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बीमारी और दर्द को पछाड़कर मनीष नरवाल ने रचा इतिहास, पैरा एशियाई खेलों में भारत के लिए जीता सिल्वर मेडल

Published: Tue, 20 Oct 2026 03:34 PM (IST)

मनीष नरवाल ने पैरा एशियाई खेलों में रजत पदक जीता, जबकि वह टाइफाइड, धुंधली नजर और कंधे की सूजन से ...और पढ़ें

मनीष नरवाल को पैरा एशियाई खेल के शूटिंग में रजत पदक मिला, जागरण।

मनीष नरवाल को पैरा एशियाई खेल के शूटिंग में रजत पदक मिला, जागरण।

HighLights

  1. टाइफाइड और कंधे की सूजन के बावजूद रजत पदक जीता।

  2. कबीरदास की सीख से प्रेरणा लेकर अभ्यास जारी रखा।

  3. कोच राकेश ठाकुर के मार्गदर्शन में देश के लिए पदक जीता।

दीपक पांडेय, फरीदाबाद। पैरा एशियाई खेल के शूटिंग में रजत पदक हासिल करने वाले फरीदाबाद में मनीष नरवाल 20 दिन पहले तक टाइफाइड, धुंधली नजर और कंधे की सूजन से जूझ रहे थे।

कबीरदास में आस्था रखने वाले मनीष नरवाल ने भी हार नहीं मानी। वह भी घर में बनाई गई शूटिंग रेंज में कोच राकेश ठाकुर के मार्गदर्शन में अभ्यास करते रहे।ल जिसका परिणाम उनको पैरा एशियन गेम्म में रजत पदक के रूप में मिला।

मनीष नरवाल के पिता ने बताई सफलता की कहानी

उनके पिता दिलबाग सिंह नरवाल ने दैनिक जागरण के साथ पैरा एशियाई गेम्स से पहले उन संघर्ष भरे 20 दिनों को सांझा किया। जिसमें मनीष और उनके पूरे परिवार ने कबीर के दोहा करत-करत अभ्यास के, जड़मति होत सुजान, रसरी आवत जात है, सिल पर पड़त निसान को अनुसरण किया।

बेटे की जीत पर खुशी जाहिर करते हुए पिता ने कहा, ऐसा होनहार बच्चा हर घर में पैदा होना चाहिए। फाइनल जीतने के तुरंत बाद मेरी मनीष से बात हुई है, वह काफी खुश है।

मनीष का अनोखा रिकॉर्ड

मनीष का यह रिकार्ड रहा है कि वह जिस भी टूर्नामेंट में जाते हैं, वहां से कोई न कोई पदक जरूर जीतकर लाते हैं। सेक्टर-65 में रहने वाले मनीष के घर में खुशी का माहौल है। पदक आने पर स्वजन ने एक दूसरे को मिठाई खिलाकर बधाई दी।

पिता ने कहा कि इस चैंपियनशिप से पहले मनीष काफी बीमार पड़ गए थे। एशियाई खेलों से करीब 20 दिन पहले वर्ल्ड चैंपियनशिप थी और उससे 10 दिन पहले मनीष की तबीयत इतनी खराब हो गई थी कि वह अपना कंधा भी नहीं उठा पा रहे थे।

खेल से पहले धुधला हुआ विजन

उनकी आंखों पर भी इसका असर पड़ा और विजन धुंधला (ब्लर) हो गया था। लेकिन फिर भी मनीष घर में बनाई हुई शूटिंग रेंज में कोच राकेश के मार्गदर्शन में पीड़ा के बीच गुजरकर अभ्यास करते रहे।

पिता ने बताया अभी भी मनीष के कंधे में बहुत ज्यादा सूजन है। दर्द कम करने के लिए उसने नीडलिंग और कपिंग का सहारा लिया है, जिसकी वजह से उसकी गर्दन अभी भी नीली पड़ी हुई है। इतने दर्द के बावजूद मनीष ने देश के लिए खेलकर पदक हासिल किया।

तीसरी बार पैरा एशियन गेम्स में जीता पदक

मनीष नरवाल ने लगातार तीसरी बार पैरा एशियन गेम्स में पदक जीता है। वर्ष 2018 में जकार्ता में आयोजित पैरा एशियन गेम्स में उन्होंने 10 मीटर एयर पिस्टल में स्वर्ण, जबकि 50 मीटर मिश्रित पिस्टल स्पर्धा में रजत पदक जीता था। टोक्यो पैरालंपिक में उन्होंने स्वर्ण और पेरिस पैरालंपिक में रजत पदक जीता था।

मनीष ने अपनी जीत का श्रेय कोच राकेश ठाकुर को दिया। उन्होंने कहा कि कोच ने हमेशा उनका उत्साह बढ़ाया है। प्रतियोगिता के दौरान राकेश ठाकुर जापान में ही मौजूद थे और मनीष का प्रदर्शन देख रहे थे।

छोटा भाई और बहन भी हैं शूटर

मनीष के छोटे भाई शिवा और बहन शिखा नरवाल भी उनसे काफी प्रभावित हैं। मनीष को देखकर दोनों ने भी शूटिंग में करियर बनाने का फैसला किया और आज दोनों अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी हैं। शिवा नरवाल ने वर्ष 2023 के एशियन गेम्स में 10 मीटर एयर पिस्टल के टीम इवेंट में स्वर्ण पदक हासिल किया था। इसी प्रकार शिखा नरवाल भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुकी हैं।

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