फरीदाबाद [हरेंद्र नागर]। 10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों को लेकर सड़क पर निकलना महंगा पड़ सकता है। पुलिस ऐसे वाहनों को जब्त करेगी। शुक्रवार को पुलिस आयुक्त विकास अरोड़ा ने इस संंबंध में सभी डीसीपी को निर्देश दे दिए हैं। प्रदेश के उच्च अधिकारियों के साथ वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिये इस मुद्दे पर चर्चा भी हुई। उन्होंने कहा है कि ऐसे वाहनों को लेकर कोई रियायत नहीं बरती जाएगी। वाहन जब्त करने के साथ ही चालक पर 10 हजार रुपये के जुर्माने का भी प्रावधान है। जिले में नौ से दस लाख वाहन हैं। इनमें से करीब 20 फीसद वाहन ऐसे हैं जो 10 और 15 साल का समय पूरा कर चुके हैं। 

नई कबाड़ नीति के तहत लिया निर्णय

पुलिस आयुक्त ने बताया कि केंद्र सरकार की नई स्क्रैप (कबाड़) नीति के तहत 15 साल पुराने व्यवसायिक वाहनों को स्क्रैप किया जाएगा यानी उन्हें सड़कों पर चलाने की अनुमति नहीं है। वहीं निजी वाहन के लिए यह अवधि को 20 वर्ष तय किया गया है। लेकिन, दिल्ली-एनसीआर में रहने वालों के लिए यह नियम लागू नहीं है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के अनुसार एक डीजल वाहन 24 पेट्रोल कारों या 40 सीएनजी वाहनों के बराबर प्रदूषण करता है। एनजीटी ने दिल्ली-एनसीआर के आरटीओ को ऐसे सभी वाहन डी-रजिस्टर करने के आदेश दिए हैं।

दिल्ली-एनसीआर में लागू नहीं 20 साल वाली नीति

पुलिस आयुक्त ने बताया कि अगर आपकी कार दिल्ली-एनसीआर में रजिस्टर है और उसके रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट पर 15 साल की वैधता लिखी है, तब भी अगर वह डीजल कार है तो 10 साल और पेट्रोल कार है तो 15 साल ही चल सकेगी। दिल्ली-एनसीआर में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के अलावा हरियाणा के 13 जिले फरीदाबाद, गुरुग्राम, मेवात, रोहतक, सोनीपत, रेवाड़ी, झज्जर, पानीपत, पलवल, चरखी-दादरी के साथ भिवानी, महेंद्रगढ़, जिंद और करनाल आते हैं। इन जिलों में 10 और 15 साल वाला नियम लागू होगा।

कम होगा वायु प्रदूषण

फरीदाबाद देश के सबसे प्रदूषित शहरों में से एक है। वाहनों से निकलने वाला धुआं वायु प्रदूषण का प्रमुख कारण है। पुराने वाहन अधिक मात्रा में प्रदूषण करते हैं। अगर पुराने वाहनों को सड़कों से हटा दिया जाएगा तो प्रदूषण काफी हद तक कम होगा। नए वाहनों के इंजन इस तरह डिजाइन किए जा रहे हैं कि उनमें कम मात्रा में प्रदूषण उत्सर्जित होता है।

क्या कहते हैं अधिकारी

वाहन मालिक अपने ऐसे वाहनों को स्क्रैप करा लें जिनके परिचालन नहीं हो सकता। सरकार से अधिकृत एजेंसियों के अलावा किसी प्राइवेट व्यक्ति या कबाड़ी से वाहन को स्क्रैप नहीं कराएं। यह कानून का उल्लंघन है। ऐसे वाहनों को दिल्ली-एनसीआर से बाहर दूसरे शहर में बेच सकते हैं। 20 साल वाली नीति दिल्ली-एनसीआर के बाहर लागू है।

विकास अरोड़ा, पुलिस आयुक्त

जानें आर्थिक पहलू भी

आर्थिक दृष्टि से यह नीति ठीक नहीं है। 10 साल में वाणिज्यिक वाहन की कीमत वसूल नहीं होती। साथ ही 10 साल में वाहन का ज्यादा कुछ बिगड़ता भी नहीं है। उसकी प्रदूषण की मात्रा में भी ज्यादा वृद्धि नहीं होती। इस नीति में सुधार की जरूरत है। अगर कोई वाहन प्रदूषण कर रहा है तो उस पर कार्रवाई होनी चाहिए। मगर ऐसे वाहन जो 10 या 15 साल बाद भी तय मानकों के अनुसार ही प्रदूषण कर रहे हैं उन्हें कार्रवाई से छूट मिलनी चाहिए।

सुरेश शर्मा, प्रधान, आल फरीदाबाद ट्रांसपोर्टर्स एसोसिएशन

Edited By: Prateek Kumar