जागरण संवाददाता, फरीदाबाद : हस्तशिल्प मेले में अपने देश के विभिन्न प्रदेशों की कला के साथ-साथ विदेशों से आए हस्तशिल्पियों की कारीगरी भी अनोखी, आकर्षक है, जो दर्शकों को कुछ खरीदने के लिए स्टॉल पर रोक देती है। ऐसी ही कला लेकर आए हैं गृह युद्ध की आग में झुलस रहे सीरिया से आए इस्कांदर, फऊआद, मोहम्मद और बस्साम, जिनके मौसाइक से बने हुए उत्पाद स्टॉल नंबर 776 और 777 पर प्रदर्शित हैं। इस स्टॉल पर कपड़ों पर तेल से बनाई गई पें¨टग, क्राऊशे व मौसाइक की वस्तुएं उपलब्ध हैं।

मौसाइक की वस्तुओं की फिनि¨शग इतनी लाजवाब है कि इसे देखकर कहा ही नहीं जा सकता कि यह हस्तनिर्मित वस्तु है। इसे छूने पर जरा सा भी खुरदरापन महसूस नहीं होता। इन वस्तुओं की चमक-धमक देखकर लगता है जैसे यह मशीन से बनी वस्तुएं हों। शिल्पीकार इस्कांदर ने बताया कि मौसाइक की इन वस्तुओं को अलग-अलग लकड़ी से काटकर बनाया गया है। इसकी खासियत यह है कि इन्हें रंग-बिरंगी लकड़ियों से ही काटकर बनाया जाता है, जिस कारण इसमें रंगों का इस्तेमाल भी नहीं होता। इन वस्तुओं में चार तरह की लकड़ियों और समुद्र की कौड़ी का इस्तेमाल हुआ है। इनके निर्माण में पीले रंग के लिए नींबू के पेड़ की लकड़ी, लाल रंग के लिए गुलाब के पेड़ी की लकड़ी, भूरे रंग के लिए जैतून यानी ऑलिव के पेड़ की लकड़ी, गहरे भूरे रंग के लिए वालेंट के पेड़ की लकड़ी और सफेद रंग के लिए समुद्री कौड़ी का प्रयोग किया गया है। मौसाइक की वस्तुएं टेबल, स्टूल, डिब्बे आदि के रूप में उपलब्ध हैं और इनकी कीमत 500 रुपये से शुरू होकर 5000 रुपये तक है।

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