सात समंदर पार से आए मेहमान, रूस और कजाकिस्तान से हजारों KM का रास्ता तय कर हरियाणा क्यों पहुंचते हैं विदेशी पक्षी?
साइबेरिया और मध्य एशिया से हजारों किलोमीटर का सफर तय कर प्रवासी पक्षी सर्दियों में हरियाणा के जलाशयों, खासकर भिवानी और चरखी दादरी के जलक्षेत्रों में पहुंच रहे हैं।

रूस और कजाकिस्तान से हजारों KM का रास्ता तय कर हरियाणा क्यों पहुंचते हैं विदेशी पक्षी (फाइल फोटो)
HighLights
साइबेरिया, रूस से हजारों किलोमीटर दूर हरियाणा पहुंचे पक्षी
भिवानी, चरखी दादरी के जलक्षेत्र बने इनका शीतकालीन ठिकाना
भोजन और अनुकूल मौसम की तलाश में करते हैं पलायन
नवनीत शर्मा, भिवानी। बर्फीली हवाओं और बदलते मौसम का सामना कर विदेशी परिंदे सर्दियों में भिवानी और चरखी दादरी के जलक्षेत्रों तक पहुंचते हैं। साइबेरिया, रूस, कजाकिस्तान और मध्य एशिया के अन्य ठंडे इलाकों से इनका आगमन अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में शुरू होता है।
नवंबर और दिसंबर में इनकी संख्या बढ़ने लगती है। मूल क्षेत्रों में तापमान गिरने, जलस्रोत जमने और भोजन की कमी के चलते ये पक्षी अनुकूल वातावरण की तलाश में लंबी उड़ान भरते हैं।
हरियाणा में गुरुग्राम का सुल्तानपुर राष्ट्रीय उद्यान, झज्जर का भिंडावास व खापरवास अभयारण्य, डीघल वेटलैंड, गुरुग्राम का बसई वेटलैंड और दमदमा झील प्रवासी पक्षियों के प्रमुख ठिकाने हैं।
कुरुक्षेत्र का छिलछिला अभयारण्य व ब्रह्मसरोवर, यमुनानगर का कलेसर राष्ट्रीय उद्यान, रेवाड़ी का नाहर अभयारण्य, भिवानी का डाबर क्षेत्र और चरखी दादरी का बिरही कलां जलभराव क्षेत्र भी पक्षियों के लिए अहम हैं।
इन प्रजातियों के आते है अधिक पक्षी
भिवानी में डाबर कालोनी के खाली मैदानों में जमा पानी और चरखी दादरी के गांव बिरही कलां का जलभराव इनके संभावित पड़ाव हैं। कई प्रजातियां मार्च के मध्य तक यहां रहती हैं और मौसम बदलने पर प्रजनन क्षेत्रों की ओर लौटने लगती हैं।
नॉर्दर्न पिंटेल, नार्दर्न शावलर, कामन टील, गैडवाल, यूरेशियन विजन, कामन पोचार्ड, मल्लार्ड, बार-हेडेड गूज, ग्रेलैग गूज और रडी शेलडक प्रमुख प्रवासी जलपक्षियों में शामिल हैं। किसी खास जलाशय में इन प्रजातियों की मौजूदगी की पुष्टि स्थानीय सर्वेक्षण से ही हो सकती है।
भोजन और अनुकूल मौसम की तलाश में पलायन
सर्दियों में पलायन करना प्रवासी पक्षियों के जीवनचक्र का हिस्सा है। साइबेरिया और उत्तरी रूस में कड़ाके की ठंड के दौरान कई झीलें और जलस्रोत जम जाते हैं, जिससे भोजन तलाशना मुश्किल हो जाता है। हरियाणा के तालाब, जलभराव वाले मैदान और वेटलैंड उन्हें भोजन, विश्राम और सर्दियां बिताने के लिए अनुकूल वातावरण देते हैं।
बिरही कलां की करीब 70 एकड़ जलभराव और सेमग्रस्त जमीन पक्षियों के लिए अहम पड़ाव हो सकती है। यहां ब्लैक-टेल्ड गोडविट, यूरेशियन वूली-नेक्ड स्टार्क, यूरेशियन स्पूनबिल और कामन ग्रीनशैंक जैसी दुर्लभ प्रजातियों के मिलने की जानकारी है। बार-हेडेड गूज भी यहां पहुंचते हैं।
मूल क्षेत्रों में बर्फ पिघलने के साथ पक्षियों की वापसी शुरू
सर्दी खत्म होने और मूल क्षेत्रों में बर्फ पिघलने के साथ पक्षियों की वापसी शुरू होती है। कई प्रजातियां फरवरी से मार्च के दौरान प्रजनन क्षेत्रों की ओर लौटती हैं। वापसी का समय प्रजाति और मौसम के अनुसार बदल सकता है। जलाशयों में पानी और भोजन की उपलब्धता भी उनके ठहराव को प्रभावित करती है।
भिवानी और चरखी दादरी क्षेत्र में सर्दियों के दौरान प्रवासी पक्षी पहुंचते हैं। जलभराव वाले क्षेत्र और तालाब इनके लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराते हैं। मूल क्षेत्रों में ठंड और भोजन की कमी के कारण ये पक्षी अनुकूल परिस्थितियों वाले क्षेत्रों की ओर पलायन करते हैं। -देवेंद्र हुड्डा, निरीक्षक, वन एवं वन्यजीव विभाग, भिवानी।
