जागरण संवाददाता, फतेहाबाद

जिले को नशा का गढ़ कहा जाता है, यहां पर सबसे ज्यादा हेरोइन की तस्करी हो रही है। 80 फीसद मरीज हेरोइन लेने के आदी हो चुके हैं। नशा छुड़वाने के लिए यहां पर नशा मुक्ति केंद्र खोलने की मांग पिछले कई सालों से चली आ रही थी। जो कि चार महीने पहले पूरी भी हो गई। नशा मुक्ति केंद्र के शुरू होने के बाद यहां पर उम्मीद से ज्यादा मरीज पहुंच रहे हैं। 15 बैड के नशा मुक्ति केंद्र में 20 मरीज दाखिल हैं। लेकिन तस्कर इन मरीजों के नशा छोड़ने में सबसे बड़ा रोड़ा बन रहे हैं। नशा मुक्ति केंद्र में ही आसानी से नशा पहुंचाया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने तस्करों को रोकने के लिए बेशक यहां पर सुरक्षा बढ़ा रखी है लेकिन तस्कर फिर भी आसानी से नशा इन मरीजों तक पहुंचा रहे हैं। तस्करों के नशा पहुंचाने के रास्ते यहां के रोशनदान व खिड़कियां हैं। खुले रोशनदान व बिना जाली की खिड़कियों से तस्कर मरीजों तक नशा पहुंचा रहे हैं।

रविवार को नशा मुक्ति केंद्र के किए गए निरीक्षण में सामने आया कि यहां पर ना तो आगे सुरक्षा है और न ही पीछे सुरक्षा है। तस्कर आसानी से खिड़कियों के माध्यम से मरीजों को नशे की सप्लाई कर रहे हैं। नशा मुक्ति केंद्र में आने वाले लोगों से ना तो पूछताछ की जाती है और न ही सामान की चे¨कग होती है। इसके अलावा पीछे खिड़कियों में जाली ही नहीं है। यहां तक की रोशनदान भी खुले हैं।

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बिना चाहरदीवारी चल रहा नशा मुक्ति केंद्र

पुराना सिविल सर्जन कार्यालय में शुरू किए गए नशा मुक्ति केंद्र के परिसर की चाहरदीवारी ही नहीं है। तीन-तीन फुट की लोहे की ग्रिल के सहारे नशा मुक्ति केंद्र चल रहा है। यहां का मुख्य गेट बेशक बंद रहता है लेकिन मरीज नशे के लिए आसानी से ग्रिल कूदकर बाहर चले जाते हैं।

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ये हो चुकी हैं नशा मुक्ति केंद्र में घटनाएं

- नशा मुक्ति केंद्र में नशे के लिए मरीज भाग चुका है।

- केलों के लिफाफे में नशा पहुंचाया गया।

- नशा मुक्ति केंद्र के बाथरूम में मरीज हेरोइन और इंजेक्शन के साथ पकड़े गए।

- चाय के बहाने भी होती थी यहां पर नशा की सप्लाई

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दवाइयों के लिए नहीं बजट

सरकार ने नशा मुक्ति केंद्र बेशक शुरू कर दिया है लेकिन सुविधाएं देने के नाम पर पीछे हट रही है। नशा मुक्ति केंद्र में पीने के लिए पानी तक नहीं है। कैंपर के सहारे काम चल रहा है। राज्यमंत्री कृष्ण बेदी की घोषणा के बावजूद यहां पर वाटर कूलर नहीं लग पाया है। दवाइयों के लिए ही नशा मुक्ति केंद्र में बजट नहीं है। मेंटल हेल्थ प्रोग्राम के तहत आए 50 हजार रुपये बजट से काम चल रहा है। जबकि रोजाना एक मरीज पर 200 रुपये की दवाइयां खर्च हो रही हैं।

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सबसे ज्यादा हेरोइन की तस्करी

नशा मुक्ति केंद्र में सबसे ज्यादा हेरोइन लेने वाले मरीज दाखिल हैं। आंकड़ो के मुताबिक नशा मुक्ति केंद्र में 18 मरीज दाखिल हैं। जिसमें से 15 मरीज हेरोइन के हैं। लत छोड़ने के लिए दाखिल मरीजों के पास तस्कर हेरोइन पहुंचा रहे हैं।

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खिड़कियों पर जाली लगवाई जा रही है। कुछ खिड़कियों पर जाली लग भी चुकी है। जल्द ही चाहरदीवारी बनाई जाएगी। हमारी तरफ से नशा मुक्ति केंद्र में पूरी सुरक्षा है। बिना चे¨कग के किसी की भी एंट्री नहीं है। 15 बेड के नशा मुक्ति केंद्र में करीब 20 मरीज दाखिल कर रखे हैं।

- डा. गिरीश, उप सिविल सर्जन, फतेहाबाद

Posted By: Jagran

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