संवाद सहयोगी, बवानीखेड़ा : स्कूलों में नए सत्र शुरू हो चुका है। लेकिन अभी तक सरकारी स्कूलों में बच्चों को न किताबें मिली है और न ही किताबों के नाम पर मिलने वाली राशि उनके बैंक खातों में आई है। अब छठी से लेकर आठवीं तक स्कूल भी शुरू हो चुके हैं। ऐसे में आफलाइन क्लास में विद्यार्थियों को बिना पुस्तकों के पढ़ना चुनौतीपूर्ण होगा।

कोरोना के कारण पैदा हुए हालात में इस बार सरकार द्वारा स्कूलों में न तो किताबें भेजी है और नहीं पैसे। बच्चों को किताबों के नाम के 300 रुपये प्रति विद्यार्थी देने की घोषणा की थी। लेकिन ये पैसे भी अभी तक किसी बच्चे को नहीं मिले हैं। वहीं सबसे बड़ी समस्या यह है कि एनसीईआरटी की जो पुस्तकें सरकारी स्कूलों में लगाई जाती हैं सरकार द्वारा दी जा रही उस राशि में इन पुस्तकों को नहीं खरीदा जा सकता है। इन किताबों का रेट दुकानों पर 1000 से लेकर 1500 तक मिलता है। जबकि सरकार द्वारा 300 रुपये प्रति विद्यार्थी ही दिए जाते हैं। ऐसे में कोरोना काल में सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों की जेब पर अतिरिक्त भार पड़ता हुआ नजर आ रहा है। वैकल्पिक व्यवस्था में 50 फीसद विद्यार्थी रहेंगे वंचित

जब तक नई किताबें नहीं आती हैं तब तक विभाग सीनियर बच्चों की पुरानी किताबें ही जूनियर बच्चों को दिला रहे हैं। ऐसे में पुरानी किताबें लेने के बाद भी बड़ी संख्या में विद्यार्थी किताबों से वंचित हैं। किताबें आते ही स्कूलों को कर दी जाएगी वितरित

खंड शिक्षा अधिकारी सुखपाल सिंह ने बताया कि हम हर बच्चों तक किताबें पहुंचाने का प्रयास कर रहे है। किताबें आते ही स्कूलों को वितरित करवा दी जाए। अभी तक न ही किताबें आई हैं और न ही पैसे आए हैं।

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