सुशील भाटिया, फरीदाबाद

कल-कारखानों की नगरी फरीदाबाद में शाम को जब इंसान घर लौटता है, तो उसे सुकून के पल चाहिए। उसे ऐसे माहौल की तलाश होती है, जहां रह कर दिन भर की थकान को उतार सके। अपने देश-प्रदेश की संस्कृति में घुल मिल कर मन-मस्तिष्क को तरोताजा कर सके। अब औद्योगिक नगरी के पुरुषार्थियों ने अपने पुरुषार्थ से हरियाणा प्रदेश व देश की उन्नति में योगदान दिया, वहीं संगीत गुरु मनमोहन भारद्वाज, डा.अंजू मुंजाल, आर्ट गुरु पिकी गंडोत्रा, रंगमंच के कलाकार और निर्देशक अनिल चावला जैसे लोगों ने कला एवं सांस्कृतिक कला को अपने शहर में न सिर्फ जीवित किया, बल्कि समय के साथ इस विरासत को आगे बढ़ाते हुए अपने हुनर से बच्चों को भी पारंगत कर देश-विदेश में नाम रोशन किया।

सुर-संगीत की साधना में हृदय से तल्लीन डा.अंजू मुंजाल शहर में बच्चों में साज और आवाज के हुनर को तराश कर अपनी काबिलियत से सजा संवार कर नई पहचान दे रही हैं। संगीत की विधा से बच्चों को रूबरू कराने का सफर डा.अंजू मुंजाल ने तीन दशक पूर्व स्वर साधना मंदिर सेक्टर-9 से शुरू किया था और आज भी वो सफर अनवरत उसी शिद्दत से जारी है।

संगीत ने डा.अंजू को पूरे दिल्ली-एनसीआर में इतना सशक्त किया कि उनका चयन अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक आदान-प्रदान योजना के तहत लंदन के लिए हुआ और भारतीय संगीत दूत के रूप में अपनी प्रस्तुति सात समंदर पार देने का गौरव हासिल किया। उनसे प्रशिक्षित गायिका हिमानी कपूर जी-टीवी के विश्व विख्यात गायन शो सारेगामापा में उपविजेता बनी। हिमानी ने विभिन्न फिल्मों के गीत गाए। हिमानी के चयन ने डा.अंजू के अन्य शिष्यों को प्रेरित किया और उसके बाद तजेंद्र सिंह को स्टार प्लस पर प्रसारित संगीत शो सुपर स्टार का महामुकाबला, जीटीवी के सारेगामापा में और इंडिया गाट चैलेंज, सोनी टीवी के इंडियन आइडल में भाग लेने का मौका मिला। डा.अंजू की ही शिष्या चारवी चावला और तनीषा दत्ता को स्टार प्लस चैनल के रियलटी शो द वायस में प्रस्तुति देने का मौका मिला। इस तरह तरह

स्पिक मैके की समन्वयक डा.अंजू मुंजाल की स्वयं की बड़ी उपलब्धि तब सामने आई थी, जब इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम दिल्ली में उन्हें 200 बच्चों के ग्रुप द्वारा गाए गीत को लिखने, कंपोज्ड करने और फिर निर्देशित करने का गौरव हासिल हुआ। तंत्र के सच्चे गण के रूप में डा.अंजू मुंजाल का भारतीय शास्त्रीय संगीत की सेवा करने का यह सिलसिला अनवरत जारी है।

विलुप्त हुई रंगमंचीय रामलीला को जीवित किया श्री श्रद्धा रामलीला कमेटी ने

औद्योगिक नगरी में रंगमंचीय रामलीला का अपना एक अलग समृद्ध इतिहास रहा है। अपने देश में डायरेक्ट टू होम की सिलसिला शुरू हुआ। विविध टीवी चैनलों का बोलबाला रहा, तो यह समृद्ध विरासत इतिहास के पन्नों में सिमटती आई। अपने शहर में एक विजय रामलीला कमेटी को छोड़ कर बाकी स्तरीय रंगमंचीय रामलीला का मंचन बंद हो गया। ऐसे में वक्त में वर्ष 2008 में श्री श्रद्धा रामलीला कमेटी ने सेक्टर-15 में मंचीय रामलीला शुरू की और फिर इस कमेटी के मंच पर प्रस्तुति देने वाले कलाकारों अनिल चावला, कशिश, श्रवण चावला, अजय खरबंदा, योगंधा वशिष्ठ, तान्या, मौनिक, मीशा, विजय कंठा, मोहित वशिष्ठ, कैलाश चावला ने अपने अभिनय का सिक्का ऐसा जमाया कि इस रामलीला कमेटी के कलाकारों को मुंबई में आरके स्टूडियो और दिल्ली में जश्ने-रेख्ता में प्रदर्शन करने का अवसर मिला और जिले का नाम रोशन किया। इस रामलीला कमेटी के कई युवाओं ने अपने अभिनय क्षमता की बदौलत स्वावलंबन की ओर कदम बढ़ाए।

नुपूर नाद संस्थान ने दिखाई स्वावलंबन की राह

तीन दशक पूर्व स्थापित नुपूर नाद संस्थान के संस्थापक मनमोहन भारद्वाज से शास्त्रीय संगीत की तालीम हासिल कर 250 से अधिक युवाओं ने स्वावलंबन की राह पकड़ी, जो आज दिल्ली-एनसीआर के विभिन्न शहरों व विभिन्न प्रदेशों में स्थित स्कूल-कालेजों संगीत शिक्षक के रूप में सेवाएं दे रहे हैं और शास्त्रीय संगीत की विधा को आगे बढ़ा रहे हैं। इनमें दर्जनों ऐसे प्रतिभाशाली गायक व संगीतज्ञ हैं, जो राष्ट्रीय स्तर पर संगीत प्रतियोगिता में जीत कर अवार्ड हासिल कर चुके हैं। उनके सिखाए बच्चे द वायस आफ इंडिया, इंडियन आइडल, सारेगामापा सहित अन्य संगीत प्रतियोगिताओं में धमक बिखेर चुके हैं। ऐसे सांस्कृतिक दूतों से अपनी नगरी और समृद्ध हो रही है।

Edited By: Jagran