भिवानी,[बलवान शर्मा]। लाख प्रयासों और जागरुकता अभियान के बावजूद अभी भी काफी ऐसे किसान हैं जो पराली जलाने से बाज नहीं आ रहे हैं। दूसरी ओर, कुछ लाेग ऐसे हैं जो पराली से लाखों कमा कर मालामाल हो रहे हैं। अाप भी पराली का सदुपयोग कर खूब कमाई कर सकते हैं। भिवानी जिले के कुछ किसान ऐसा ही का रहे हैं। ये लोग पराली से टाइल्स, वॉशबेशन, शौचालय शीट, क्रॉकरी के सेफ्टी कवर बनाकर बेच रहे हैं।

फसल अवशेष जलाने की बजाय बना रहे टाइल्स, वॉशबेशन, शौचालय शीट, क्रॉकरी के सेफ्टी कवर

पराली का इस तरह सदुपयोग कर ये लोग पर्यावरण को प्रदूषण होने से बचाने के साथ दूसरे किसानों को बेहतर कमाई की राह भी दिखा रहे हैं। ये हैं भिवानी के कितलाना निवासी किसान पवन व उनके सहयोगी। ये लो इससे टाइल्स, वॉशबेशन, शौचालय शीट, क्रॉकरी के सेफ्टी कवर बनाकर बेच रहे हैं। इसकी देश-विदेश में खूब मांग भी है।

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इसके लिए उन्होंने फतेहाबाद, रतिया और पंजाब में तीन प्लांट लगाए हुए हैं। साथ ही कितलाना में प्लांट लगाने की तैयारी है। प्लांट लगाने में करीब 40 से 50 लाख रुपये खर्चा आया है। ये सेफ्टी कवर अब कुछ और देशों में भी निर्यात होने लगे हैं। इस तरह वे खुद की कमाई के संग क्षेत्र के लोगों के लिए रोजगार को सृजन भी कर रहे हैं।

पर्यावरण प्रदूषित होने से बच रहा तो साथ ही सुधर रही किसानों की आर्थिक स्थिति

पवन बताते हैं कि वे किसानों से सीधे पराली व तूड़ी खरीद कर प्लांट में लाते हैं। किसानों को भी इससे फायदा होता है, क्योंकि उन्हें मार्केट रेट से ज्यादा दाम मिल जाते हैं। पराली की अच्छी क्वालिटी से कई अच्छे सेफ्टी उपकरण बन जाते हैं। यह हल्की होने की वजह से ट्रांसपोर्टेशन में भी आसान होती है।

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उन्‍हाेने बताया कि उनके द्वारा बनाए गए सेफ्टी उपकरण दिल्ली, जयपुर व पहाड़ी इलाकों में जा रहे हैं। साथ ही एक्सपोर्टर उनसे यह सामान लेकर विदेशों में भी भेज रहे हैं। फर्श पर लगने वाली टाइलों, शौचालय सीट की सुरक्षा में पराली उपयोगी रहती है।

2012 में लगाया था पहला प्लांट

पवन ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2012 में पहला प्लांट फतेहाबाद में लगाया था। अब तक तीन प्लांट लगा चुके हैं। अभी हाल ही में रतिया में प्लांट लगाया है और एक प्लांट पंजाब में है। ये प्लांट लगाने से जहां समाज को प्रदूषण से मुक्ति मिल रही है, वहीं किसानों की आमदनी भी बढ़ रही है।

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Posted By: Sunil Kumar Jha