फरीदाबाद जिले के सबसे बड़े गांव में करोड़ों रुपये खर्च, फिर भी जलभराव; सिस्टम पर उठे सवाल
फरीदाबाद के तिगांव गांव में 18 करोड़ रुपये की लागत से सीवर व्यवस्था पर खर्च करने के बावजूद बारिश के बाद मुख्य सड़क पर जलभराव की समस्या बनी हुई है।
-1789382618911_m.webp)
18 करोड़ सीवर सिस्टम पर खर्च, फिर भी तिगांव पानी-पानी। जागरण
HighLights
तिगांव में 18 करोड़ के सीवर प्रोजेक्ट के बावजूद जलभराव।
बारिश में मुख्य सड़क पर पानी भरने से आवाजाही बाधित।
राज्य मंत्री राजेश नागर ने जल्द समाधान का आश्वासन दिया।
जागरण संवाददाता, तिगांव। फरीदाबाद जिले के सबसे बड़े तिगांव गांव में सीवर व्यवस्था सुधारने के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए, लेकिन वर्षा होते ही विकास के दावों की पोल खुल जाती है।
गांव के आधे हिस्से में करीब 18 करोड़ रुपये की लागत से सीवर लाइन डाली जा चुकी है, इसके बावजूद मुख्य सड़क पर जलभराव की समस्या जस की तस बनी हुई है।
वर्षा के दौरान सड़क पर पानी भरने से लोगों को आवाजाही में परेशानी होती है और वाहन चालकों को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब करोड़ों रुपये खर्च करके सीवर लाइन डाली गई तो पानी की निकासी की व्यवस्था क्यों नहीं सुधरी।
प्रदेश के राज्य मंत्री राजेश नागर का तिगांव पैतृक गांव है। उन्होंने कई बार जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के अधिकारियों को हड़काया है। जल्द समाधान करने के लिए कहा जा चुका है लेकिन अधिकारी मनमानी कर रहे हैं।
तिगांव की मुख्य सड़क गांव के लोगों के लिए सबसे महत्वपूर्ण मार्गों में शामिल है। वर्षा के बाद यहां पानी जमा होने से सड़क का बड़ा हिस्सा जलमग्न हो जाता है। कई बार पानी सड़क पर लंबे समय तक जमा रहने के कारण लोगों को पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ता है।
सीवर लाइन डालने के दौरान यदि तकनीकी पहलुओं और पानी की निकासी का सही तरीके से ध्यान रखा जाता तो करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी यह स्थिति नहीं बनती।
सबसे गंभीर बात यह है कि सीवर लाइन डालने के काम पर 18 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद जलभराव से निजात नहीं मिल पाई है। इससे काम की गुणवत्ता और योजना की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
लोगों का आरोप है कि सीवर लाइन डालने के दौरान कई जगह सड़क और जलनिकासी व्यवस्था को लेकर समुचित योजना नहीं बनाई गई। नतीजा बारिश के समय सामने आ रहा है।
ग्रामीण बोले, जांच होनी चाहिए
तिगांव निवासी अधिवक्ता जेपी अधाना ने बताया कि केवल सीवर लाइन बिछा देना पर्याप्त नहीं है। सीवर व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए पानी की निकासी, सड़क की ऊंचाई, नालियों और सीवर नेटवर्क के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। यदि इन बिंदुओं पर काम नहीं किया गया तो करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद समस्या बनी रहेगी।
ग्रीवेंस कमेटी के सदस्य दयानंद नागर ने बताया कि गांव के सरपंचाें ने बोर्ड-हार्डिंग्स पर लाखों रुपये खर्च कर दिए लेकिन नाली साफ नहीं करा पा रहे हैं। इनकी शिकायत ग्रीवेंस कमेटी में की जाएगी।
वर्षा के दौरान सड़क पर जमा पानी से राहगीरों के साथ-साथ दुकानदारों को भी परेशानी होती है। पानी के कारण सड़क की हालत खराब होने का खतरा भी बना रहता है।
वहीं, उनकी मांग है कि 18 करोड़ रुपये की लागत से डाली गई सीवर लाइन के काम की तकनीकी जांच कराई जाए और बापानी की निकासी के लिए स्थायी समाधान तैयार किया जाए।
भुआपुर मोड़ से लेकर सदपुरा मोड़ तक जमा रहने वाले गंदे पानी का समाधान एक सप्ताह में हो जाएगा। बाकी एसबीआइ के सामने मुख्य रोड पर पानी निकासी के इंतजाम के लिए विभागीय अधिकारियों को बोला है। नालियों की सफाई कराई जाएगी और जाम पड़ी सीवर लाइन ठीक कराई जाएगी। - राजेश नागर, राज्य मंत्री, हरियाणा
