सुशील भाटिया, फरीदाबाद : वर्ष 2009 से 2014 तक प्रदेश में मुख्यमंत्री भूपेंद्र ¨सह हुड्डा की सरकार में पहले राजस्व और बाद में श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री बनने तक का सफर पंडित शिवचरण लाल शर्मा ने अपनी कर्मठता से तय किया। उन्होंने अपने क्षेत्र की जनता की नब्ज पहचानी और उनकी मूल समस्याओं को समझते हुए उन्हें दूर करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार की भारत मुद्रणालय प्रेस की नौकरी से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लिया और जुट गए मंजिल पाने को।

यूपी के गौतम बुद्ध नगर जिले के जेवर के मूल निवासी शिवचरण लाल शर्मा बेहतर रोजगार की तलाश में वर्ष 1956 में फरीदाबाद आए और जवाहर कॉलोनी में निवास बनाया। तब उन्हें राजकीय प्रेस में श्रमिक की नौकरी मिल गई। यहां उन्होंने 1990-1991 तक अपनी सेवाएं दी। इसी वर्ष उन्होंने नौकरी से त्यागपत्र देकर सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से समाजसेवा में जुड़ गए। वर्ष 1994 में जब मिश्रित प्रशासन फरीदाबाद जिसे कांपलेक्स के नाम से जाना जाता था, उसे खत्म कर सरकार ने फरीदाबाद नगर निगम का गठन किया और इसके चुनाव में शिवचरण लाल शर्मा वार्ड नंबर 6 से चुनाव लड़ कर पार्षद बने। इसके बाद फिर 1999 में चुनाव जीते और सीनियर डिप्टी मेयर बने, इस दौरान जब महापौर की कुर्सी पर संकट आया, तब उन्होंने कुछ समय के लिए कार्यवाहक मेयर के तौर पर भी काम किया। वर्ष 2004 में तीसरी बार लगातार नगर निगम का चुनाव जीते और फिर से सीनियर डिप्टी मेयर के पद को सुशोभित किया। इस दौरान उन्होंने जवाहर कॉलोनी, सेक्टर-55, सारन आदि क्षेत्रों की नालियां पक्की कराके, सीमेंटेड सड़कें बना कर और स्वच्छता के मामले में अव्वल करके अपने आपको स्थापित कर लिया। तब दूसरे वार्डों के लोग पंडित शिवचरण शर्मा के कार्यों का उदाहरण देते थे।

वर्ष 2009 में जब विधानसभा क्षेत्रों का परिसीमन हुआ और जवाहर कॉलोनी, प्रेस कॉलोनी, सारन आदि क्षेत्र एनआइटी विधानसभा की मूल सीट से अलग होकर पृथक विधानसभा क्षेत्र में शामिल हुए और इस सीट का नाम भी एनआइटी ही हुआ, जबकि पहले से एनआइटी विधानसभा का नाम बड़खल विधानसभा हो गया, तो शिवचरण लाल निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में एनआइटी से चुनाव लड़े और विधायक बने। तब भूपेंद्र ¨सह हुड्डा को मुख्यमंत्री बनाने का फैसला पार्टी ने लिया, लेकिन बहुमत नहीं था। निर्दलीय विधायक के रूप में शिवचरण ने सरकार को समर्थन दिया। इसके बदले मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा ने शिवचरण को पहले राजस्व राज्य मंत्री बनाया और बाद में वो श्रम एवं रोजगार मंत्री बने। इस दौरान नगर निगम में पंडित जी की विरासत को साथ-साथ ही पहले उनकी पत्नी ममता शर्मा ने 1999 में और फिर 2009 में पार्षद बन कर और उसके बाद बड़े पुत्र मुकेश शर्मा ने पार्षद बन कर संभाला। मुकेश शर्मा गत नगर निगम के कार्यकाल में सीनियर डिप्टी मेयर भी बने।

यही कारण है कि बुधवार को जब उनके निधन की खबर उनके चाहने वालों तक पहुंची, तो उनके निवास पर श्रद्धांजलि देने वाले आम और खास लोगों, नेताओं, प्रशासनिक अधिकारियों का तांता लग गया। अब उनकी राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने का जिम्मा उनके बड़े पुत्र मुकेश शर्मा, मुनेश व नीरज शर्मा के कंधों पर है।

Posted By: Jagran