संवाद सहयोगी, बवानीखेड़ा: गांव मित्ताथल स्थित उप स्वास्थ्य केन्द्र की हालत इन दिनों जर्जर अवस्था में है। इसके चलते स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी इन दिनों उधार के कमरे का सहारा लेकर ही कार्य कर रहे हैं। बताया गया है कि मित्ताथल उपस्वास्थ्य केन्द्र की ईमारत को लोकनिर्माण विभाग द्वारा वर्ष 2017 में कंडम घोषित किया जा चुका है। हादसे के भय के चलते यहां पर कार्यरत कर्मचारियों ने अपना रिकार्ड लेकर गांव के ही एक निजी कमरे में इन दिनों डेरा डाला हुआ है। यहीं से स्वास्थ्य कर्मचारी गांव के कोरोना से संक्रमित मरीजों का उपचार करने में जुटे हुए हैं। यहां के उपस्वास्थ्य केन्द्र में दो बड़े व एक छोटा कमरा बना हुआ है। सभी कमरे जर्जर हालत में पहुंच चुके हैं। भवन की ईमारत के लिए निवर्तमान सरपंच निर्मला सहित स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों ने विभाग के उच्च अधिकारियों को कई बार पत्र लिखा जा चुका है लेकिन इस ईमारत की कंडम घोषित हुए चार वर्ष बीत चुके हैं लेकिन अभी तक इस ईमारत का पुन: निर्माण नहीं करवाया गया। इसके चलते स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी जगह-जगह डेरा डालने को मजबूर हैं। यहां के ग्रामीण निवर्तमान सरपंच प्रतिनिधि भीष्म सिवाच, प्रधान सरवर सांगवान, संदीप सिवाच, दिलबाग, रोहताश पहलवान, राजेश धारीवाल, ईश्वर सिंह, पुष्पेन्द्र सिवाच आदि ने सरकार से मांग की है कि इस उपस्वास्थ्य केन्द्र के भवन का शीघ्र की पून निर्माण किया जाए ताकि स्वास्थ्य कर्मचारियों को तो सुविधा मिल ही सके साथ-साथ ग्रामीणों को भी अपने उपचार के लिए एक उपयुक्त स्थल उपलब्ध हो सके। उपरोक्त ग्रामीणों ने कहा कि जब तक कोरोना संक्रमण का कहर चला हुआ है तब तक एक अस्थाई चिकित्सक भी नियुक्त किया जाए ताकि ग्रामीणों को स्वास्थ्य लाभ मिल सके।

55 लोग हो चुके हैं संक्रमित

गांव मित्ताथल में कोरोना के दूसरे चरण के तहत कुल 55 लोग संक्रमित हो चुके हैं। 11 एक्टिव केस चल रहे हैं और तीन लोगों की कोरोना से मौत भी हो चुकी है। गांव मित्ताथल की करीब 8 हजार की आबादी है। इस आबादी के स्वास्थ्य का जिम्मा एमपीएचडब्ल्यू राकेश घणघस व सुमन रानी के कंधों पर ही है। राकेश घणघस ने बताया कि अधिकतर कोरोना से संक्रमित मरीजों को होम आइसोलेशन पर रखा गया है। मरीजों के घर पर जा कर ही उनका उपचार किया जा रहा है।