल भी नहीं है। ऐसे में उसे परेशानी आई। हरीश कुमार ने बताया कि उसने वोट 12 बजे के करीब डाला। गर्मी अधिक होने के कारण सड़क भी गर्म हो गई। इस कारण उन्हें चलना भी मुश्किल हो गया था। लेकिन किसी ने भी सहायता नहीं की। वहीं गांव धांगड़ के दिव्यांग मुकेश कुमार अपनी ट्राइसाइकिल लेकर पहुंचे। मुकेश कुमार को भी घर से कोई लेने नहीं गया। वे खुद अपनी ट्राइसाइकिल लेकर अपने बूथ पर पहुंचे। वहीं शहर की अंजू देवी भी अपनी ट्राइसाइकिल से मतदान केंद्र तक पहुंची। पहले प्रशासन ने दावा किया था कि इन दिव्यांगों को बूथ पर लेकर जाएगा और छोड़कर भी आएंगे। शहर के जनस्वास्थ्य बूथ पर वोट डालने आए दीपक ने बताया कि वह घर से अपने ट्राई साइकिल पर आया है। इसी तरह बड़ोपल के राजेंद्र ने बताया कि दिव्यांगों के लिए बूथ पर किसी प्रकार की व्यवस्था नहीं थी। कम से कम बूथ पर तो उचित व्यवस्था की जाने चाहिए थी लेकिन ऐसा नहीं हो पाया।

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Posted By: Jagran

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