दादा-ताऊ के सपने को पूरा करने के लिए जीतपाल ने थामी हॉकी स्टिक, अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लहरा रहे तिरंगा
भारतीय जूनियर हॉकी टीम ने चीन में जूनियर हॉकी एशिया कप का खिताब जीता, जिसमें चरखी दादरी के जीतपाल ने मिडफील्डर के रूप में अहम भूमिका निभाई।

भारतीय जूनियर हॉकी टीम ने चीन में जूनियर हॉकी एशिया कप का खिताब जीता (फाइल फोटो)
HighLights
भारतीय जूनियर हॉकी टीम ने एशिया कप का खिताब जीता
चरखी दादरी के जीतपाल ने जीत में अहम भूमिका निभाई
जीतपाल का अगला लक्ष्य जूनियर वर्ल्ड कप जीतना है
संदीप श्योराण, चरखी दादरी। चीन में आयोजित जूनियर हाकी एशिया कप में भारतीय टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए खिताब अपने नाम किया। फाइनल मुकाबले में भारत ने दक्षिण कोरिया को 4-1 से हराकर ट्राफी पर कब्जा जमाया।
इस ऐतिहासिक जीत में चरखी दादरी जिले के गांव बौंद कलां निवासी होनहार मिडफील्डर जीतपाल ने भी अहम भूमिका निभाई। जीतपाल की इस उपलब्धि से गांव ही नहीं, बल्कि पूरे जिले व प्रदेश में खुशी का माहौल है।
किसान परिवार से निकलकर हाकी में अंतरराष्ट्रीय स्तर तक का सफर तय कर चुके जीतपाल की सफलता के पीछे परिवार का खेलों के प्रति माहौल और स्वयं का जुनून है। उनके दादा ठाकुर ब्रह्म सिंह ने संयुक्त पंजाब के समय नेशनल स्तर तक हाकी खेली। वहीं, उनके ताऊ बलजीत सिंह भी स्टेट चैंपियन टीम का हिस्सा रहे।
उनके ताऊ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करना चाहते थे। किसी कारणवश वो अपना सपना पूरा नहीं कर पाए। लेकिन उनके भतीजे जीतपाल ने इसे पूरा करने की ठानी और न केवल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व किया बल्कि देश को एशिया कप जिताने में भी अहम भूमिका निभाई।
पिता पहलवान, बेटे ने चुनी हाकी की राह
जीतपाल के पिता पंच जगजीत सिंह ने खुद पहलवानी की लेकिन बेटे ने दादा और ताऊ की तरह हाकी को अपना करियर बनाया। पिता खेती करते हैं, इसके बावजूद उन्होंने बेटे के खेल के सपने को पूरा करने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
गांव में खेल सुविधाओं की कमी के बावजूद परिवार के सहयोग और जीतपाल की कड़ी मेहनत का परिणाम रहा कि गांव की पगडंडियों से शुरू हुआ सफर राष्ट्रीय और फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच गया।
जीतपाल पिछले करीब चार वर्षों से सोनीपत में चल रहे इंडिया कैंप का हिस्सा हैं। लगातार बेहतर प्रदर्शन के दम पर उन्होंने जूनियर भारतीय टीम में अपनी जगह मजबूत की। अब उनकी पहचान देश के उभरते हुए प्रतिभाशाली हाकी खिलाड़ियों में होने लगी है। इसी वर्ष फरवरी में उन्होंने आरटी सेंटर नासिक में आर्मी भी ज्वाइन की है।
अब जूनियर वर्ल्ड कप पर नजर
एशिया कप में सभी सात मैचों में जीतपाल टीम का हिस्सा रहे और आलराउंडर की भूमिका अदा करते हुए भारतीय टीम को चैंपियन बनाने में अहम भूमिका निभाई। जीतपाल का अगला लक्ष्य जूनियर वर्ल्ड कप में देश को विजेता बनाना है। इसके लिए वह लगातार अभ्यास और बेहतर प्रदर्शन पर ध्यान दे रहे हैं।
