जागरण संवाददाता, फतेहाबाद :

नगरपरिषद प्रधान की मनमानी कहे या फिर जिद। इसका खामियाजा तो शहरवासियों को उठाना पड़ रहा है। अब इसका उदाहरण सबके सामने है। एनजीटी के आदेश पर नगरपरिषद के कार्यकारी अधिकारी ने शहर में से बेसहारा पशुओं को पकड़ने के लिए टेंडर लगा दिया। बुधवार को टेंडर भी खोल दिया। जब प्रधान के हस्ताक्षर लेने की बारी आई तो वो भड़क गए और कहा कि किससे पूछकर यह टेंडर लगाया था। अधिकारियों का एक ही जवाब था कि एनजीटी के आदेश थे कि शहर में बेसहारा पशु ना दिखे। यही कारण था कि टेंडर खोला गया था। लेकिन प्रधान ने नाक का सवाल मानते हुए इस टेंडर को रद कर दिया। जब अधिकारियों को हस्ताक्षर ही नहीं मिले तो टेंडर अपने आप ही रद हो गया। अब यह मामला डीसी दरबार में भी उठेगा, क्योंकि अधिकारियों अब पत्र भेजेंगे कि प्रधान नहीं चाह रहे है कि शहर में बेसहारा पशुओं को पकड़े जाये

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तीन बार लगा टेंडर, प्रधान को भी पता था

पिछले साल दिसंबर में एनजीटी के अधिकारियों ने शहर का निरीक्षण किया था। अधिकारियों ने देखा था कि शहर में बेसहारा पशु घूम रहे है। उसी दिन एडीसी को आदेश दिए थे कि जल्द ही एजेंसी को टेंडर देखकर इन पशुओं को पकड़वाये। इसके बाद जनवरी में दो बार टेंडर लगा लेकिन एक ही एजेंसी पहुंचने के कारण इसे रद कर दिया। प्रधान दर्शन नागपाल के संज्ञान में यह मामला भी था। 20 फरवरी को फिर अधिकारियों ने टेंडर लगा दिया और 26 फरवरी को खोल भी दिया। लेकिन टेंडर खोलने के बाद अब इस पर रोक लगाना समझ से परे है। नप कार्यालय में क्या हो रहा है इसका पता तभी चलेगा जब वे कार्यालय में आएंगे। सप्ताह में एक या दो दिन ही आ रहे है। ऐसे में अधिकारियों के साथ संवाद भी नहीं हो रहे है।

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प्रधान का दावा- पहले ही डेढ़ लाख रुपये दे रहे, लेकिन सड़क पर अब भी घूम रहे बेसहारा पशु

स्ट्रे कैटल का टेंडर प्रधान ने इसलिए रद किया है कि नंदीशाला को पहले ही डेढ़ लाख रुपये प्रति महीना दिया जा रहा है। उनका काम है कि वे इन पशुओं को पकड़े। लेकिन पिछले दो सालों का जिक्र करे तो आज भी सड़कों पर मौत बन ये पशु घूम रहे है। अगर पकड़े जाते तो अधिकारियों को यह कदम ही नहीं उठाना पड़ता। पिछले दो सालों में इन बेसहारा पशुओं की टक्कर लगने से 11 लोगों की मौत भी हो चुकी है।

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टेंडर के ये थे नियम जो प्रधान के समझ तक नहीं आए

नगरपरिषद की तरफ से टेंडर लगाना था। टेंडर लगाने के बाद नगरपरिषद की तरफ से छोटे पशुओं को पकड़ने के लिए 100 रुपये व बड़े पशुओं को पकड़ने के लिए 300 रुपये दिए जाते। इन पशुओं को पकड़ने के बाद टैग भी लगाया जाता और नंदीशाला में छोड़ा जाता। अगर टैग लगा पशु बाहर मिलता तो एजेंसी पर 5100 रुपये जुर्माना भी लगाने का प्रावधान था। सबसे बड़ी बात ये थी कि जो पशु पकड़े जाने थे उसकी कीमत पशु पालन विभाग अपने स्तर पर देता। लेकिन प्रधान को यह सीधी सी बात ही समझ नहीं आई ओर अपनी नाक का सवाल मानते हुए टेंडर ही रद कर दिया।

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बेसहारा पशुओं से ये हो चुके है हादसे

जिले में कुल हादसे : 160

घायल : 117

मौत : 43

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क्षेत्र हादसे घायल मृतक

फतेहाबाद शहर 22 11 11

फतेहाबाद सदर 64 54 10

जाखल 7 6 1

रतिया 27 20 7

भूना 10 7 3

टोहाना 20 12 8

भट्टूकलां 10 7 3

------------------------------------------------- ::::आमने-सामने::::

नप अधिकारियों ने यह टेंडर क्यों लगाया है मुझे समझ नहीं आ रहा है। जब नंदीशाला को नप डेढ़ लाख रुपये प्रति महीना दे रहा है तो अतिरिक्त खर्च करने का क्या फायदा है। मैं इस टेंडर पर हस्ताक्षर नहीं करूंगा। इसे रद कर दिया गया है।

दर्शन नागपाल

प्रधान नगरपरिषद फतेहाबाद।

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एनजीटी व एडीसी के आदेश है कि शहर को बेसहारा पशुओं को मुक्त करे। इसलिए टेंडर लगाया गया था। यह मेरा फैसला नहीं था। आगे प्रधान की मर्जी है।

जितेंद्र कुमार

ईओ नगरपरिषद फतेहाबाद।

Posted By: Jagran

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