हरियाली तीज पर झूले और लोकगीतों से गूंजेंगे गांव, हरियाणा में इस बार तीन दिन की छुट्टी से बढ़ेगा उत्साह
बल्लभगढ़ और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में हरियाली तीज का उत्सव लोकगीतों और झूलों के साथ धूमधाम से मनाया जा ...और पढ़ें

बल्लभगढ़ और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में हरियाली तीज का उत्सव लोकगीतों और झूलों के साथ धूमधाम से मनाया जा रहा है।
HighLights
ग्रामीण महिलाएं लोकगीतों पर झूमती, झूलती, तीज का जश्न मनाती दिखीं।
स्वतंत्रता दिवस और रविवार की छुट्टी ने तीज के उत्साह को बढ़ाया।
शिव-पार्वती के पुनर्मिलन का प्रतीक, प्रकृति की हरियाली का उत्सव।
सुभाष डागर, बल्लभगढ़। हरियाली तीज को लेकर ग्रामीण क्षेत्र में महिला हेरी अम्मा मीठी तै कर दे कोठली, जाएंगे बहना के देश, पपिया बोल्या पीपरी जैसे लोकगीतों पर झुंड में नाचती और झूलती हुई देखी जा सकती हैं। इस बार तीज का उत्सव ग्रामीण क्षेत्र में और भी ज्यादा हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। क्योंकि उसी दिन स्वतंत्रता दिवस की भी छुट्टी है और अगले दिन रविवार का भी अवकाश है।
हरियाली तीज सावन के महीने में शुक्ल पक्ष में तीज को मनाया जाता है। सावन में किसान अपनी फसलों को बोने के बाद आराम से रहते हैं। फसल की चारों तरफ हरियाली ही हरियाली दिखाई देती है। इसलिए सावनी को देख कर किसान और उनके परिवार बहुत ही प्रसन्न होते हैं।
यह महिलाओं का उत्सव है। सावन में जब संपूर्ण प्रकृति हरी ओढ़नी से आच्छादित होती है तो महिलाओं के मन मयूर नृत्य करने लगते हैं। पेड़ों में झूले पड़ जाते हैं। सुहागन स्त्रियों के लिए यह व्रत बहुत महत्व रखता है। आस्था, उमंग, सौंदर्य और प्रेम का यह उत्सव शिव-पार्वती के पुनर्मिलन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है।
चारों ओर हरियाली होने के कारण इसे हरियाली तीज कहते हैं। इस अवसर पर महिलाएं झूला झूलती हैं, लोकगीत गाती हैं और आनंद मनाती हैं। बहनों को हरियाली तीज आने से 10 दिन पहले भाई लेने के लिए उनकी ससुराल जाना शुरू कर देते हैं। हरियाली तीज पर ज्यादातर घरों में बहन आ जाती हैं।
हरियाली तीज को लेकर पृथला गांव में संध्या चौधरी व उनकी सहेली अपनी वेशभूषा में मेरी बहना बोली कोयलिया काली, आई री तीज हरियाली, झूला तो मिलके झूले री बाग में, नीम के पेड़ के नीचे झूला झूल रही थी और वह अपने हरियाणा की ग्रामीण वेशभूषा में नाच रही थी। इस गांव में रक्षाबंधन के तीन दिन बाद बूढ़ी तीज के नाम से हर वर्ष त्योहार मनाया जाता है। इसकी पहले से तैयारी शुरू हो जाती हैं। पुरुषों के मनोरंजन के लिए दंगल लगता है और रागनी भी होती हैं।
हरियाली तीज हमारी ग्रामीण संस्कृति का विशेष त्योहार है। यह बड़े त्योहारों में गिना जाता है। इसे लेकर एक कहावत भी है आई तीज बिखेरगी बीज। इसी से त्योहारों का मौसम शुरू होता है और यह सिलसिला होली तक चलता है। यह त्योहार पूरे उत्साह, उल्लास और खुशी का होता है। पूर्व मुख्यमंत्री चौधरी देवीलाल ने इसकी सरकारी छुट्टी घोषित की थी, जो अब सरकार ने बंद कर दी।
-सविता सारंग, साहूपुराहरियाली तीज का त्योहार सुहागनों के लिए विशेष महत्व रखता है। यह महादेव और मां पार्वती के मिलन का दिन है। इसलिए व्रत भी रखते हैं। सावन में हरियाली होती है, इसलिए ज्यादातर महिला हरे कपड़े भी पहनती हैं। इस दिन हर घर में पकवान कचौड़ी, पकौड़े, पूरी, हलवा, खीर बनाए जाते हैं। घेवर भी घरों में बनाया जाता है। कुछ लोग दुकान से खरीद कर लाते हैं।
-रचना शर्मा, पूर्व सरपंच चंदावली
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सुभाष डागर
