हरियाणा में लम्पी वायरस का प्रकोप, 150 से अधिक गायों की मौत
हरियाणा में लम्पी वायरस बीमारी घातक रूप ले रही है, जिससे प्रदेशभर में 150 से अधिक गायों की मौत हो चुकी है और 15,000 के करीब संक्रमित हैं।
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लम्पी वायरस से हो रही गायों की मौत।
HighLights
प्रदेशभर में 150 से अधिक गायों की लम्पी वायरल से मौत
भिवानी के आइसोलेशन सेंटर में 105 गायों ने दम तोड़ा
पशुपालन विभाग के वैक्सीनेशन अभियान पर गंभीर सवाल उठे
शिव कुमार, भिवानी। लम्पी वायरस ने पशुपालन करने वालों की चिंता बढ़ा दी है। प्रदेशभर में लम्पी वायरस बीमारी गायों पर घातक बनती जा रही है। गोशालाओं के बाद यह बेसहारा गोवंश के माध्यम से कालोनियों, गलियों तक पहुंच चुकी है।
हर रोज शहर की अलग-अलग कालोनियों से लम्पी पीड़ित गाय की मौत की सूचना आ रही है। सैकड़ों की संख्या में गाय इस बीमारी से संक्रमित है। अब तक 150 से अधिक गाय दम तोड़ चुकी है। बावजूद इसके पशुपालन विभाग अनभिज्ञ बना है।
उनके रिकार्ड में एक ही गाय की मौत है जबकि 105 गाय तो अकेले तिगड़ाना मोड़ के पास एक गोशाला की ओर से बनाए आईसोलेशन सेंटर में दम तोड़ चुकी है।
183 से अधिक गायों का चल रहा इलाज
इस आइसोलेशन सेंटर में भिवानी के अलावा चरखी दादरी, झज्जर, यमुनानगर तक से पीड़ित गायों को इलाज के लिए लाया गया था। अब भी यहां 183 लम्पी पीड़ित गाय उपचाराधीन है।
2022 में भी इस वायरस ने ली थी हजारों गायों की जान
प्रदेशभर में 15 हजार के करीब गाय लम्पी वायरस बीमारी की चपेट में है।लंबी वायरल ने वर्ष 2022 में पशुपालकों को काफी नुकसान पहुंचाया था। करीब 2937 पशुओं की मौत हुई थी और हजारों की संख्या में पशुओं खासकर गायों को अपने कोई न कोई अंग गंवाने पडे़ थे।
एक बार फिर यह गंभीर हो रहा है। यह मुख्यत: गायों, छोटे बछडे़-बछड़ियों को अपनी चपेट में ले रहा है।हरियाणा के अलावा यूपी, राजस्थान भी इसकी चपेट में है। हरियाणा में भिवानी, झज्जर, चरखी दादरी, सोनीपत, यमुनानगर, रोहतक क्षेत्र में ज्यादा केस सामने आ रहे है।ट
लम्पी बीमारी की चपेट में आई गायों में 75 प्रतिशत तक बेसहारा गाय है तो 25 प्रतिशत तक पालतु। राजस्थान से आने वाली गाय भी लम्पी वायरल बीमारी फैला रही है और इनके आवागमन पर अभी तक भी कोई रोक नहीं है।
वैक्सीनेशन पर उठे सवाल
पशुपालन विभाग का दावा है कि प्रदेशभर में संक्रमण रोकने के लिए 14.61 लाख पशुओं का वैक्सीनेशन करवाया है। इसके बावजूद इतनी बड़ी संख्या में गायों का लम्पी वायरल की चपेट में आना वैक्सीनेशन पर सवाल खडे़ कर रहा है।
अब आमजन भी इस पर सवाल उठा रहे है। बैंक कालोनी वासी विपिन ने बताया कि उनके यहां पूरी गली में ही वैक्सीनेशन के लिए कोई नहीं आया। लम्पी के चपेट में उसकी गाय और करीब एक साल की बछिया आई।
इलाज से गाय तो ठीक हो गई मगर बछिया नहीं बच पाई। अभी भी उनकी कालोनी में अनेक गाय लम्पी की चपेट में है।
कैसे फैलती है ये बीमारी
- कीटों और मच्छरों के काटने से : यह वायरस फैलने का सबसे मुख्य कारण मानसून के मौसम में मक्खी-मच्छरों का बढ़ना है। डंक मारने वाले मच्छर और मक्खियां (जैसे तबेले की मक्खियां) जब एक संक्रमित पशु को काटने के बाद स्वस्थ पशु को काटती हैं, तो वायरस फैल जाता है।पशुओं के शरीर पर रहने वाले परजीवी चिचड़ी और जूं भी इसे एक से दूसरे पशु में फैलाते है।
- दूषित खान-पान : संक्रमित पशु के लार से दूषित हुआ चारा यदि कोई स्वस्थ पशु खा लेता है, तो बीमारी फैलती है।
- सीधे संपर्क में आने से : यदि कोई स्वस्थ पशु किसी संक्रमित पशु के सीधे संपर्क में आता है, या उसके बहते हुए आंसू, नाक के डिस्चार्ज या त्वचा पर बने छालों/गांठों के मवाद के संपर्क में आता है, तो संक्रमण फैलता है।
- संक्रमित मवेशियों की आवाजाही : संक्रमित पशु जहां-जहां घूमेगा या जाएगा, वहां स्वस्थ पशुओं में बीमारी फैलने का खतरा सबसे अधिक रहता है।
कैसे करें बचाव
समय पर टीकाकरण : गोट पाक्स वैक्सीन स्वस्थ पशुओं को इस वायरस से बचाने का सबसे असरदार तरीका है। यह टीका केवल स्वस्थ पशुओं को ही लगाया जाता है।
- फार्म और तबेले की सफाई : पशु तबेले को कीट-मुक्त रखना सबसे जरूरी है। पशुओं के बांधने की जगह पर कपूर, नीम का तेल या डाक्टर की सलाह के अनुसार फार्मलीन/सोडियम हाइपोक्लोराइड का छिड़काव करें।
- मच्छरदानी का प्रयोग: रात के समय तबेले में मच्छरों से बचाव के लिए जालीदार खिड़कियों या मच्छरदानी का उपयोग करें। शाम के समय सूखे नीम के पत्तों का धुआं करने से मच्छर और मक्खियां भाग जाती हैं।
- संक्रमित पशु को अलग रखे : यदि कोई सुस्त दिखे, बुखार हो या त्वचरा पर गांठे दिखे तो उसे तुरंत अन्य स्वस्थ पशुओं से अलग कर दे।
ये उपचार है कारगर
संक्रमित पशु के इलाज में उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाना बेहद जरूरी है। इसके लिए उसका खान-पान बेहतर करना जरूरी है। उसे तुलसी, काली मिर्च, हल्दी, गिलोय और गुड़ का बना काड़ा दिया जा सकता है। उसे नीम के पानी से नहलाना चाहिए और घाव पर हलकी और नारियल तेल का लेप लगाए।
