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नाबालिग से घोर अपराध, मोबाइल से मिले इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य बने अहम कड़ी; फतेहाबाद कोर्ट ने आरोपी को सुनाई कठोर सजा

Published: Mon, 17 Aug 2026 04:21 PM (GMT+05:30)

पुलिस की जांच में मिले इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर फतेहाबाद कोर्ट ने नाबालिग से अपराध के दोषी गुलशन को कठोर सजा सुनाई।

नाबालिग से घोर अपराध, मोबाइल से मिले इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य बने अहम कड़ी (फाइल फोटो)

नाबालिग से घोर अपराध, मोबाइल से मिले इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य बने अहम कड़ी (फाइल फोटो)

HighLights

  1. पुलिस जांच में मिले इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य ने केस में अहम भूमिका निभाई

  2. आरोपी गुलशन के मोबाइल में आपत्तिजनक वीडियो साक्ष्य के रूप में मिले

  3. फतेहाबाद कोर्ट ने नाबालिग से अपराध के दोषी को कठोर सजा सुनाई

जागरण संवाददाता, फतेहाबाद। नाबालिग किशोर से घोर अपराध के मामले में आरोपित गुलशन को अदालत से मिली कठोर सजा के पीछे पुलिस की जांच में जुटाए गए इलेक्ट्रानिक साक्ष्य की भी अहम भूमिका रही।

थाना शहर फतेहाबाद में दर्ज मामले में पुलिस ने आरोपित की गिरफ्तारी के बाद उसका मोबाइल फोन कब्जे में लिया था। मोबाइल की जांच में सामने आए आपत्तिजनक वीडियो संबंधी साक्ष्य अभियोजन के लिए महत्वपूर्ण कड़ी साबित हुए। अदालत ने पूरे मामले में उपलब्ध साक्ष्यों को देखते हुए आरोपित को किसी तरह की राहत देने से इन्कार कर दिया।

अभियोग के मुताबिक आरोपित ने नाबालिग बच्चे को बहला-फुसलाकर अपनी बाइक पर बैठाया और उसे सुनसान स्थान पर ले गया। वहां अपराध करने के बाद आरोपित ने बच्चे को जान से मारने की धमकी दी।

पुलिस ने मामले की जांच करते हुए आरोपित को गिरफ्तार किया और बाइक के साथ मोबाइल फोन भी कब्जे में लिया। जांच में सामने आए इलेक्ट्रानिक साक्ष्य ने अभियोजन की कहानी को महत्वपूर्ण आधार दिया।

कोर्ट ने कहा- अपराध का असर पीड़ित के जीवन पर लंबे समय तक रह सकता है

अभियोजन ने अदालत के समक्ष दलील दी कि आरोपित का कृत्य अत्यंत गंभीर है और ऐसे अपराध का असर पीड़ित बच्चे के मानसिक जीवन पर लंबे समय तक रह सकता है।

पीड़ित को जीवनभर मानसिक पीड़ा और अवसाद जैसी स्थिति से गुजरना पड़ सकता है। अपराध की गंभीरता और मामले में पेश किए गए ठोस साक्ष्यों को देखते हुए अदालत ने दोषी को राहत देने से इनकार किया। कोर्ट ने कहा कि आरोपित किसी भी प्रकार की नरमी का हकदार नहीं है।

कोर्ट में पूरे साक्ष्य रखे गए। उसी के आधार पर सजा मिली है। जांच के दौरान पक्ष रखा गया कि दोषी ने पीड़ित बालक के साथ यह घोर कृत्य किया है। जिस कारण पीड़ित बालक जीवनभर डिप्रेशन में रहने का कारण भी बन जाएगा। -देवेंद्र मित्तल, जिला न्यायवादी।