जागरण संवाददाता, फतेहाबाद :

पिछले साल नागरिक अस्पताल से आउटसोर्सिंग से हटाए गए 23 कर्मचारियों को हाई कोर्ट ने राहत दी है। वही अस्पताल प्रबंधन की मुश्किलें बढ़ गई है। इससे पहले 30 कर्मचारी भी कोर्ट से स्टे लेकर आ गए थे। ऐसे में इन कर्मचारियों को नौकरी पर रखना अस्पताल प्रबंधन के लिए मुश्किल हो गया है। सभी कर्मचारी शुक्रवार को सिविल सर्जन से मिलेगे और नौकरी पर रखने की बात रखेंगे। अगर अस्पताल प्रबंधक नौकरी पर नहीं रखता है तो ये कर्मचारी फिर कोर्ट में जाएंगे।

नागरिक अस्पताल में ठेके पर लगे कर्मचारियों को हटाकर नए कर्मचारियों को रखने संबंधी पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में चल रहे मामले में हाईकोर्ट ने हटाए गए 23 कर्मचारियों को दोबारा रखने के अंतरिम आदेश दिए हैं। उक्त कर्मचारी तब तक अपनी यथावत ड्यूटी देंगे, जब तक कोर्ट नया आदेश नहीं देती। इस मामले में अगली सुनवाई अब 17 मार्च को होगी। इससे पहले 30 कर्मचारियों के संबंध में भी आदेश दिए थे।

ज्ञात रहे कि नागरिक अस्पताल में ठेके पर कर्मचारियों को भर्ती करने के लिए एजेंसी बदली गई थी। नई एजेंसी आते ही पुरानी एजेंसी के कर्मचारियों को हटाकर नई एजेंसी ने अपने कर्मचारी नियुक्त किए थे। 1 जुलाई 2019 को नई एजेंसी ने 53 कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया। जिसके बाद ये धरना प्रदर्शन करे रहे। कर्मचारी नेताओं से भी मिले लेकिन कुछ बात नहीं बनी। नागरिक अस्पताल में आउटसोर्सिंग के तहत 126 कर्मचारी लगे हुए है। ऐसे में 30 कर्मचारियों को हटाना भी अस्पताल प्रबंधन के लिए मुश्किल होगा। जिसके बाद ठेका है वो भी इतने कर्मचारियों को नहीं रख सकता। ऐसे में अस्पताल प्रबंधन को पसीना बहाना पड़ेगा। वही माना जा रहा है कि एजेंसी के जरिये दूसरा पक्ष भी कोर्ट में जा सकता।

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पहले 30 कर्मचारियों ने कोर्ट में याचिका लगाई थी जो फैसला हमारे पक्ष में आया था। उसके बाद 23 कर्मचारी और कोर्ट में चले गए थे। अब शुक्रवार को सिविल सर्जन से मिलेंगे और अपनी मांग रखे। अगर उन्हें नौकरी पर नहीं रखा जाता है तो फिर कोर्ट में जाएंगे।

राजकुमार

प्रधान कर्मचारी यूनियन नागरिक अस्पताल।

Posted By: Jagran

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