जागरण संवाददाता, नई दिल्ली : दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (डूटा) के बृहस्पतिवार को हुए चुनाव में वामपंथियों ने परचम लहराया है।

कुल वोटिंग हुई

डूटा चुनाव में 6475 शिक्षकों ने मतदान किया, जोकि कुल मतदाताओं का 72.8 फीसद है।

डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट (डीटीएफ) की उम्मीदवार प्रो.नंदिता नारायण ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी प्रो.अश्वनी शंकर को बड़े अंतराल से हराकर डूटा अध्यक्ष पद अपने नाम कर लिया है। अश्वनी शंकर अध्यक्ष पद के लिए इंटरनेशनल टीचर्स कांग्रेस-एकेडमिक फॉर एक्शन एंड डेवलपमेंट (इनटेक-एएडी) के संयुक्त उम्मीदवार थे। प्रो. नंदिता नारायण को 2705 मत मिले। जबकि अश्वनी शंकर 1919 मतों के साथ दूसरे स्थान पर रहे। वहीं, नेशनल डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट की तरफ से अध्यक्ष पद के उम्मीदवार डॉ.प्रमोद सी शर्मा तीसरे स्थान पर रहे। उन्हें 818 मत मिले। अध्यक्ष पद के चुनाव में चौथे स्थान पर रहे एकेडमिक फॉर एक्शन एंड डेवलपमेंट एएडी के उम्मीदवार डॉक्टर शिबा सी पांडा को 561 मत मिले। नंदिता नारायण सेंट स्टीफन कॉलेज के गणित विभाग में सहायक प्रोफेसर हैं।

वामपंथी विचारधारा के समर्थक शिक्षकों का कहना है कि यह दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन के मनमाने व अड़ियल रवैये के खिलाफ जीत है। शिक्षकों ने दिल्ली विश्वविद्यालय और कांग्रेस सरकार की नीतियों के खिलाफ मतदान कर अपनी नाराजगी जाहिर की है। यदि विश्वविद्यालय प्रशासन ने अपनी नीतियों में बदलाव नहीं किया तो आने वाले विधानसभा चुनाव में भी शिक्षक समाज कांग्रेस को हराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। विश्वविद्यालय प्रशासन ने अध्यक्ष पद के लिए अश्वनी शंकर को जीताने की कोशिश में पूरी ताकत झौंक दी थी, लेकिन शिक्षकों ने विवि प्रशासन की नीतियों के खिलाफ मतदान किया।

कार्यकारिणी में भी की जीत दर्ज

डूटा चुनाव में डीटीएफ की तरफ से कार्यकारिणी का चुनाव लड़ रहे महाराजा अग्रसेन कॉलेज में इतिहास विभाग के सहायक प्रोफेसर भूपेंद्र चौधरी, राजधानी कॉलेज में हिंदी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर देव कुमार, एसजीटीबी खॉलसा कॉलेज में अंग्रेजी विभाग के सहायक प्रोफेसर सैकत घोष और आर्ट फैकल्टी के जर्मन और रोमन स्टडीज विभाग की प्रोफेसर विजया वेंकटरमण ने जीत हासिल की है।

कार्यकारिणी में अन्य संगठन

डूटा कार्यकारिणी के लिए चुन गए 15 सदस्यों में डीटीएफ के चार और बाकी अन्य संगठनों ने उम्मीदवार शामिल हैं। एएडी की तरफ से सीएस रावत, सुरेंद्र कुमार, चीमा दास, संजय कुमार शर्मा ने जीत हासिल की है। इंटेक के अनिता घोष, प्रदीप कुमार, मणिभूषण और विनय कुमार सदस्य पद के लिए विजयी रहे। वहीं, यूटीएफ से संदीप कुमार, एनडीटीएफ से सुरेंद्र कुमार और समाजवादी शिक्षक मंच से हरिश खन्ना ने भी कार्यकारिणी के सदस्य पद पर जीत दर्ज की है।

डीयू की नीतियों के खिलाफ मतदान

यह लोकतांत्रिक पद्धति की जीत है। चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम को शिक्षकों की सहमति के बिना लागू करना और जबरदस्ती सेमेस्टर सिस्टम थोपने से शिक्षकों में काफी नाराजगी थी। यही कारण रहा की शिक्षक बड़ी संख्या में मतदान करने के लिए आए। डीयू की नीतियों के खिलाफ मतदान कर शिक्षकों ने प्रशासन को अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करने का संदेश दिया है।

-डूटा अध्यक्ष पद पर विजयी रही सहायक प्रोफेसर नंदिता नारायण,

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