फरीदाबाद [सुशील भाटिया]। भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी के रूप में विभिन्न पदों पर सेवाएं देने के साथ-साथ जब मैं प्रदेश में विज्ञान एवं तकनीक विभाग के महानिदेशक के पद पर कार्यरत था, तो उस समय विश्व के कई वायरोलोजिस्ट से बात की थी और मैं एक होम्याेपैथी चिकित्सक भी हूं, तो उस आधार पर कहना चाहूंगा कि संक्रमण फैलने की बात सही नहीं है। संक्रमण का स्वरूप बदलना एक सामान्य प्रक्रिया है। जब से सृष्टि बनी है, तब से लगातार हो रहा है। हम कभी भी संक्रमण से मुक्त नहीं हो सकते। वायरस कभी भी नुकसान नहीं पहुंचाता। हमारे चिकित्सीय विज्ञान के अनुसार प्रत्येक शरीर में एक खास तरह का विषाणु होता है। यह विषाणु जब तैयार हो जाता है, तब वायरस अपना काम शुरू करता है और नुकसान पहुंचाता है।

यह विषाणु सभी में अलग-अलग रोग का होता है। इसे इस तरह से समझा जा सकता है, जैसे इंसान में पुश्तैनी रोग होता है। कई बार कहा जाता है कि मधुमेह या जोड़ों का दर्द इसके दादा-दादी को भी था, इनके पिता को भी था। तो यह कई लोगों में पीढ़ी दर पीढ़ी चलता है। इसी तरह बहुत सारे लोगों में इस तरह के अलग-अलग विषाणु के प्रकार होते हैं। मान लो हम 15 लोग एक तरह के संक्रमण की चपेट में आए हैं, पर बीमार वही होंगे, जिनमें इस तरह का विषाणु मौजूद होगा। वो संक्रमण इस विषाणु के संपर्क में आएगा, तब वो अपना स्वरूप बदलेगा और नुकसान पहुंचाएगा। इसलिए स्पष्ट तौर पर कहना चाहूंगा कि यह स्वाभाविक है, संक्रमण मुक्त हम कभी नहीं हो सकते।

अब लाकडाउन कर दिया जाए, बाजार बंद कर दिए जाएं, तो इससे संक्रमण फैलना बंद हो जाएगा, इससे हम सहमत नहीं हैं। दैनिक जागरण ने यह जो मुद्दा उठाया है, वो बेहद महत्वपूर्ण है। जिस तरह आप हवा से मुक्त नहीं हो सकते, पृथ्वी से मुक्त नहीं हो सकते, तो संक्रमण के प्रभाव में आने से कैसे बच सकते हैं। आपस में एक-दूसरे से संपर्क में आएंगे ही, यह सामान्य प्रक्रिया है। इंसान कहीं तो रहेगा ही, दूसरे से अलग कैसे रह सकता है।

अब जहां तक मेरे औद्योगिक नगरी के डीएम के रूप में कार्य करने का अनुभव है, तो एक प्रश्न उठता है कि जब हम सुबह दस बजे से शाम 5 बजे तक एक-दूसरे से संपर्क में आने को खत्म नहीं कर सकते, तो शाम 5 बजे से सुबह 10 बजे तक कैसे खत्म कर सकते हैं। उदाहरण के रूप में जो इंसान 5 बजे बाजार से होकर घर आया है, तो क्या वो उस संक्रमण को साथ लेकर घर नहीं आया, क्या वो उस दौरान अपने परिवार के सदस्यों से नहीं मिलेगा। कोई कैसे और कब तक अपने आप को अपने स्वजन से मिलने से रोकेगा। संक्रमण की प्रक्रिया इतनी सूक्ष्म है कि समुद्र से लिए गए एक चम्मच पानी में इतना संक्रमण है कि एक के अंग के आगे 15 शून्य लगा दो, इतना संक्रमण है।

बाजार इसलिए बंद कर दिए जाएं कि इस दौरान भीड़ हो जाती है, तो यह संक्रमण को रोकने का उपाय नहीं है। इसको इसी से समझा जा सकता है कि सबसे ज्यादा घनी आबादी स्लम क्षेत्र में होती है और वहां रहने वाले लोग तो एक-दूसरे से सबसे ज्यादा नजदीकी से मिलते हैं। अब अपने शहर में स्लम क्षेत्र से कोरोना संक्रमण के मामले ज्यादा नहीं हैं, जबकि दो दिन पूर्व औद्योगिक नगरी के सेक्टर-21 से कोरोना संक्रमण के 102 मामले आए। सेक्टर-21 शहर का पाश क्षेत्र है। आबादी ज्यादा नहीं हैं, बड़ी-बड़ी कोठियां हैं। अब किसी के पास जवाब है कि वहां से मामले ज्यादा क्यों आ रहे हैं। अब कोरोना के जो लक्षण हैं, वो सब वही पुराने हैं, किसी को खांसी-जुकाम है। किसी को सिर दर्द है, गला खराब है, किसी को बुखार है।

यह रोग के लक्षण तो वही हैं जो उनको पहले भी बीमार होने पर हुए थे। इसलिए यह सैद्धांतिक रूप से ही गलत है कि लाकडाउन कर दिया जाए, बाजार कुछ समय के लिए बंद कर दिए जाएं। कुछ समय के लिए बाजार खुलेगा, तो भीड़ ज्यादा होगी, क्योंकि जो आटा-दाल, सब्जी खरीदनी है, तो बाजार जाना ही पड़ेगा और बाजार पूरे समय के लिए खुलेगा, तो लोग अपनी सुविधानुसार जाएंगे। इससे भीड़ नहीं होगी और न ही कारोबार प्रभावित होगा।

(फरीदाबाद के पूर्व जिला उपायुक्त डा.प्रवीन कुमार से बातचीत पर आधारित)

Edited By: Mangal Yadav