रोजाना 2000 दीये बना रहा हरियाणा का ये कुम्हार, दीपावली पर बढ़ी मांग
दीपावली नजदीक आने पर तोशाम के कुंभकार परिवार मिट्टी के दीये बनाने में जुटे हैं, जहां चीनी दीयों के प्रति मोहभंग होने से पारंपरिक दीयों की मांग बढ़ी है।
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दीपावली पर मिट्टी के दीयों की बढ़ी मांग।
HighLights
दीपावली के लिए मिट्टी के दीयों की मांग बढ़ी।
तोशाम के रामचंद्र प्रजापत रोजाना 2000 दीये बनाते हैं।
आवंटित भूमि का कब्जा न मिलने से कुंभकार परेशान।
संवाद सहयोगी, तोशाम। दीपावली पर्व नजदीक आते ही कुंभकार परिवारों ने मिट्टी के दीये बनाने और उनका स्टाक तैयार करने का काम तेज कर दिया है। बदलते दौर में डिजाइनदार दीयों की बढ़ती मांग के बीच मिट्टी के पारंपरिक दीयों की चमक भी बरकरार है। चाइनीज दीयों से लोगों का मोहभंग होने के चलते मिट्टी के दीयों की मांग बढ़ी है। ऐसे में कुंभकार परिवार दिन-रात मेहनत कर घरों को रोशन करने की तैयारी में जुटे हैं।
तोशाम निवासी 76 वर्षीय रामचंद्र प्रजापत पिछले 52 साल से मिट्टी के दीये बनाने का काम कर रहे हैं। वह अपने परिवार के साथ रोजाना करीब दो हजार दीये तैयार कर रहे हैं। दीपावली के लिए वह दीयों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। दीयों के साथ-साथ मिट्टी के बर्तन भी तैयार किए जा रहे हैं।
रामचंद्र प्रजापत ने बताया कि दीपावली का एक सीजन खत्म होते ही अगले साल की तैयारी शुरू कर देते हैं। सालभर अपने नियमित कारोबार के साथ दीयों का पर्याप्त स्टाक तैयार किया जाता है, ताकि त्योहार के समय मांग को पूरा किया जा सके। अब लोग पारंपरिक दीयों के साथ अलग-अलग डिजाइन वाले मिट्टी के दीपक भी पसंद कर रहे हैं।
जमीन मिलने के बाद भी नहीं मिला कब्जा
रामचंद्र प्रजापत ने बताया कि हरियाणा सरकार की ओर से आवा पकाने के लिए दो एकड़ जमीन आवंटित की गई थी, लेकिन एक साल बीतने के बावजूद उन्हें जमीन का कब्जा नहीं मिला है। इससे कुंभकार परिवार को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से जल्द जमीन का कब्जा दिलाने और मिट्टी के बर्तन व दीये बनाने के काम को आसान करने के लिए चाक मशीन उपलब्ध करवाने की मांग की है।
