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8 महीने पहले दूल्हा बना हरियाणा का रणदीप, अब तिरंगे में लिपटकर लौटा पार्थिव शरीर; भतीजे रूपक ने दी मुखाग्नि

Published: Mon, 19 Oct 2026 01:51 PM (IST)

1-गोरखा राइफल्स के हवलदार-क्लर्क रणदीप सिंह का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव मानहेरू पहुंचा, जहां राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।

तिरंगे में लौटा भिवानी का लाल (जागरण फोटो)

तिरंगे में लौटा भिवानी का लाल (जागरण फोटो)

HighLights

  1. हवलदार-क्लर्क रणदीप सिंह का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार

  2. आठ महीने पहले हुई थी शादी, सड़क दुर्घटना में मौत

  3. पैतृक गांव मानहेरू में नम आंखों से दी गई विदाई

जागरण संवाददाता, भिवानी। तिरंगे में लिपटकर पैतृक गांव मानहेरू पहुंचे 1-गोरखा राइफल्स के जवाब हवलदार-क्लर्क रणदीप सिंह के पार्थिव शरीर का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।

सेना की टुकड़ी और पुलिस टीम ने सैन्य सम्मान के साथ जवान को अंतिम विदाई दी। वह माता पिता का इकलौता बेटा था और इसी साल 25 फरवरी को शादी हुई थी। भतीजे रूपक ने मुखाग्नि दी।

गांव के लाल को खाेने के चलते गांव मानहेरू की गलियों में रविवार को मातम पसरा था। हर आंख नम थी और हर चेहरा गमगीन। जिस घर में आठ महीने पहले शहनाइयां गूंजी थीं, वहां आज बेटे की अर्थी उठी तो खुशियों की जगह चीख-पुकार ने ले ली। गोरखा राइफल्स के जवान रणदीप सिंह की सड़क दुर्घटना में मौत के बाद पूरे गांव ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी।

सड़क हादसे में हुए थे घायल

रणदीप सिंह की ड्यूटी फिलहाल हिमाचल प्रदेश स्थित गोखा राइफल्स के सेंटर में थी। आठ अक्टूबर को वह सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गए थे।

उन्हें गंभीर हालत में दिल्ली के बेस अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करते हुए शनिवार को उन्होंने अंतिम सांस ली। जवान के पार्थिव शरीर को लेफ्टिनेंट कर्नल सुनील कुमार अपनी टीम के साथ गांव मानहेरू लेकर पहुंचे। तिरंगे में लिपटे लाल को देखकर स्वजन खुद को संभाल नहीं पा रहे थे।

आठ महीने पहले ही मनीषा का थामा था हाथ

गोरखा वन रेजिमेंट के जवान रणदीप की इसी साल 25 फरवरी को मनीषा से शादी हुई थी। घर में नई बहू के आने से खुशियों का माहौल था, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।

आठ महीने पहले जिस मनीषा ने जीवनभर साथ निभाने का वादा लेकर रणदीप का हाथ थामा था, आज उसी के सामने जिंदगीभर का बिछोह खड़ा था। पति को खोने के सदमे में पत्नी सुध-बुध खो बैठी। मां साधना, पिता सेना से सेवानिवृत्त पिता रमेश खुद को संभाल नहीं पा रहे थे। स्वजन को उनको ढांढस बंधा रहे थे।

भतीजे रूपक ने दी मुखाग्नि, गांव की आंखें हुईं नम

रणदीप की एक बड़ी बहन है, जिसकी शादी हो चुकी है। परिवार में उनके भाई के बेटे रूपक ने मुखाग्नि देकर अंतिम संस्कार की रस्म पूरी की। इस दौरान गांव के सरपंच प्रदीप कुमार, कानूनगो मंगल राठी, एसएचओ महावीर सिंह, दीपक कुमार सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण अंतिम यात्रा में शामिल हुए।

हर कोई परिवार को ढांढस बंधाने की कोशिश कर रहा था। हर जुबां पर था ऊपर वाले ये क्या किया। सबकी आंखें नम थी। गांव के लाडले को सबने नम आंखों से विदाई दी।