जागरण संवाददाता, चरखी दादरी : गांव बरसाना से होकर गुजरने वाली इंदिरा कैनाल सोमवार अलसुबह टूट गई। जिससे गांव बरसाना की करीब 70 एकड़ जमीन जलमग्न हो गई। अधिक मात्रा में पानी आने के कारण खेतों में सरसों की फसल को काफी नुकसान होने की संभावना है। बाद में सूचना मिलने पर सिचाई विभाग के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया तथा पीछे से नहर का पानी बंद करवाया। जिसके बाद किसानों को कुछ राहत मिली। कैनाल टूटने के बाद वहां फैले पानी ने खेतों में बने मकानों को भी नुकसान पहुंचाया है। दादरी जिला के गांव अटेला व बरसाना के बीच से बहने वाली इंदिरा कैनाल सोमवार अल सुबह करीब तीन बजे गांव बरसाना की बणी के समीप से टूट गई। जिसके बाद आसपास के खेतों में पानी भर गया। सुबह उठकर किसानों ने खेतों में बड़ी मात्रा में जलभराव देखो तो उन्हें नहर के टूटने की जानकारी मिली। जिसके बाद उन्होंने इसकी सूचना सिचाई विभाग को देकर पानी को पीछे से बंद करवाया। गांव बरसाना के सरपंच ओमप्रकाश ने बताया कि नहर टूटने से 70 से 80 एकड़ जमीन जलमग्न हो गई। उन्होंने कहा कि इन खेतों में किसानों ने सरसों की फसल लगा रखी थी। लेकिन नहर टूटने से जल बहाव के कारण किसानों की फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई है। जिससे किसान पवन, कृष्ण, मुनेश, रामसिंह, हरि, मींटू इत्यादि दर्जनों किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। उन्होंने प्रशासन से पीड़ित किसानों को उचित मुआवजा देने की मांग की है।

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मकानों, बोरवेल को भी हुआ नुकसान

गांव बरसाना के सरपंच ओमप्रकाश ने कहा कि नहर टूटने के बाद काफी मात्रा में दूर तक पानी फैल गया। जिसके कारण नहर के समीप खेतों में बने करीब आधा दर्जन मकानों व बोरवेल को नुकसान पहुंचा है। उन्होंने कहा कि मकानों के बाहर अभी तक पानी भरा हुआ है। जिससे लोगों का घरों से निकलना भी मुश्किल हो गया है।

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मोटर खराब होने के कारण टूटी नहर : किसान

इंदिरा कैनाल गांव बरसाना स्थित तीन व चार नंबर पंप हाउस के बीच टूटी है। किसानों के अनुसार चार नंबर पंप हाउस की दोनों मोटरें खराब थी। जिसके कारण पीछे से नहर में अधिक पानी आ गया और पानी की लिफ्टिग नहीं हो पाई। जिसके चलते करीब तीन माह पहले ही खेतों में सिचाई के लिए बनाई गई मोरी के समीप से नहर टूट गई। जिस वजह से किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ा है।

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मौके पर पहुंचे विभाग के अधिकारी

गांव बरसाना में नहर टूटने की सूचना मिलने पर दादरी सिचाई विभाग के कार्यकारी अभियंता अरुण मुंजाल टीम के साथ मौके पर पहुंचे तथा मुआयना किया। उन्होंने कहा कि नहर टूटने से चार-पांच एकड़ में पानी भर गया है। लेकिन इससे किसानों को कोई नुकसान नहीं हुआ है। उन्होंने बताया कि नहर में पानी बंद को बंद करवा दिया गया है। नहर का मरम्मत कार्य पूरा होने के बाद ही पानी छोड़ा जाएगा।

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बिजाई कार्य होगा प्रभावित

किसानों ने कहा कि उनके खेत जलमग्न होने के कारण सरसों की फसल पहले ही बर्बाद हो गई है। वहीं गेहूं की बिजाई का समय भी आ चुका है। लेकिन खेतों में पानी भरा होने के कारण यहां पर समय रहते बिजाई नहीं की जा सकती। किसानों ने कहा कि बीजाई न होने या देरी से होने के कारण उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।

Posted By: Jagran

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