भिवानी की 24 कॉलोनियां कब होंगी वैध? 8 साल में 10वीं बार आपत्तियों के साथ लौटी फाइल, गूगल मैप बना वजह
भिवानी की 24 अनधिकृत कॉलोनियों को वैध करने की प्रक्रिया एक बार फिर अटक गई है, निदेशालय ने नगर परिषद की फाइल पर आपत्तियां लगाकर वापस भेज दी है।

24 कॉलोनियों की वैधता फिर अटकी, आठ साल में दसवीं बार आपत्तियों के साथ लौटी फाइल।
HighLights
निदेशालय ने 24 अनधिकृत कॉलोनियों की वैधता फाइल वापस भेजी
गूगल मैप और अधूरे दस्तावेज बने आपत्तियों का मुख्य कारण
निवासी मूलभूत सुविधाओं और संपत्ति पंजीकरण के लिए कर रहे इंतजार
नवनीत शर्मा, भिवानी। शहर के चारों ओर करीब 400 एकड़ में बसी 24 अनधिकृत कॉलोनियों को वैध कराने और शहर के दायरे में शामिल करने की प्रक्रिया एक बार फिर अटक गई है। शहरी स्थानीय निकाय विभाग के निदेशालय ने नगर परिषद की ओर से भेजी गई फाइल पर विभिन्न आपत्तियां लगाकर वापस भेज दिया है।
कहीं, वर्ष 2022 के गूगल मैप में कालोनी का अस्तित्व नहीं मिलने तो कहीं जरूरी दस्तावेज और रिकॉर्ड पूरे नहीं होने पर आपत्ति दर्ज की गई है। नगर परिषद पिछले करीब आठ वर्षों में इस प्रस्ताव को कई बार निदेशालय भेज चुकी है।
परिषद की ओर से आपत्तियों का निस्तारण कर फाइल दोबारा भेजी जा रही है, लेकिन हर बार नई आपत्तियां प्रक्रिया को लंबा खींच रही हैं। दूसरी ओर अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले लोग सड़क, सीवर, पानी और अन्य मूलभूत सुविधाओं का इंतजार कर रहे हैं।
दस्तावेज और गूगल मैप की आपत्तियां बनीं बड़ी बाधा
निदेशालय की ओर से फाइल की जांच के दौरान अलग-अलग बिंदुओं पर आपत्तियां लगाई गई हैं। कुछ कॉलोनियों को लेकर वर्ष 2022 के गूगल मैप में स्थिति स्पष्ट नहीं होने की बात सामने आई है। वहीं कुछ स्थानों के दस्तावेज पूरे नहीं पाए गए। नगर परिषद को इन आपत्तियों का रिकॉर्ड जुटाकर जवाब देना पड़ रहा है।
इसके बाद संशोधित प्रस्ताव दोबारा निदेशालय भेजा जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में समय लग रहा है। परिषद के स्तर पर फाइल तैयार करने से लेकर दस्तावेज जुटाने और आपत्तियों का जवाब देने तक कई चरण हैं। यही कारण है कि कॉलोनियों को वैध कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ने के बजाय बार-बार पुराने चरण पर लौट आती है।
2018 के बाद एक भी कॉलोनी नहीं हुई वैध
भिवानी शहर के लिए अनधिकृत कॉलोनियों का नियमितीकरण लंबे समय से बड़ा मुद्दा बना हुआ है। वर्ष 2018 में भी शहर का दायरा नहीं बढ़ाया गया था। इसके बाद भी शहर के बाहरी हिस्सों में कृषि भूमि पर प्लाटिंग का विस्तार होता रहा।
नगर परिषद करीब आठ वर्षों में फाइल को निदेशालय स्तर तक करीब 10 बार भेज चुकी है। हर बार किसी न किसी आपत्ति के चलते फाइल वापस आती रही। इस कारण वर्ष 2018 के बाद भिवानी में एक भी कालोनी वैध नहीं हो सकी। उधर, इन कॉलोनियों में प्लाट खरीदकर मकान बनाने वाले लोग पंजीकरण और मूलभूत सुविधाओं के लिए नियमितीकरण की प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार कर रहे हैं।
कृषि भूमि पर प्लाटिंग से बढ़ी परेशानी
शहर के विभिन्न हिस्सों में अनधिकृत कॉलोनियों का विस्तार कृषि भूमि तक हो चुका है। तोशाम रोड, टीआइटी खेल ग्राउंड, जागृति कालोनी और जुई नहर के पास अनधिकृत कालोनियां विकसित हुई हैं। बापोड़ा रोड पर भी प्लाट बिक्री की बात सामने आई है।
हांसी रोड और तिगड़ाना मोड़ के आसपास कृषि भूमि पर प्लाटिंग की गई है। राजपुरा माइनर के पास भी कृषि भूमि पर प्लाट काटकर बेचने की जानकारी है। तिगड़ाना मोड़ और रिंग रोड क्षेत्र में भी प्लाटिंग हुई है। जिला कारागार के आसपास प्लाटों की नींव भरी गई है। कोंट रोड पर गांवों की सीमा तक और ढाणा रोड पर भी अवैध प्लाटिंग का विस्तार बताया जा रहा है।
सुविधाओं के इंतजार में लोग, पंजीकरण पर भी असर
अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले परिवारों के सामने सबसे बड़ी परेशानी मूलभूत सुविधाओं की है। कई जगह सड़क, सीवर और पेयजल जैसी सुविधाएं पूरी तरह उपलब्ध नहीं हैं। कॉलोनियों के नियमितीकरण की प्रक्रिया पूरी नहीं होने से लोगों को अपने भूखंड और मकान से जुड़े दस्तावेजों को लेकर भी परेशानी उठानी पड़ रही है।
भूमि पंजीकरण बंद होने के कारण कुछ परिवार एग्रीमेंट के आधार पर मकान बनाकर सुविधाओं का इंतजार कर रहे हैं। वहीं बिना पंजीकरण के कालोनाइजरों ने कृषि भूमि पर प्लाट काटकर बेचने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। अधिकृत कॉलोनियों के आसपास खेतों में भी तेजी से प्लाटिंग होने की बात सामने आई है।
आपत्तियों के निस्तारण के बाद फिर भेजी जाएगी फाइल
नगर परिषद की ओर से निदेशालय से वापस आई फाइल में लगाई गई आपत्तियों का निस्तारण किया जा रहा है। संबंधित दस्तावेज और रिकॉर्ड जुटाकर प्रस्ताव को फिर से भेजने की प्रक्रिया चल रही है। परिषद के लिए सबसे बड़ी चुनौती सभी कॉलोनियों से जुड़े रिकॉर्ड को नए नियमों के अनुसार पूरा करना है।
जब तक दस्तावेज और अन्य तकनीकी कमियां दूर नहीं होतीं, तब तक प्रस्ताव को मंजूरी मिलना मुश्किल है। ऐसे में 24 कॉलोनियों में रहने वाले हजारों परिवारों की निगाहें नियमितीकरण की प्रक्रिया पर टिकी हैं। कॉलोनियों के वैध होने से जहां लोगों को सुविधाएं मिलने की उम्मीद है, वहीं शहर के विस्तार का रास्ता भी साफ हो सकेगा।
निदेशालय में अनधिकृत कॉलोनियों को नियमितीकरण करने के लिए फाइल भेज रखी है। फाइल में जो भी त्रुटियां आई होगी उन्हें दुरस्त कर दिया जाएगा। हालांकि अभी फाइल में आब्जेक्शन का मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। - भवानी प्रताप सिंह, चेयरपर्सन प्रतिनिधि, नगर परिषद।
