संवाद सहयोगी, बाढड़ा:

गांव जगरामबास में भूमि विवाद के चलते हुए सोमबीर हत्याकांड संबंधी शिकायत पीएमओ में पहुंचने के बाद पुलिस प्रशासन हरकत में आया है। जींद के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ने बाढड़ा पुलिस स्टेशन व गांव जगरामबास में पहुंच कर दोनों पक्षों की गोपनीय सुनवाई की और घटनास्थल पर जाकर बयान दर्ज किए। इस दौरान प्रशासन ने दोनों पक्षों के अलावा अन्य ग्रामीणों से भी जांच में शामिल होने की अपील करते हुए किसी तरह के तथ्य पेश करने की बात कही थी लेकिन कोई भी ग्रामीण जांच में शामिल होने नहीं पहुंचा। पुलिस महानिदेशक कार्यालय के आदेश पर जींद के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक जय¨सह शेखावत ने बाढड़ा पुलिस स्टेशन में दोनों पक्षों की गोपनीय सुनवाई की। पहले पक्ष कमल ¨सह से पूरी घटना की जानकारी ली। जिस पर उसने आरोप लगाया कि वह खेत में जा रहे थे। उन पर कुछ लोगों ने हमला कर दिया। जिससे उनकों बचाव करना पड़ा। दूसरे पक्ष द्वारा वहां नहीं पहुंचने पर टीम गांव जगरामबास के घटनास्थल पर पहुंची। जिस पर दूसरे पक्ष की तरफ से जांच समिति के समक्ष पेश हुई मृतक सोमबीर की विधवा दर्शना ने बताया कि 14 अक्टूबर को उनके पति सोमबीर ¨सह की सरेआम गोलियां चलाकर निर्मम हत्या कर दी गई थी। लेकिन मामले को दर्ज कर दोषियों के खिलाफ कार्यवाही करने की बजाए पुलिस ने कोई कदम नहीं उठाया। पुलिस एक ही प्राथमिकी के आधार पर दोनों पक्षों की जांच का हवाला दे रही है जो उनके परिवार के साथ अन्याय है।

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पीड़िता का आरोप, नहीं मिल रहा न्याय

पीड़िता ने घटना के तीसरे ही दिन पुलिस अधीक्षक दादरी व समय बीतने के 15 दिन बाद एक नवंबर को आइजी रोहतक से मुलाकात कर सारे घटनाक्रम से अवगत करवाया और न्याय की गुहार लगाई थी। जिस पर आईजी संदीप खिरवार ने दादरी पुलिस अधीक्षक को तत्काल प्रभाव से हत्याकांड मामले की विशेष जांच शुरू कर पीड़ित पक्ष को न्याय दिलवाने का आदेश दिया था। लेकिन ये आदेश भी कागजों तक सीमित रहे। रोहतक के मंडलायुक्त के आदेश पर बाढड़ा के एसडीएम मनीष फौगाट भी दोनों पक्षों की गोपनीय सुनवाई कर रिपोर्ट को सील बंद तौर पर आला अधिकारियों के पास भेज चुके हैं।

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पीएमओ से लगाई थी गुहार

गांव जगरामबास निवासी सोमबीर हत्याकांड में उनकी विधवा दर्शना द्वारा सीएम कार्यालय, डीजीपी हरियाणा व आइजी रोहतक समेत विभाग के वरिष्ठ अधिकारी के आदेश के बावजूद पुलिस के मौजूदा प्राथमिकी में किसी तरह के फेरबदल करने से साफ इंकार करने व जांच के नाम पर कोई आगामी कदम नहीं उठाने पर पीड़ित पक्ष ने पीएमओ से न्याय की गुहार लगाई। पीएमओ कार्यालय में शिकायत पहुंचते ही केन्द्र व प्रदेश सरकार का गृह मंत्रालय हरकत में आया और मामले में प्रशासन पर दबाव बढ़ा। प्रदेश के पुलिस महानिदेशक ने जींद के एएसपी को पूरी जांच करने के बाद संबंधित रिपोर्ट तैयार करने का आदेश दिया। एएसपी ने पुलिस उपाधीक्षक ग्राम पंचायत व अन्य घटना से संबंधित सभी पक्षों को अपने स्तर पर कोई भी जानकारी लिखित, मौखिक, वीडियो सामग्री पेश करने की अपील की। लेकिन गांव में दोनों पक्षों में विवाद होने की संभावना पर अंतिम समय में दोनों ही पक्षों को पुलिस स्टेशन पहुंचने का आदेश दिया गया। लेकिन एक ही पक्ष पहुंचा तो एएसपी ने गांव पहुंच कर फरियादी दर्शना से मुलाकात की और करीब तीन घंटे तक पूछताछ की।

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पुरानी रंजिश के चलते हत्या का आरोप

मृतक सोमवीर की पत्नी दर्शना देवी ने बताया कि दूसरे पक्ष के लोग एक आरटीआइ के कारण उनसे पुरानी रंजिश रखते हैं। इसी कारण उनके पति की हत्या की है। उसने बताया कि 14 अक्टूबर को वह और उसका पति सोमबीर ¨सह अपने खेत में नरमा एकत्रित कर रहे थे उसी समय दो व्यक्तियों के बीच भूमि जुताई को लेकर झगड़ा हो गया। बीच बचाव करने गए उनके पति सोमबीर को एक व्यक्ति ने अपनी लाइसेंसी बंदूक से तीन से चार गोलियां मारी। जिससे वह बुरी तरह घायल हो गया और उपचार दौरान चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। उन्होंने कहा कि उनके ससुर की पहले ही मौत हो चुकी है। अब पति की मौत के बाद वह और उनकी सास के अलावा छोटे-छोटे दो बच्चों के साथ वे दहशत में जी रहे हैं। पुलिस की मिलीभगत के चलते हत्याकांड के आरोपित खुले घूम रहे हैं। उन्होंने बताया कि पुलिस ने गोली का शिकार हुए किसान सोमबीर ¨सह की हत्या का मामला अब तक दर्ज नहीं किया है।

Posted By: Jagran

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