सचिन गुप्ता, चरखी दादरी :

देहरादून स्थित भारतीय सैन्य एकेडमी में डेढ़ वर्ष का कठोर व अनुशासित प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद शनिवार को 382 कैडेट्स भारतीय सेना में अधिकारी बन गए। भारतीय सेना में अधिकारी बनने वाले इन कैडेट्स में तीन युवा दादरी जिले के रहने वाले है। जिसमें दादरी रोडवेज डिपो के महाप्रबंधक धनराज कुंडू के पुत्र विक्रम कुंडू, गांव पैंतावास खुर्द निवासी प्रवक्ता रमेश सांगवान के पुत्र हिमांशु सांगवान तथा गांव छपार निवासी स्व. सुरेंद्रपाल के पुत्र नवदीप सांगवान शामिल है। शनिवार को देहरादून स्थित भारतीय सैन्य एकेडमी में पासिग आउट परेड के दौरान तीनों युवाओं के परिजन भी मौजूद थे। कैडेट्स द्वारा परेड पूरी करते ही परिजन भी खुशी से झूम उठे। उल्लेखनीय है कि जिले के ग्रामीण परिवेश से काफी संख्या में युवा भारतीय सेना से जुड़े हुए है। इसके साथ ही हर वर्ष भारतीय सैन्य एकेडमी द्वारा आयोजित की जाने वाली पासिग आउट परेड के बाद काफी संख्या में युवा भारतीय सेना में अधिकारी के रूप में चुने जाते है।

दोस्तों से बातें सुन आर्मी में शामिल होने की ठानी : विक्रम

दादरी रोडवेज डिपो के महाप्रबंधक धनराज कुंडू का पुत्र विक्रम कुंडू शनिवार को भारतीय सैन्य एकेडमी में प्रशिक्षण पूरा कर लेफ्टिनेंट बन गया। विक्रम कुंडू ने दैनिक जागरण से बात करते हुए बताया कि वर्ष 2015 में बीटेक की पढ़ाई पूरी कर वह गुरुग्राम में ही एक निजी कंपनी में जॉब करने लगा था। लेकिन उसके कुछ दोस्त इंडियन आर्मी में भर्ती हो गए थे। जब वह दोस्तों से आर्मी के बारे में सुनता था तो उसके मन में भी आर्मी में शामिल होने का जुनून पैदा हुआ। ऐसे में उसने निजी कंपनी में चल रही जॉब के साथ ही एसएसबी, सीडीएस के लिए तैयारी शुरू कर दी। जुनून व कड़ी मेहनत के बल पर सीडीएस की परीक्षा पास की और जनवरी 2018 में आइएमए देहरादून में उसका प्रशिक्षण शुरू हुआ। विक्रम को गढ़वाल राइफल में कमीशन प्राप्त हुआ है।

विक्रम ने 11वीं कक्षा तक की पढ़ाई रोहतक के डीएवी स्कूल से तथा 12वीं कक्षा रोहतक के खेड़ी महम स्थित एचडी स्कूल से उत्तीर्ण की। उसके बाद उसने गुरुग्राम के आइटीएम कालेज से बीटेक की डिग्री प्राप्त की। विक्रम कुंडू की माता अनीता कुंडू वर्तमान में गुरुग्राम में बतौर अध्यापिका कार्यरत है। शनिवार को पासिग आउट परेड के दौरान विक्रम के दादा, माता-पिता व बहन भी उपस्थित रहे। शुरू से सपना था सेना में अधिकारी बनना : हिमांशु

जिले के गांव पैंतावास खुर्द निवासी हिमांशु सांगवान ने भी शनिवार को भारतीय सैन्य एकेडमी देहरादून की पासिग आउट परेड में हिस्सा लिया। जिसके बाद हिमांशु भी सेना में अधिकारी बन गया। हिमांशु सांगवान ने दैनिक जागरण से बात करते हुए बताया कि उसका शुरू से ही सपना था कि वह भारतीय सेना में अधिकारी बन कर देश की सेवा करे। इसी सपने को सच करने के लिए वह मेहनत करता रहा। 23 वर्षीय हिमांशु ने कहा कि इस सपने को हकीकत में बदलने में उसके ताऊ दादरी सेशन कोर्ट में बतौर सुप्रीटेंडेंट कार्यरत सुरेंद्र सांगवान का अहम रोल है। हिमांशु ने बताया कि 12वीं कक्षा के बाद उसने एनडीए टेस्ट भी दिया था। लेकिन साक्षात्कार में वह बाहर हो गया। उसके बावजूद उसने हिम्मत नहीं हारी। बीटेक करने के बाद वर्ष 2017 में उसका चयन भारतीय सैन्य एकेडमी में हो गया था। हिमांशु भारतीय सेना में बतौर पायलट कमीशनड अधिकारी बना है।

बचपन से बड़ा अधिकारी बनने की थी इच्छा : नवदीप

जिले के गांव छपार निवासी नवदीप सांगवान भी शनिवार को भारतीय सैन्य एकेडमी में पासिग आउट परेड पूरी करने के बाद भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बन गया। दैनिक जागरण से बात करते हुए नवदीप सांगवान ने बताया कि बचपन से ही उसकी इच्छा थी कि वह कोई बड़ा अधिकारी बनें। अपनी इस इच्छा को पूरी करने के जुनून के साथ ही उसने बारहवीं तक की पढ़ाई गांव बरसाना मोड़ स्थित एसईडी स्कूल से की। उसके बाद रोहतक के पंडित नेकीराम कालेज से बीएससी व एमएससी की पढ़ाई की। उसके बाद सीडीएस के माध्यम से भारतीय सैन्य एकेडमी में प्रवेश प्राप्त किया। नवदीप ने बताया कि क्लास वन आफिसर बनने की उसकी इच्छा को पूरी करने के लिए उसके जीजा गांव धनाना निवासी लेफ्टिनेंट कर्नल सुनील घनघस ने पूरा सपोर्ट किया। उन्होंने ही समय-समय पर उसका मार्ग दर्शन किया। जिसकी बदौलत आज वह भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बन गया। शनिवार को पासिग आउट परेड के दौरान उनके परिवार के सदस्य भी मौजूद रहे।

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Posted By: Jagran

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