जागरण संवाददाता, फरीदाबाद : नगर निगम में 200 करोड़ रुपये के घोटाले मामले में विजिलेंस ने मुख्य अभियंता डीआर भास्कर और सतवीर को प्रोडक्शन वारंट पर जेल से निकलवाकर अदालत से दो दिन के रिमांड पर लिया है। विजिलेंस दोनों को मुख्य अभियंता रमन शर्मा और जेई दीपक के सामने बिठाकर पूछताछ करेगी। रमन और दीपक तीन दिन की रिमांड पर हैं। जानकारी के अनुसार दीपक नगर निगम में ट्यूबवेल आपरेटर के पद पर था। साल 2017 से 2019 तक उसे जान-बूझकर जेई का चार्ज दिया गया। जेई के तौर पर वह फाइलों को आगे खिसकाता रहा। जेई फाइनेंस ब्रांच से फाइलें भी पास कराता था। निगम के हिसाब से एक ट्यूबवेल को जेई को चार्ज नहीं दिया जा सकता। अधिकारियों को इस बारे में पता था, मगर साजिश के तहत उन्होंने चुप्पी साध ली।

बता दें कि यह घोटाला मई 2020 में उजागर हुआ था। फरीदाबाद नगर निगम के तत्कालीन चार पार्षदों दीपक चौधरी, दीपक यादव, सुरेंद्र अग्रवाल व महेंद्र सरपंच ने तत्कालीन निगम आयुक्त को शिकायत दी थी कि निगम के लेखा विभाग ने ठेकेदार सतवीर की विभिन्न फर्मो को बिना काम किए भुगतान कर दिया है। निगम आयुक्त ने अपने स्तर पर मामले की जांच कराई। ठेकेदार को भुगतान में अनियमितताएं पाए जाने पर उन्होंने विजिलेंस से जांच की सिफारिश की। साल 2020 से विजिलेंस इस मामले की जांच कर रही थी, पर यह मामला तब सुर्खियों में ज्यादा आया, जब एनआइटी के विधायक नीरज शर्मा ने विधानसभा सत्र में संकल्प लेते हुए कहा था कि वह तब तक सिले हुए कपड़े व पैरों में जूते नहीं पहनेंगे, जब तक मुख्य आरोपित गिरफ्तार नहीं होते। इसके बाद सरकार ने हरकत में आई और आरोपितों की गिरफ्तारी होनी शुरू हुई। इस संबंध में विजिलेंस ने तीन मुकदमे दर्ज किए हैं। अभी और भी मुकदमे इस घोटाले में दर्ज हो सकते हैं।

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