लोक अदालत में हुआ सास-बहू का समझौता, चार साल बाद पोते से मिल सकेगी दादी
फरीदाबाद में एक बुजुर्ग दादी ने लोक अदालत की मदद से चार साल बाद अपने पोते से मिलने का अधिकार ...और पढ़ें

मुकदमा लगभग 4 साल तक अदालत में लंबित रहा, जिस दौरान दादी लगातार पोते से मिलने की गुहार लगाती रहीं। एआई इमेज
HighLights
बुजुर्ग दादी चार साल से पोते से मिलने को तरस रही थी।
लोक अदालत में काउंसिलिंग से सास-बहू में आपसी समझौता हुआ।
अब दादी शर्तों पर पोते से मिल और वीडियो कॉल पर बात कर सकेंगी।
हरेंद्र नागर, फरीदाबाद। एक बुजुर्ग महिला अपने पौत्र से मिलने के लिए चार साल से तड़प रही थी। पति और बेटे को वह पहले ही खो चुकी है। पारिवारिक कलह के कारण अलग हुई बहू और दादी के बीच कोई समझौता हो ही नहीं पा रहा था। अंत में बुजुर्ग महिला लोक अदालत पहुंची। काउंसिलिंग के जरिए सास-बहू में आपसी सहमति बनी। आखिरकार, महिला अब अपने पौत्र से कुछ शर्तों पर मिल सकेगी।
पारिवारिक त्रासदी के बाद शुरू हुआ विवाद
पति और बेटे की मौत के बाद बुजुर्ग महिला के लिए उनका पोता ही जीवन का एकमात्र सहारा था। हालांकि, बेटे के निधन के बाद बहू बच्चे को लेकर अलग रहने चली गई और दादी की पोते से मुलाकात पूरी तरह बंद हो गई।
4 साल तक चला कानूनी संघर्ष
सामाजिक स्तर पर समझौते के प्रयास विफल होने पर दादी ने पोते से मुलाकात के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया। यह मुकदमा लगभग 4 साल तक अदालत में लंबित रहा, जिस दौरान दादी लगातार पोते से मिलने की गुहार लगाती रहीं।
लोक अदालत और काउंसिलिंग
मामला लोक अदालत में पहुंचने पर वकीलों और मध्यस्थों ने दोनों पक्षों की काउंसिलिंग की। उन्हें समझाया गया कि अतीत की कड़वाहट का असर बच्चे और दादी के रिश्ते पर नहीं पड़ना चाहिए। इस बातचीत के बाद बहू का रुख बदला और वह समझौते के लिए तैयार हो गई।
समझौते की मुख्य शर्तें
काउंसिलिंग में यह तय किया गया है कि बहू अब समय-समय पर पोते को उसकी दादी से मिलाती रहेगी। वह दादी को पोते से वीडियो कॉल पर भी बात करने की अनुमति देगी। समझौते में यह भी तय हुआ है कि यदि बहू भविष्य में पुनर्विवाह भी करती है, तब भी पोते और दादी की यह मुलाकात और बातचीत जारी रहेगी।
