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बीमारी और कंधे में सूजन के बावजूद मनीष नरवाल ने जीता सिल्वर मेडल, पिता ने साझा की संघर्ष की कहानी

Published: Tue, 20 Oct 2026 01:29 PM (IST)

भारत के स्टार पैरा-शूटर मनीष नरवाल ने एशियाई शूटिंग चैंपियनशिप में रजत पदक जीता है। खराब सेहत, आंखों की परेशानी ...और पढ़ें

HighLights

  1. मनीष नरवाल ने एशियाई शूटिंग चैंपियनशिप में रजत पदक जीता

  2. बीमारी और कंधे में सूजन के बावजूद उन्होंने यह उपलब्धि हासिल की

  3. उनके पिता ने संघर्ष और पिछली सफलताओं की कहानी साझा की

दीपक पांडेय, फरीदाबाद। एशियाई शूटिंग चैंपियनशिप में भारत के स्टार पैरा-शूटर मनीष नरवाल ने शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक (सिल्वर मेडल) अपने नाम किया है और एक बार फिर विदेशी धरती पर भारत का तिरंगा बुलंद किया है।

उनकी इस ऐतिहासिक जीत के बाद उनके घर पर जश्न का माहौल है। मनीष की इस कामयाबी और उनके संघर्ष के सफर को लेकर उनके पिता ने दैनिक जागरण से खास बातचीत की।

कभी खाली हाथ नहीं लौटते मनीष

बेटे की जीत पर खुशी जाहिर करते हुए पिता ने कहा, "ऐसा होनहार बच्चा हर घर में पैदा होना चाहिए। फाइनल जीतने के तुरंत बाद मेरी मनीष से बात हुई है, वह काफी खुश है।" मनीष का यह रिकॉर्ड रहा है कि वह जिस भी टूर्नामेंट में जाते हैं, वहां से कोई न कोई मेडल जरूर जीतकर लाते हैं।

पिता ने पुरानी यादें ताजा करते हुए बताया कि मनीष ने टोक्यो पैरालिंपिक  (जापान) में गोल्ड मेडल जीतकर दूसरे देश की धरती पर भारत का राष्ट्रगान बजवाया था। इसके बाद पेरिस पैरालिंपिक 2024 में भी उन्होंने सिल्वर मेडल जीता। पिता ने इस सफलता का श्रेय कबीर पंथ और ईश्वर के आशीर्वाद को दिया। उन्होंने यह भी बताया कि मनीष के अलावा घर के दो अन्य बच्चे भी खेलों में इसी तरह मेडल जीत रहे हैं।

बीमारी और दर्द के बावजूद नहीं मानी हार

इस सिल्वर मेडल के पीछे का संघर्ष बताते हुए पिता ने कहा कि इस चैंपियनशिप से पहले मनीष काफी बीमार पड़ गए थे। एशियाई खेलों से करीब 20 दिन पहले वर्ल्ड चैंपियनशिप थी और उससे 10 दिन पहले मनीष की तबीयत इतनी खराब हो गई थी कि वे प्रैक्टिस तक नहीं कर पाए। उनकी आंखों पर भी इसका असर पड़ा और विजन धुंधला (ब्लर) हो गया था, जिसके कारण उस वक्त उनका प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा।

बाद में आंखों का इलाज कराया गया, लेकिन परेशानियां यहीं खत्म नहीं हुईं। पिता ने बताया, "अभी भी मनीष के कंधे में बहुत ज्यादा सूजन है। दर्द कम करने के लिए उसने नीडलिंग और कपिंग का सहारा लिया है, जिसकी वजह से उसकी गर्दन अभी भी नीली पड़ी हुई है।" इतने दर्द के बावजूद मनीष ने देश के लिए खेलना जारी रखा।