Faridabad: अरावली वन क्षेत्र में अवैध निर्माण पर वन विभाग ने फिर शुरू की कार्रवाई, मोबाइल टावर भी हटाया
अरावली वन क्षेत्र में वन विभाग ने अवैध निर्माण के खिलाफ फिर कार्रवाई की है। इस बार एक मोबाइल टावर को बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया गया। वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि अवैध निर्माण को लेकर सख्ती जारी रहेगी और किसी भी उल्लंघन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

अरावली वन क्षेत्र में मोबाइल टावर को गिराते हुए अर्थमूवर।
जागरण संवाददाता, फरीदाबाद। अरावली वन क्षेत्र में अतिक्रमण और अवैध निर्माण के खिलाफ वन विभाग ने एक बार फिर कार्रवाई शुरू कर दी है। विभाग की ओर से मोबाइल टावर सहित टीन शेड तथा अन्य अतिक्रमण का पाली क्षेत्र से सफाया किया गया। सूरजकुंड रोड पर मैरिज गार्डन को जाने वाले रास्ते (पीएलपीए के अंतर्गत आने वाले) को भी खोद दिया गया है। जिससे आवागमन रूक गया है।
करीब साढ़े तीन महीने बाद एक बार फिर अरावली वन क्षेत्र में अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई शुरू हो गई है। वन क्षेत्र से सबसे पहले मोबाइल टावरों को हटाया जाएगा। पाली एरिया से दस मोबाइल टावरों को नोटिफाई किया गया है। यह वन क्षेत्र में लगे हुए हैं। मोबाइल टावर कंपनियों को नोटिस दिया जाएगा।
अधिकारियों का कहना है कि मोबाइल टावर अवैध तरीके से वन क्षेत्र में लगाए गए हैं, यदि कंपनियां स्वयं मोबाइल टावर नहीं हटाएगी तो विभाग की ओर से गिरा दिया जाएगा। मोबाइल टावरों से जानवरों को भी नुकसान पहुंचता है।
रास्ते की कर दी खुदाई
शुक्रवार को वन विभाग की ओर से सूरजकुंड और आस-पास के हिस्सों में वन क्षेत्र में बने मैरिज गार्डेन, बैंक्वेट हाल और व्यवसायिक इकाइयों को मुख्य सड़क से जोड़ने वाली रोड को विभाग की टीम ने खोद दिया है। जिससे आवागमन बंद हो गया है।
इसके साथ ही विभाग तोड़फोड़ की कार्रवाई के बाद दोबारा मरम्मत कर मैरिज गार्डेन में शादी व अन्य समारोह आयोजित करने वाले संचालकों पर भी नोटिस देकर दोबारा कार्रवाई की तैयारी में हैं। विभाग की टीमों द्वारा वन क्षेत्र में निरीक्षण भी किया जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार अरावली वन क्षेत्र में अवैध निर्माण और अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई की जा रहा रही है। बृहस्पतिवार को मोबाइल टावर और टीन शेड हटाए गए। शुक्रवार को भी कार्रवाई जारी रही। वन क्षेत्र में बने मैरिज गार्डेन और बैंक्वेट हाल की ओर जाने वाली सड़कों को खोद दिया गया है। यह कार्रवाई अभी जारी रहेगी।
सुरेंद्र डांगी, जिला वन अधिकारी।

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