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हरियाणा में देसी नस्ल की गायों ने किसानों की कर दी मौज, दूध से कमाई के साथ खाद तक दे रहीं गायें

Published: Fri, 04 Sep 2026 08:19 AM (IST)

हरियाणा में देशी गायों की नस्लों को बढ़ावा देने से पशुपालकों की आय बढ़ रही है, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है।

हरियाणा में देसी नस्ल की गायों ने किसानों की कर दी मौज (फाइल फोटो)

हरियाणा में देसी नस्ल की गायों ने किसानों की कर दी मौज (फाइल फोटो)

HighLights

  1. देशी गायों की संख्या और दूध उत्पादन में वृद्धि

  2. सरकार द्वारा पशुपालकों को प्रोत्साहन राशि और ऋण

  3. हरियाणा, साहीवाल, थार पारकर नस्लों को बढ़ावा

सुरेश मेहरा, भिवानी। कान्हा की बांसुरी की धुन भले सुनाई न दे, लेकिन हरियाणा के कुछ गांवों में गायों की घंटियां फिर उम्मीद जगा रही हैं। कभी शाम ढलते ही खेतों से लौटते गाय-बछड़ों के झुंड से उठती धूल को गो-धूलि कहा जाता था।

वहीं गो-धूलि, वही गोपाल कृष्ण और वही गाय हरियाणवी जीवन की भी पहचान थी। वक्त बदला, गांव बदले, घरों से पशुधन घटा, लेकिन अब देसी नस्ल की गाय फिर किसान के आंगन में सिर्फ आस्था बनकर नहीं, आमदनी का भरोसा बनकर लौट रही है।

देसी गाय नस्लों में हरियाणा, साहीवाल और थार पारकर आदि को बढ़ावा देने के लिए सरकार प्रोत्साहन राशि भी दे रही है। कह सकते हैं कि देसी गायों के प्रति पशुपालकों का रुझान बढ़ रहा है। -डॉ. रविंद्र सहरावत, उपनिदेशक, पशुपालक, विभाग।

वर्ष 2019 की नवीनतम पूर्ण पशुधन गणना में हरियाणा में 19.32 लाख गायें दर्ज हुई थीं। 1997 में यह संख्या 24.01 लाख थी। 2012 में 18.08 लाख रही गायों की संख्या 2019 में बढ़कर 19.32 लाख हुई।

इससे भी बड़ी उम्मीद देसी गोवंश में दिखती है। 2012 के करीब 8.12 लाख देसी नॉन-डिस्क्रिप्ट गोवंश के मुकाबले 2019 में यह संख्या 9.50 लाख पहुंच गई।

 

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर कान्हा को माखन का भोग लगेगा। मंदिरों में गाय के साथ झांकियां सजेंगी। श्रीकृष्ण को याद करने का सबसे सुंदर तरीका शायद यह है कि उनकी गोपाल परंपरा को हरियाणा की अर्थव्यवस्था में सम्मान की जगह मिले। -डॉ. मोहनलाल बालेसरा।

गाय अब भावना के साथ कमाई का जरिया भी बन रही

प्रदेश में हरियाणा, साहीवाल और थार पारकर जैसी देसी नस्लों को बचाने और बेहतर बनाने पर जोर है। अधिक दूध देने वाली श्रेष्ठ देसी गायों की पहचान कर पशुपालकों को 5,000 से 25,000 रुपये तक प्रोत्साहन दिया जा रहा है।

2025-26 में 31 दिसंबर तक 1,466 श्रेष्ठ देसी गायें चिह्नित की जा चुकी थीं। हरियाणा का दूध उत्पादन 2014-15 के 79.01 लाख टन से बढ़कर 2024-25 में 125.93 लाख टन हो चुका है। प्रदेश में 2.20 लाख पशुधन किसान क्रेडिट कार्ड स्वीकृत किए गए हैं और पशुपालकों को 3,449 करोड़ रुपये का ऋण दिया जा चुका है।