विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

कहीं 170 पन्नों का इंतकाल, तो कहीं गायब हो गया मालिक का नाम, हरियाणा में ऑनलाइन पोर्टल के झोल में उलझे जमीन के मालिक

Published: Sat, 29 Aug 2026 03:26 PM (IST)

हरियाणा के राजस्व पोर्टल में तकनीकी खामियों के कारण जमीन से जुड़े काम महीनों की चिंता बन गए हैं, जिससे किसान और पटवारी दोनों परेशान हैं।

हरियाणा में इंतकाम से जुड़े काम हुए मुश्किल (जागरण)

हरियाणा में इंतकाम से जुड़े काम हुए मुश्किल (जागरण)

HighLights

  1. राजस्व पोर्टल की तकनीकी खामियों से जमीन के काम अटके

  2. इंतकाल, जमाबंदी में गलतियां, रिकॉर्ड गायब होने से परेशानी

  3. पटवारी-कानूनगो हड़ताल पर, सॉफ्टवेयर सुधार की मांग

जागरण संवाददाता, भिवानी। चंद मिनट में होने वाला जमीन का काम अब लोगों के लिए महीनों की चिंता बन गया है। रेवेन्यू हरियाणा पोर्टल से उम्मीद थी कि इंतकाल, जमाबंदी और जमीन से जुड़े दूसरे काम ऑनलाइन होकर आसान होंगे।

यहां तो पोर्टल लागू होने के बाद सामने आ रही तकनीकी खामियों ने व्यवस्था को ही उलझा दिया है। पटवारी और कानूनगो पोर्टल की खामियों को ठीक कराने के लिए द रेवेन्यू पटवार एवं कानूनगो एसोसिएशन हरियाणा के आह्वान पर पटवारी और कानूनगो हड़ताल पर हैं। दूसरी तरफ जमीन के मालिक अपने ही खेत-कागजों को लेकर दफ्तरों के चक्कर लगा रहे हैं।

किसी के इंतकाल का प्रिंट खाली निकल रहा है तो किसी की रजिस्ट्री में दर्ज जमीन ही कम दिखाई दे रही है। सॉफ्टवेयर की गलती का खामियाजा आखिर आम आदमी और पटवारी कानूनगो भुगतने को मजबूर हैं। यह मांग उठ रही है कि इन खामियों को तुरंत प्रभाव से ठीक किया जाए। प्रदेश सरकार इसे क्यों ठीक नहीं करा पा रही है इस पर सवाल उठ रहे हैं। हड़ताल कर्मचारी और आम लोग तो यह भी कह रहे हैं कि सरकार की नीयत में खोट तो नहीं है।

पटवारी-कानूनगो का कहना है कि हम ऑनलाइन व्यवस्था का वे विरोध नहीं कर रहे। उनका तर्क है कि पोर्टल को पूरे प्रदेश में लागू करने से पहले एक-दो गांवों में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर चलाया जाना चाहिए था। वहां सामने आने वाली तकनीकी खामियों को दूर करने के बाद इसे प्रदेशभर में लागू किया जाता। ऐसा नहीं होने से अब कर्मचारी भी परेशान हैं और आम आदमी भी परेशान हैं।

जमीन का हिस्सा पटवारी डाले, प्रिंट खाली निकले या कोई और हिस्सा निकले

पटवारियों का कहना है कि इंतकाल दर्ज करते समय पटवारी जमीन का हिस्सा दर्ज करता है, लेकिन प्रिंट निकालने पर वह हिस्सा दिखाई नहीं देता। उसकी जगह सॉफ्टवेयर अपने स्तर पर हिस्सा दिखा देता है, जो कई बार सही नहीं होता।

कई बार तो प्रिंट खाली आ जाता है। गिरदावर को भेजे गए इंतकाल में नौ नंबर कालम में नए मालिक का नाम नहीं दिखाई देने और जमीन का रकबा कम दिखने की शिकायत भी सामने आ रही है।

रजिस्ट्री में जितनी जमीन दर्ज है, प्रिंट निकालने पर सॉफ्टवेयर कम जमीन दिखा देता है। मई-जून में किए गए कुछ इंतकाल भी बाद में पोर्टल से गायब मिलने की बात कही जा रही है। वहीं मंजूर हो चुका इंतकाल प्रिंट करते समय खाली निकलने की शिकायत भी है।

एक पेज का इंतकाल 170 पेज का, दो पेज की जमाबंदी 50 पेज की मिल रही

तकनीकी गड़बड़ियों का आलम यह है कि एक पेज का इंतकाल 170 पेज तक निकल रहा है। दो पेज की जमाबंदी 50 पेज में प्रिंट हो रही है। नाम में सुधार के लिए ऑनलाइन बदर करने पर पुराने नाम गायब होने की बात भी सामने आ रही है। ऐसे में कर्मचारी भी यह तय नहीं कर पा रहे कि स्क्रीन पर दिख रहे रिकार्ड पर भरोसा करें या मूल दस्तावेजों पर भरोसा किया जाए।

गलती पोर्टल करे और जिम्मेदारी हमारी तय हो, ये कहां का न्याय

पटवारी-कानूनगो का सबसे बड़ा दर्द जिम्मेदारी को लेकर है। उनका कहना है कि सॉफ्टवेयर आइटी विभाग ने तैयार किया है, लेकिन तकनीकी गलती होने पर जवाबदेही पटवारी की तय की जा रही है।

कर्मचारियों का सवाल है कि अगर सिस्टम गलत डाटा दिखा रहा है तो उसके आधार पर काम करने वाले कर्मचारी को दोषी कैसे माना जा सकता है।

गांव दिनोद के किसान सज्जन ने बताया जमीन हमारे लिए सिर्फ कागज का टुकड़ा नहीं है। यही हमारी रोजी-रोटी है। रिकार्ड में जमीन कम हो जाए या नाम ही गायब हो जाए तो आदमी किसके पास जाए।

नया बाजार निवासी सतीश कुमार ने कहा रजिस्ट्री के समय जितनी जमीन खरीदी थी, अब ऑनलाइन रिकार्ड में कम दिख रही है। हम पटवारी के पास जाते हैं तो वह भी कहता है कि पोर्टल में दिक्कत है। आखिर हमारी गलती क्या है। एक बुजुर्ग शंकर ने कहा बच्चों की पढ़ाई और दूसरे जरूरी काम छोड़कर कई बार कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। ऑनलाइन व्यवस्था से सुविधा की उम्मीद थी, लेकिन परेशानी और बढ़ गई है।

वे तकनीक के खिलाफ नहीं हैं। उनकी मांग है कि पोर्टल की तकनीकी खामियों को तत्काल दूर किया जाए, लंबित और गायब रिकॉर्ड को सुरक्षित किया जाए तथा सॉफ्टवेयर की गलती के लिए कर्मचारियों को जिम्मेदार न ठहराया जाए। जब तक व्यवस्था भरोसेमंद नहीं बनती, तब तक कर्मचारियों पर काम का दबाव और जवाबदेही डालना समस्या को और गंभीर करेगा। -विकास राठी, राज्य उपाध्यक्ष, द रेवेन्यू पटवार एवं कानूनगो एसोसिएशन।