सूरजकुंड मेला-2026 में आज से सजी कला-संस्कृति की दुनिया, क्या है खास और कैसे पहुंचेंगे; यहां मिलेगी पूरी जानकारी
फरीदाबाद में 31 जनवरी से 15 फरवरी तक 39वां अंतर्राष्ट्रीय सूरजकुंड हस्तशिल्प मेला 2026 आयोजित हो रहा है। 45 एकड़ ...और पढ़ें


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जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
डिजिटल डेस्क, फरीदाबाद। वासंती मौसम के आगमन के साथ ही प्रकृति रंगों में खिल उठती है और इसी मौसम में देश-विदेश की कला, संस्कृति और परंपराओं का सबसे बड़ा संगम देखने को मिलता है। सूरजकुंड में आयोजित होने वाला अंतरराष्ट्रीय सूरजकुंड हस्तशिल्प मेला। इस विश्व-प्रसिद्ध मेले की शुरुआत 31 जनवरी (शनिवार) से हो रही है, जो 15 फरवरी तक चलेगा।
दक्षिण दिल्ली से सटे लगभग 45 एकड़ क्षेत्र में फैले सूरजकुंड मेला प्रांगण में इस बार देश-विदेश से आए 1200 से अधिक शिल्पी और कलाकार अपने हुनर का प्रदर्शन करेंगे। मेले में एक से बढ़कर एक हस्तशिल्प, लोक कलाएं, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और पारंपरिक व्यंजनों की खुशबू लोगों को अपनी ओर आकर्षित करेगी।
- 15 फरवरी तक होगा मेले का आयोजन।
- 45 एकड़ क्षेत्र में फैला है मेला प्रांगण।
- 1200 से अधिक शिल्पी ले रहे हैं भाग।
- 80 शिल्पकार यूपी और मेघालय के हैं।
थीम स्टेट और आत्मनिर्भर भारत की झलक
इस वर्ष मेले के थीम स्टेट संयुक्त रूप से उत्तर प्रदेश और मेघालय रखे गए हैं। दोनों राज्यों के 80 शिल्पकार, हथकरघा उत्पादक और कलाकार अपने पारंपरिक शिल्प, वेशभूषा और सांस्कृतिक पहचान के साथ मेले की शोभा बढ़ाएंगे।
मेले का यह 39वां संस्करण है और ‘वोकल फॉर लोकल’ को बढ़ावा देते हुए इसे नाम दिया गया है- सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर हस्तशिल्प मेला।
कल्चरल पार्टनर के रूप में पूर्वोत्तर भारत के आठ राज्य असम, मेघालय, मणिपुर, सिक्किम, नगालैंड, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम के कलाकार और शिल्पकार अपनी लोक संस्कृति का जीवंत प्रदर्शन करेंगे।

पार्टनर कंट्री और अंतरराष्ट्रीय रंग
इस बार मेले की पार्टनर कंट्री मिस्र (Egypt) है। अपनी प्राचीन सभ्यता, पिरामिड, कला, वास्तुकला और सांस्कृतिक विरासत के लिए प्रसिद्ध मिस्र से आए कलाकार और शिल्पकार पारंपरिक हस्तशिल्प और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से मेले को अंतरराष्ट्रीय पहचान देंगे। मेले में भारत के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशी शिल्पियों के स्टाल भी लगाए गए हैं, जिससे यह आयोजन वास्तव में वैश्विक स्वरूप लेता है।
क्या-क्या होगा खास
- लकड़ी पर मुगलकालीन नक्काशी
- टेराकोटा की कलाकृतियां
- रामायण, महाभारत और पुराणों पर आधारित पेंटिंग
- महिला स्वयं सहायता समूहों के बड़ी संख्या में स्टाल
- बनारस के घाटों की झलक
- हरियाणा का ‘अपना घर’ — ग्रामीण परिवेश और लोक संस्कृति के दर्शन
- बंचारी नगाड़ा पार्टी और युवाओं के लिए नृत्य का अवसर
धर्म-संस्कृति के रंग और दृश्य आकर्षण
मेले में धर्म और संस्कृति के रंग भी बिखरे नजर आएंगे। वीआईपी गेट के पास भगवान कृष्ण के सुदर्शन चक्र को रंगों से आकर्षक रूप में सजाया गया है। थीम स्टेट उत्तर प्रदेश और मेघालय के पवेलियन के बीच शंख की आकृति बनाई गई है, जो श्रद्धा और सांस्कृतिक प्रतीक का संदेश देती है। यह पूरा क्षेत्र पर्यटकों को एक अलग ही अनुभूति कराएगा।

मनोरंजन, संगीत और स्वाद का संगम
बड़ी चौपाल और छोटी चौपाल पर प्रतिदिन शास्त्रीय संगीत, लोक नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां होंगी।
राजस्थान के बहरूपिये, कॉमेडी कार्यक्रम, बच्चों और बड़ों के लिए झूले, ऊंट की सवारी और देश के अलग-अलग राज्यों के लजीज व्यंजन मेले को पूरी तरह पारिवारिक उत्सव बनाते हैं।

ऐसे पहुंचें सूरजकुंड मेला
सड़क मार्ग से आने के लिए ये हैं रास्ते
दिल्ली से तुगलकाबाद, वहां से प्रह्लादपुर फिर सूरजकुंड।
गुरुग्राम से बंधवाड़ी टोल प्लाजा, वहां से मांगर कट और पाली क्रशर जोन होते हुए सूरजकुंड
मेट्रो से आ रहे हैं तो इस रूट से आना होगा
तुगलकाबाद या बदरपुर मेट्रो स्टेशन उतरकर ऑटो/कैब द्वारा मेला प्रांगण तक पहुंचा जा सकता है।
इस तरह बस के जरिये पहुंचें, मेट्रो से शटल बस भी मिलेगी
- दर्शकों की सुविधा को देखते हुए हरियाणा रोडवेज द्वारा विशेष बस सेवाएं चलाई गई हैं।
- बड़खल मेट्रो स्टेशन से शटल बस मिलेगी।
- बल्लभगढ़ बस अड्डे से एनआईटी और बदरपुर/तुगलकाबाद होते हुए सूरजकुंड।
- ओल्ड फरीदाबाद और बदरपुर बॉर्डर होते हुए भी बस चलाई गई है।
- बसों का संचालन सुबह 7 बजे से शुरू होगा।
सूरजकुंड हस्तशिल्प मेला 2026 केवल एक मेला नहीं, बल्कि भारतीय लोक संस्कृति, आत्मनिर्भर भारत और वैश्विक कला का उत्सव है। 15 दिनों तक चलने वाला यह आयोजन हर उम्र और हर वर्ग के लोगों के लिए यादगार अनुभव लेकर आएगा।
